इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स भरने वालों को अब सिर्फ ऑनलाइन तरीके से ही रिफंड जारी करता है। पहले यह रिफंड चेक के जरिए हुआ करता था। यह चेक की प्रक्रिया बंद करके सिर्फ ऑनलाइन ही टैक्स रिफंड किया जाता है।

भारत में 5 लाख से ऊपर इनकम होने पर सभी व्यक्तियों के लिए आयकर भरना जरूरी हो जाता है। कारोबारियों के लिए भी यही सीमा लागू होती है। जीएसटी लागू होने के बाद बड़े व्यापारियों यानी सलाना 40 लाख से ऊपर टर्नओवर होने टैक्स की प्रकिया पूरी तरह ऑनलाइन ही कर दिया गया है।

इनकम टैक्स भरने के बाद उसकी रिफंड अमाउंट ऑनलाइन पाने के लिए जरूरी है कि टैक्स भरने वाले व्यक्ति या कारोबारी का बैंक अकाउंट PAN यानी परमानैंट अकाउंट नंबर से लिंक होना चाहिए। साथ ही,बैंक अकाउंट नंबर आयकर विभाग के ई- फाइलिंग पोर्टल पर प्री-वैलिडेट होना चाहिए।

ऑनलाइन टैक्स रिफंड पाने के लिए इन प्रोसेस को करना होगा फालो:

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पर एक्सेस

आईटी पोर्टल पर एक्सेस करने के लिए कारोबारी को आयकर विभाग की वेबसाइट https://www.incometaxindiaefiling.gov.in पर विजिट करना होगा। इस वेबसाइट पर एक्सेस करने के लिए आपको यूजर नेम (टैक्सपेयर का पैन नंबर) और पासवर्ड की जरूरत पड़ेगी। अगर कोई व्यापारी पहले से इस वेबसाइट पर रजिस्टर्ड नही है तो इसे अपने आपको सबसे पहले रजिस्टर्ड करना होगा। यूजर नेम और पासवर्ड डालने के बाद नीचे एक कैप्चा दिखाई देगा, इसे एंटर करने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करते ही आपकी प्रोफाइल ओपन हो जाएगी।

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करेक्ट टैब को करें ओपन

पोर्टल पर कारोबारी की प्रोफाइल खुलने के बाद ‘dashboard’ टैब चेक करना चाहिए। अब आपको प्रोफाइल सेटिंग बटन पर क्लिक क्लिक करने के बाद आपको ड्रॉपडाउन मेन्यू में कई ऑप्शन दिखेंगे। इसके बाद ‘prevalidate your bank account’ ऑप्शन को सलेक्ट करें और आगे के  प्रोसेस कम्प्लीट करें।

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अकाउंट को प्री-वैलिडेट करें

कारोबारी को अपने बैंक अकाउंट नंबर को वैलिडेट करने के लिए बैंक अकाउंट नंबर, बैंक का IFSC कोड, बैंक का नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल-आईडी जैसी जानकारियां डालनी होंगी। ध्यान रहे कि पैन, मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी वहीं होने चाहिए जो आपके बैंक अकाउंट के साथ रजिस्टर्ड हैं। सभी जानकरियां भरने के बाद pre-validate’ बटन पर क्लिक करना होगा।प्री-वैलिडेशन स्टेटस टैक्सपेयर के रजिस्टर्ड ईमेल-आई़डी और मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। इसके अलावा भी आप अपना ई-फाइलिंग वेबसाइट  पर भी देख सकते हैं। वेबसाइट पर देखने के लिए आपको ‘profile settings’ और ‘pre-validate your bank account’ टैब्स पर क्लिक करना होगा।

ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें

कारोबारियों को यह सलाह दी जाती है कि बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट करने के लिए सबसे पहले पैन और बैंक अकाउंट को लिंक कर लें। टैक्स भरने वाले कारोबारी केवल प्री-वैलिडेट बैंक अकाउंट से ही इनकम टैक्स रिटर्न को ई-वेरिफाई कर सकते हैं।

बिजनेस लोन के जरिए हो सकती है इनकम टैक्स में बचत

कारोबारी अगर अपने बिजनेस के विस्तार के लिए बिजनेस लोन लेते हैं तो सरकार के तरफ से उन्हें टैक्स में बेनिफिट्स प्रदान किया जाता है। अगर आपका बिजनेस 2 साल पुराना है और सालाना ITR डेढ़ लाख फाइल करते है और सालाना 5 लाख तक का टर्नओवर है, तो ZipLoan से 1 से 5 लाख तक बिजेनस लोन सिर्फ 3 दिन में बिना कुछ गिरवी रखे प्राप्त कर सकते हैं।

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