GST व्यवस्था लागू होने के बाद देश में टैक्स की पूरी प्रणाली ही रातो-रात बदल गई। व्यवस्था बदली तो तरीके भी बदल गए। इसी बदलाव में एक बदलाव का नाम है HSN कोड सिस्टम। HSN का पूरा नाम Harmonized System of Nomenclature (हार्मोनाईस्ड सिस्टम ऑफ़ नॉमेनक्लेचर) है, इसे हिंदी में “सामंजस्य नामकरण प्रणाली” है। HSN कोड का मुख्य कार्य वस्तुओ (Goods) और सेवाओं (Services) के लिए इंटरनेशन स्तर पर वर्गीकरण करना है। आइए समझते है की एचएसएन कोड से बिजनेस में क्या – क्या लाभ हो सकता है:

HSN कोड का स्वरूप क्या है?

GST टैक्स में शामिल वस्तुओं को ठीक वर्गीकरण करने और उनपर लागू होने वाली टैक्स दरों को निश्चित करने के लिए एवं एक समान बनाने के लिए एचएसएन कोड बनाया गया है। इसको अंको में निर्धारित किया गया है, यह 2 अंक, 4 अंक और 8 अंक के हो सकते है। नियमनुसार सभी सामानों पर टैक्स की दरें भिन्न-भिन्न है, इसलिए किसी भी तरह के विवाद से बचाने के लिए भिन्न-भिन्न वस्तुओं के लिए दो हजार कोड बनाया गया है।

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क्या है HSN कोड के लाभ

GST व्यवस्था का अपना तरीका है। यह “एक देश एक कर” के फार्मूले पर कार्य करता है। सीधे शब्दों इसे ऐसे समझ सकते है, जिस वस्तु का मूल्य जितने रुपये लखनऊ में होगा, उसी वस्तु का मूल्य उतना ही कश्मीर में होगा। इससे कई प्रकार के लाभ है।

HSN कोड के निम्नलिखित लाभ है:

  • सामानों पर लगने वाले टैक्स के बारे में जानकारी होना
  • यह सीमा शुल्क और केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के लिए देश भर में हर जगह माल (सामन) की विशेषता बताने में मदद करता है।
  • यह दुनिया भर में हर जगह एक समान कर (टैक्स) निर्धारण करने में मदद करता है।
  • कई देशों के व्यापारियों का एक साथ काम में बहुत ही सहायता प्रदान करता है।
  • इसे डाकोमेंटेश, इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और अपने बिजनेस को यूनिक बनाने में मदद प्रदान करता है।
  • यह सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के लिए पूरे देश में सामानों को वर्गीकृत करने में मदद करता है
  • यह पूरी दुनिया में एक समान कराधान प्रणाली प्रदान करता है
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने में अधिक आसानी
  • इसका उपयोग रिटर्न, चालान और अन्य दाखिल करने में भी किया जा सकता है
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HSN कोड क्यों महत्वपूर्ण है।

भारतीय टैक्स व्यवस्था (कराधान प्रणाली) फॉर्म 6 के तहत जनरल वर्ग या मूल्यांकन वर्गों हेतु माल 1211 के वर्गों में अलग किया गया है। टैक्स पांच वर्गों में, 0%, 5%,12%।18% और 28% में विभाजित हुआ है। GST के उपयोग एवं माल (Goods) के मूल्यों को निर्धरित करते समय कम जटिल हो इसके लिए तथा HSN कोड उत्पादों (प्रोडक्ट) पर सही टैक्स मूल्य निर्धारित कर मॉल (वस्तु) आपूर्ति (सप्लाई) के लिए आवश्यक है।

मॉल बेचने के बाद जब पर्चेस रसीद जारी किया जायेगा, तब उस रसीद में बेचीं गई मॉल (वस्तु) का HSN कोड दर्ज होगा। अब यहां बिजनेसमैनों को अपने द्वारा सेल की जा रही सामान के HSN कोड की जानकारी रखनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है की GST का ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करते समय किस कोड की कितना सामान बेचा गया और कितना खरीदा गया इसकी जानकारी देनी होगी।

HSN कोड क्या है और GST में HSN कोड क्यों जरुरी है? HSN Code List? What is HSN Code and Why It is Important for GST

क्यों जरूरी है HSN कोड

एचएसएन कई मायनों में जरूरी है। यह आपको किसी भी सामान पर लगने वाले टैक्स के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है। इसे एक उदाहरण से समझिए, मान लीजिए मान लिए कार पर टैक्स दर 5% है तो कार के पार्ट्स के लिए यह टैक्स दर 12% हो सकती है। इसलिए जब कोई कार बेचता है तो उसका HSN कोड अलग होता है और जब वह कार के पार्ट्स बेचेगा तो उसका HSN कोड अलग होगा। इसी तरह अन्य वस्तुएँ जैसे- सोने के गहने, हीरे-मोती, जवाहरात आदि पर HSN कोड और टैक्स दर भी अलग हो सकती है।

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सीजीएसटी क्या है?

केंद्रीय वस्तु और सेवा कर (सीजीएसटी) एक राज्य के भीतर होने वाली वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अप्रत्यक्ष जीएसटी कर को संदर्भित करता है। यह उत्पाद के आधार मूल्य पर वसूला जाता है। सीजीएसटी दर उन करों में से एक है जो राज्य के भीतर लेनदेन के दौरान वसूला जाता है और दूसरा एसजीएसटी है। ये दोनों कर आमतौर पर उत्पाद की बिक्री पर समान दर से वसूले जाते हैं।

आईजीएसटी क्या है?

एकीकृत माल और सेवा कर (IGST) वस्तुओं और सेवाओं के साथ-साथ आयात के अंतरराज्यीय लेनदेन पर लगाए गए GST कर को संदर्भित करता है। यह कर केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है और फिर राज्यों के बीच वितरित किया जाता है। यह कर सुनिश्चित करता है कि राज्य को अन्य राज्यों के साथ कर के लिए समझौता नहीं करना है। वे टैक्स के सेटलमेंट के लिए सीधे केंद्र सरकार से डील कर सकते हैं।

एसजीएसटी क्या है?

राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) देश में वस्तुओं और सेवाओं के लिए अंतर-राज्यीय लेनदेन पर राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला अप्रत्यक्ष कर है। कर के इस रूप ने सभी मौजूदा करों को प्रतिस्थापित कर दिया है जिनमें शामिल हैं- वैट, राज्य बिक्री कर, मनोरंजन कर, राज्य उपकर और अधिभार और अन्य। कर राज्य सरकार द्वारा ही एकत्र किया जाता है जो अर्जित राजस्व का एकमात्र दावेदार भी है।

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जीएसटी के तहत विभिन्न टैक्स स्लैब क्या हैं?

जीएसटी अधिनियम, 2017 के तहत सरकार ने सभी वस्तुओं और सेवाओं के लिए 5%, 12%, 18% और 28% सहित चार टैक्स स्लैब के तहत 4-स्तरीय संरचना का प्रस्ताव किया है। भारत सरकार ने कई वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी कर स्लैब से भी छूट दी है जिसमें सैनिटरी नैपकिन, समाचार पत्र और पत्रिकाएं, कृषि उपकरण और अन्य शामिल हैं।

टैक्स रेट प्रोडक्ट्स
5% खाद्य तेल, चीनी, मसाले, चाय और कॉफी (तत्काल को छोड़कर) जैसी घरेलू आवश्यकताएं शामिल हैं। कोयला, मिष्टी/मिठाई (भारतीय मिठाई) और जीवन रक्षक दवाएं भी इस जीएसटी स्लैब में शामिल हैं।
12% इसमें कंप्यूटर और प्रसंस्कृत भोजन शामिल हैं।
18% बालों का तेल, टूथपेस्ट और साबुन, पूंजीगत सामान और औद्योगिक

बिचौलियों को इस स्लैब में शामिल किया गया है।

28% छोटी कारें, एसी और रेफ्रिजरेटर जैसी टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं, प्रीमियम कार, सिगरेट और वातित पेय, हाई-एंड मोटरसाइकिल जैसी लक्जरी वस्तुएं यहां शामिल हैं।

जीएसटी कर दरों में संशोधन (संशोधन, सभी बड़े हालिया संशोधन)

21 जुलाई, 2018 को हुई 28वीं जीएसटी परिषद की बैठक में जीएसटी स्लैब दर के संबंध में कई संशोधन किए गए। इसमें 28% स्लैब पर जीएसटी दरों में कटौती शामिल है जो 18% और 12% तक आ गई है। राखी, सैनिटरी नैपकिन, पत्थर / संगमरमर / लकड़ी से बने देवताओं और अन्य सहित कई उत्पादों के लिए 18%, 12%, `5% जीएसटी स्लैब दरों वाले सामान और सेवाएं शून्य हो गईं। जो उत्पाद 12% से घटकर 5% हो गए, उनमें हैंडलूम दारी, फॉस्फोरिक एसिड, सेनील फैब्रिक और अन्य शामिल हैं।

बांस के फर्श, ज़िप और स्लाइड फास्टनरों, हाथ से संचालित रबर रोलर को 12% के जीएसटी स्लैब के तहत शामिल किया गया था, जो 18% से कम हो गया था। विशिष्ट हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए जीएसटी दरों को 18% से घटाकर 12% और कुछ 5% के लिए कर दिया गया है।