वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा संसद में दिया गया। भाषण में उन्होंने बताया कि अभी तक जीएसटी रिफंड के जितने भी मामले लटके हुए है उन सभी का निपटारा एक महीने के भीतर कर दिया जायेगा। लेकिन, एक महीने में जीएसटी रिफंड मिलने की राह में कई रोड़े नजर आ रहे हैं।

छोटे एवं मध्यम कारोबारियों के अटके सभी जीएसटी रिटर्न को कारोबारियों के बैंक खातों में पहुंचाने का भरोसा वित्त मंत्री द्वारा दिया था। इस लिहाज से वित्त मंत्रालय इस दिशा में कदम बढ़ाने भी शुरु कर दिया और बैठक आयोजित किया। लेकिन, बैठक बेनतीजा रही, बैठक में किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सका। सबसे बड़ी मुश्किल केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बैठाने में आ रही है। राज्य और केंद्र के तालमेल की कमी की वज़ह से कोई भी निर्णय नही हो पा रहा है।

एक समाचार पत्र से मिली जानकारी के अनुसार- जीएसटी काउंसिल के पास जीएसटी रिटर्न से जुड़े राज्य वार व्यवसायियों के बकाया रिफंड की रकम के आंकड़े मौजूद नहीं है। यह बड़ा कारण है कि अभी तक जीएसटी रिटर्न की रकम एक महीने में वापस करने की योजना पर कार्य मही हो पा रहा है और रिफंड की रकम अटकी पड़ी है। ऐसी स्थिति में 23 सितंबर तक बकाये जीएसटी रिफंड का भुगतान करना मुश्किल लग रहा है।

जीएसटी रिफंड: लंबी जांच प्रक्रिया भी बन रही है बाधक

जब भी जीएसटी रिटर्न  किया जाता है तब कागज़ी दस्तावेज़ों की जांच की लंबी प्रक्रिया की वजह से एक साल से अधिक समय से जीएसटी रिटर्न अटके हुए है। यह बात अलग है कि केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाला जीएसटी रिटर्न ठीक समय पर आ जाता है। लेकिन, जीएसटी नेटवर्क के सिस्टम में तकनीकी दिक्कतों से भी जीएसटी रिटर्न में देरी होती है।

जीएसटी रिटर्न में इन बातों का रखे खास ध्यान

पिछले महीनों में जीएसटी रिटर्न में हुई गड़बड़ियों की वजह से तमाम कारोबारियों को नोटिस मिली है। ऐसे कुछ बातों का विशेष तौर से ध्यान रखकर नोटिस से बचा जा सकता है।

सप्लायर और बायर्स (खरीदार) के रिटर्न में असमानता नहीं होनी चाहिए

कारोबारी जब भी रिटर्न से संबंधित डाटा अपलोड करते हैं तो इस बात खास ख्याल रखा जाना चाहिए कि बायर्स और सप्लायर का डाटा अलग- अलग नहीं होना चाहिए। अगर अपलोड डाटा में गड़बड़ी पाई जाती है तो फिर नोटिस का सामना करना पड़ेगा।

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बैंक खातों और लेनदेन के विवरण में कोई गलती न हो

कारोबारियों को चाहिए कि वह जब भी जीएसटीआर- 3बी के फॉर्म की समरी रिटर्न्स और जीएसटीआर-1 के फॉर्म में फाइनल रिटर्न भरे तो बहुत सावधानी बरतें। अकाउंट्स बुक और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखे।

जीएसटी रिफंड समय पर भरें

कारोबारियों के लिए GST रिटर्न देर से भरना परेशानी का सबब बन सकता है। दूसरी बात, अंतिम समय में भी रिटर्न भरने से अधिक गड़बड़ी होने की संभावना अधिक हो जाती है। इसका बेहतर उपाय यह है कि रिटर्न भरने की अंतिम तिथि का इंतजार किये बिना समय रहते रिटर्न फाइल कर देना चाहिए।

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