अक्सर अख़बार और न्यूज चैनलों पर जीडीपी (GDP) के बारें में बताया जाता है। कभी कहा जाता है किम जीडीपी बढ़ गई तो कभी कभी कहा जाता है कि जीडीपी घट गई। जीडीपी को देश के विकास से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में आम कारोबारियों के मन में सवाल उठता है कि आखिर जीडीपी (GDP) क्या है? हम इस आर्टिकल में आपको बतायेंगे कि जीडीपी क्या है और जीडीपी का आमलोगों के जीवन पर क्या असर पड़ता है।

जीडीपी (GDP) का मतलब क्या है?

जिस प्रकार स्कूली बच्चे सालभर स्कूलों में पढ़ाई करते हैं और साल के अंत में परीक्षा देते हैं। परीक्षा में आये बच्चों के परिणाम को मार्कशीट पर दर्ज कर दिया जाता है। इससे अध्यापक, विद्यार्थी और अभिवावक तीनों को ही यह पता चलता है कि बच्चे ने साल भर में कितना मन लगाकर पढ़ाई किया। किस विषय में बहुत अच्छा है, किस विषय में और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है और कौन सी विषय बच्चे को बहुत कम समझ आती है।

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ठीक इसी तरह जीडीपी के आंकड़े भी देश की प्रगति रिपोर्ट होते हैं। मतलब अगर जीडीपी के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है तो देश में प्रोड्क्शन बढ़ा है, लोगों की इनकम बढ़ी है और लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा है। वहीं अगर जीडीपी आंकड़े कम हुए होते हैं तो इससे यह पता चलता है कि देश में लोगों की आमदनी घटी है, नौकरियों में कमी आई है और प्रोडक्शन पहले के मुकाबले कम हुआ है।

जीडीपी (GDP) क्या है? What is a GDP in Hindi?

GDP (जीडीपी) अंग्रेजी शब्द है तथा एक शार्ट फॉर्म है। जीडीपी का फुल फॉर्म ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट है। हिंदी में जीडीपी को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। इन्हीं तीन शब्दों में जीडीपी का अर्थ छुपा हुआ है। सकल घरेलू उत्पाद यानी देश में होने वाला कुल उत्पादन, सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को जीडीपी कहते हैं।

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जब भी जीडीपी के आंकड़ों को प्रदर्शित किया जाता है तो वह आंकडें यह बताने के पर्याप्त होते हैं कि देश में उत्पादन बढ़ा है या घटा है। अगर बढ़ा है तो यह प्रगति का सूचक होता है। अगर जीडीपी के आंकडें पिछले साल के मुकाबले कम होते हैं तो यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि पिछले साल के मुकाबले विकास कम हुआ है।

किसी भी देश की जीडीपी का सीधा संबंध उस देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है। क्योंकि देश में हुए प्रोडक्शन के अनुसार ही देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी और घटोतरी दर्ज की जाती है। अगर किसी देश के जीडीपी के आंकडें सुस्त होते हैं तो यह मान लिया जाता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत ठीक नहीं है।

जीडीपी के आंकडें कौन निर्धारित करता है?

यह एक महत्वपूर्ण जानकारी है कि भारत में जीडीपी का निर्धारण 4 महीने के आधार पर किया जाता है। मतलब हर चार महीने की एक जीडीपी रिपोर्ट तैयार की जाती है। जिसके आधार पर हमें सुनने को मिलता है कि इस तिमाही जीडीपी बढ़ गई या जीडीपी घट गई।

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हमारे देश में सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफ़िस (सीएसओ) नामक एक संघटन है, जिसके द्वारा जीडीपी के आकंडे तैयार किये जाते हैं। मतलब सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफ़िस (सीएसओ) द्वारा हर चार महीने पर देश के सकल घरेलू उत्पादन का आकलन किया जाता है और उसी आकलन के आधार पर जीडीपी रिपोर्ट तैयार की जाती है। और जीडीपी ग्रोथ के आंकडें हमारे सामने रखे जाते हैं।

जब जीडीपी के आंकड़े कमजोर होते हैं तो क्या होता है?

जीडीपी का आंकड़ा कमजोर होने का मतलब है कि उत्पादन में कमी। इसका सीधा असर लोगों की आमदनी पर होता है। इसको हम सीधे शब्दों में कहें तो लोगों की कमाई पहले की मुकाबले कम हो जाती है और इस कारण हर कोई अपने पैसे बचाने में लग जाता है। लोग कम पैसा ख़र्च करते हैं और कम निवेश करते हैं। इससे आर्थिक ग्रोथ और सुस्त हो जाती है।

जब जीडीपी के आंकड़े अधिक होता है तब क्या होता है?

जब जीडीपी के आंकड़ों में ग्रोथ देखने को मिलता है तो इसका मतलब होता है कि सकल घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई है। लोगों के पास पैसा आया है और लोग पैसे खर्च करने के लिए तैयार हैं। जीडीपी के अंकों का अच्छा प्रदर्शन लोगों को इन्वेस्टमेंट करने के लिए प्रोत्साहित करता है। जब लोग मार्केट में पैसा निकालते हैं तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

जीडीपी कैसे कैलकुलेट होती है? How is GDP calculated in Hindi?

GDP का निर्धारण चार महत्वपूर्ण घटकों के जरिये किया जाता है। यह चार घटक हैं: उपभोग + सकल निवेश + सरकारी खर्च + निर्यात – आयात। आपको बता दें कि GDP (जीडीपी) एक स्टेंडर्ड फ़ॉर्मूला के अनुसार कैलकुलेट की जाती है। जीडीपी कैलुलुकेट करने का फ़ॉर्मूला निम्न होता है:

GDP = C + I + G + (X − M)

जीडीपी के फ़ॉर्मूले को विस्तार से समझने के लिए फ़ॉर्मूले के एक –एक शब्द का अर्थ समझना आवश्यक है। जो इस प्रकार होता है: GDP: ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (सकल घरेलू उत्पाद)

C: Consumption expenditure (कंजम्पशन एक्सपेंडिचर) यानी उपभोग।

I: Investment expenditure (इनवेस्टमेंट एक्सपेंडिचर) यानी सकल निवेश।

G: Government expenditure (गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर) यानी सरकारी खर्च।

(X − M): Export – Import (एक्सपोर्ट – इम्पोर्ट) यानी निर्यात – आयात।

Consumption expenditure (कंजम्पशन एक्सपेंडिचर) यानी उपभोग में गुड्स और सर्विसेज को ख़रीदने के लिए लोगों द्वारा किये गये कुल ख़र्च को कहते हैं।

Investment expenditure (इनवेस्टमेंट एक्सपेंडिचर) यानी सकल निवेश में वह सभी धन आता है जो देश के भीतर निवेश किया होता है।

Government expenditure (गवर्नमेंट एक्सपेंडिचर) यानी सरकारी खर्च में सभी सरकारों को मिलाकर किये गये खर्च की रकम आती है।

Export – Import (एक्सपोर्ट – इम्पोर्ट) यानी निर्यात – आयात में आयत और निर्यात में लगने वाली रकम शामिल होती है।

जीडीपी निर्धारण की प्रक्रिया समझने में एक तथ्य यह भी महत्वपूर्ण है कि जब GDP के आंकड़ों की निर्धारण की प्रक्रिया चल रही होती है तो सभी जीडीपी निर्धारण के शामिल सभी वास्तुओं की कीमतों का वैल्यू मौजूदा गिना जाता है। मतलब जो रेट वर्तमान में चल रहा होता है वही रेट गिनती किया जाता है।

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रियल जीडीपी हमें तब मिलती है, जब किसी केंद्रीकृत वर्ष के संबंध में वस्तुओं के मूल्यों के सापेक्ष एडजस्ट किया जता है। आपको बता दे कि रियल जीडीपी को अर्थव्यवस्था की ग्रोथ क दर्जा दिया जाता है।

जिन सेवाओं को जीडीपी निर्धारण में शामिल किया जाता है, वह निम्न हैं:

  1. कृषि
  2. मैन्युफैक्चरिंग
  3. इलेक्ट्रिसिटी
  4. गैस सप्लाई
  5. माइनिंग
  6. क्वैरीइंग
  7. वानिकी और मत्स्य
  8. होटल
  9. कंस्ट्रक्शन
  10. ट्रेड और कम्युनिकेशन
  11. फ़ाइनेंसिंग
  12. रियल एस्टेट और इंश्योरेंस
  13. बिजनेस सर्विसेज़ और कम्युनिटी
  14. सोशल और सार्वजनिक सेवाएँ

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