नवविवाहित यानी जिसका कुछ समय पहले विवाह हुआ हो। हमारे देश में यह प्रचलित धारणा है की शादी पर खूब खर्चा करना है। मतलब जितना अधिक से अधिक हो सके, उतना अधिक खर्च करना है।

शादी में खर्च करने से कोई आर्थिक रुप से कमजोर व्यक्ति भी पीछे नहीं हटता है। जिस व्यक्ति के पास पर्याप्त धन नहीं होता है, वह व्यक्ति भी किसी से पैसा मांगकर या लोन लेकर शादी में खर्च करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है की लोग शादियों में खर्च ही क्यों करते हैं? इस सवाल का उत्तर सभी का अलग – अलग हो सकता है। लेकिन, सभी के उत्तर में यह समानता देखा जा सकता है, वह शादी में इसलिए अधिक पैसा खर्च करते हैं, ताकि उनकी नाक उनके समाज में बची रहे या उंची रहे।

गर किसी व्यक्ति ने गलती से भी उनके द्वारा शादी में किये जा रहे खर्च के बारें में रोक – टोक करने की कोशिश किया, तो उस व्यक्ति को सामत आनी तय है।

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लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वाकई में शादियों में बेहिसाब खर्च करना सही है कदम है? इस सवाल का जवाब अगर कई हो सकता है, लेकिन इस सवाल के सभी जवाब में यह समानता देखने को मिलेगी की शादीयों में बेहिसाब पैसा खर्च नहीं करना चाहिए।

तो क्या करना चाहिए? शादी में पैसा खर्च करने की बजाय वही पैसा नवविवाहित को दे देना चाहिए या उनके नाम पर कोई प्रॉपर्टी खरीद लेना चाहिए। इससे यह होगा कि नवविवाहित का भविष्य सुरक्षित बनेगा।

नवविवाहित दंपति को शुरुवात में जितना फाइनेंशियल सपोर्ट मिलेगा, उनका आगे का जीवन उतना ही अधिक सुरक्षित और सुखमय बनेगा। इसी के साथ नवविवाहित जोड़ों को भी कुछ इस तरह की फाइनेंशियल प्लानिंग करना चाहिए, जिससे उनका आगे का भविष्य सुरक्षित और सुखमय बन सके। आइये जानते हैं कि एक नवविवाहित दंपति को किस तरह की फाइनेंशियल प्लानिंग करना चाहिए।

बचत को बनाए मूलमंत्र

सभी के जीवन का कुछ मूलमंत्र होता है। नवविवाहित दंपत्ति का मूलमंत्र होना चाहिए बचत करना। ऐसा कहा जाता है की बचत करना जिसने सीख लिया उसने जग जीत लिया।

बचत करना कोई एक दिन में नहीं सीख सकता है। बचत करना एक आदत है और आदत धीरे – धीरे आती है। हर रोज करने से आती है। ऐसे बचत की आदत भी धीरे – धीरे आती है।

बचत की आदत डालने के लिए सबसे पहले घर का सामान खरीदने से शुरु की जा सकती है। अगर कोई नवविवाहित है और घर से दूर किसी और शहर में शिफ्ट हो रहा है तो जाहिर सी बात है कि उन्हें घरेलू चीजों की जरूरत पड़ेगी।

जब भी घरेलू चीजों की खरीदारी करना हो तो इस बात खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए की आवश्यकता से अधिक और अधिक महंगी चीजें न खरीदा जाए।

इन्वेस्टमेंट होता बहुत बहुत जरूरी

सैलरी एक समय बाद बंद हो जाती है। सैलरी के बारे में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है कि व्यकित की सैलरी उतनी ही होती है, जितना व्यक्ति बचत करता है।

मतलब किसी व्यक्ति को अगर 50 हजार रुपये सैलरी मिलती है और उसका खर्च ही 40 हजार रुपये है तो, उस व्यक्ति की कमाई 50 हजार नहीं बल्कि 10 हजार रुपये मानी जाएगी।

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नवविवाहित दंपत्ति के साथ किसी भी इंसान को करियर के शुरुआत में ही इन्वेस्टमेंट पर बहुत ध्यान से काम करना चाहिए।

यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है की एक ही साथ बहुत धन का इन्वेस्टमेंट किया जाये, बजाय इसके व्यक्ति चाहें तो छोटी – छोटी रकम के रुप में इन्वेस्टमेंट कर सकता है।

कहा भी जाता है कि बूंद – बूंद से घड़ा भरता है। ठीक इसी तरह छोटी – छोटी रकम एक समय बाद बड़ी रकम में तब्दील हो जाती है। इसलिए किसी भी नवविवाहित को इन्वेस्टमेंट को तरजीह देना चाहिए।

इन्वेस्टमेंट के लिए म्यूच्यूअल फंड का सिप प्लान बहुत बेहतर ऑप्शन होता है। म्यूच्यूअल फंड के सिप प्लान में व्यक्ति अपने मतानुसार पैसा हर महीने जमा कर सकता है।

गैर जरूरी लोन लेने से बचना चाहिए

अगर नवविवाहित कारोबारी नहीं हैं बल्कि नौकरीपेशा हैं तो उन्हें शादी के तुरंत बाद लोन लेने से बचना चाहिए। लोन चूंकि लेना आसान होता है लेकिन उसे चुकाने में आर्थिक अनुशासन का पालन करना पड़ता है।

शादी के कुछ दिनों तक न चाहते हुए भी खर्चे बढ़ जाते हैं, जबकि इनकम उतनी की उतनी ही रहती है। ऐसे में लोन की ईएमआई चुकाना एक चुनौती बन सकता है।

हां अगर नवविवाहित कारोबारी है और कारोबार में पैसों की जरूरत है, तो बिजनेस लोन लेने से जरा भी पीछे नहीं हटना चाहिए। क्योंकि, बिजनेस में पैसा इन्वेस्ट नहीं किया गया तो मुनाफा प्रभावित होने का खतरा रहता है।

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जब बिजनेस का मुनाफा प्रभावित होगा, इसका सीधा असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ेगा, इसलिए बिजनेस पर्सन को बिजनेस लोन लेकर अपना बिजनेस आगे बढ़ाने से जरा भी हिचकिचाना नहीं चाहिए।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि देश की प्रमुख नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) – ZipLoan द्वारा एमएसएमई कारोबारियों को 5 लाख तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, न्यूनतम कागजातों पर, सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है।

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भविष्य की प्लानिंग

यह सार्वभौमिक सत्य बात है की शादी हुई है तो कुछ समय बाद बच्चे भी होंगे। जब बच्चे होंगे तो खर्च भी बढ़ेगा। जब बच्चे स्कूल जाने लगेंगे तो खर्च थोड़ा अधिक बढ़ जायेगा। बच्चे जब कॉलेज जाने लगेंगे तो बहुत अअधिक पैसों की जरूरत होगी।

ऐसे में भविष्य की फाइनेंशियल प्लानिंग करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। कहा भी जाता है कि रण में उतना ही कम खून गिरेगा, जितना अधिक रण की तैयारी करने में पसीना बाहाया गया होगा।

इसलिए शादी के कुछ समय बाद से ही बच्चों के भविष्य के बारें में विचार करना एक बेहतरीन फैसला साबित हो सकता हो।

इस तरह हम देखते हैं कि कोई भी नवविवाहित कुछ समझदारी भरे फाइनेंशियल प्लान बनाकर अपना जीवन सुखद और फाइनेंशियल रुप से सुरक्षित बना सकता है।