GST को लागू हुए 1 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। मगर अभी भी देश में इस बात पर चर्चा होती है कि जीएसटी फायदे और नुकसान क्या हैं। कई लोगों को तो अभी तक GST क्या है और इसका क्या प्रभाव है, समझ में नहीं आया। आइए आपको बताते हैं कि GST क्या है और इससे आपको होने वाले फायदे और नुकसान क्या हैं।

GST के क्या हैं फायदें और नुकसान

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क्या है GST-

GST का फुलफॉर्म है गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स। GST के लागू होने के बाद से पूरे में हर सामान और सेवा पर केवल एक टैक्स लगेगा। देश में वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे 32 तरह के विभिन्न टैक्सों को हटा कर सिर्फ एक टैक्स GST लगाया गया।

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आम जनता को क्या होगा फायदा?

GST लागू होने के पहले कई राज्यों में मिलने वाले एक ही सामान पर अलग अलग टैक्स लगता था। जीएसटी से आम लोगों को सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि पूरे देश में सामान की खरीद पर एक जैसा ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी।

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GST में हैं 3 तरह के टैक्स-

जीएसटी में कुल 3 तरह के टैक्स शामिल हैं- सेंट्रल, स्टेट और इंटीग्रेटेड टैक्स। इस ढांचे के तहत पूरे देश में माल बेचने या सप्लाई करने वाले कारोबारियों को हर राज्य में तीन अलग-अलग जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने होंगे। इसके साथ ही अलग-अलग रिटर्न भरते हुए टैक्स का हिसाब रखना होगा। अगर कोई कंपनी कई तरह के कारोबार करती है तो उसे हर कारोबार का अलग रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

छोटे कारोबारी GST से रहें निश्चिंत-

सरकार ने यह बात पहले ही बताई थी कि 20 लाख सलाना टर्नओवर वाले व्यापारियों को जीएसटी देने की कोई जरूरत ही नहीं है। यानी कि अगर आपका सालाना कारोबारी टर्नओवर 20 लाख है, तो आपको चिंता की जरूरत बिलकुल नहीं है। 20 लाख से ऊपर के टर्नओवर वालों के लिए सरकार की तरफ से एक कंपोजीशन स्कीम है।

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क्या है कंपोजीशन स्कीम-

75 लाख रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए सरकार की कंपोजीशन स्कीम है। स्कीम का सबसे बड़ा फायदा ये है कि व्यापारियों को हर तिमाही में एक रिटर्न और साल का एक रिटर्न यानी कुल 5 रिटर्न ही दाखिल करने होंगे। इसके बाद कागज़ी कार्रवाई का झंझट कम होगा।

किन कारोबारियों है नुकसान-

भारत की कुल जीडीपी का 60 फीसदी सेवा क्षेत्र से आता है, यह अंदाज लगाया जा सकता है, कि जीएसटी की प्रक्रिया संबंधी जटिलता का कैसा असर सेवा-व्यापार पर पड़ेगा, जिसका पाला अब तक सिर्फ एक केंद्रीय अथॉरिटी से पड़ता था। बदकिस्मती से, GST के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को समझाने की वित्त मंत्रालय की कवायद अब तक बड़े औद्योगिक समूहों तक ही सीमित रही है। जबकि बड़े औद्योगिक समूहों के पास वकील और एकाउंटेंट्स रखने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। इसकी जरूरत दरअसल छोटे कारोबारियों और सेवादाताओं को थी, क्योंकि इनके पास इतने संसाधन नहीं हैं।