एक देश एक कर’ व्यवस्था के तहत टैक्स व्यवस्था में बदलाव कर GST यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) कर दिया गया। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2017 को लागू हुई। इससे पहले जहां देश में कई तरह से टैक्स देने की व्यवस्था थी, वहीँ इस व्यवस्था के आने के बाद सभी टैक्सों को मिलकर एक जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स बना दिया गया। नई व्यवस्था से देश भर में चीजों के दाम यानी मूल्य एक सामान हो गए यानी अगर किसी सामान का मूल्य अगर दिल्ली में 60 रूपये है तो वही सामान पटना में भी 60 रूपये में ही बिकेगी। इससे पहले राज्यों के अपने नियम के अनुसार टैक्स लगते थे तो चीजों मूल्यों में भी अंतर हुआ करता था।

यह अलग बात है की जीएसटी लागू होने के साथ ही व्यापारियों को कुछ परेशानिययां हुई, लेकिन कोई नई व्यवस्था शुरू होने पर कुछ दिक्कतें आती जरुर है, पर समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाता है। GST के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ, समय के साथ इसमें बहुत से बदलाव हुए, जिससे अब यह व्यवस्था व्यवहारिक बन चुकी है। पिछले दिनों गुड्स एंड सर्विस टैक्स काउंसिल की बैठक हुई, उस बैठक में बहुत महत्वपूर्ण बदलाव हुए, इस ब्लॉग में जानेंगे की क्या – क्या हुए बदलाव।

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अधिक पारदर्शिता

बदलाव के तहत अब करदाता को रिटर्न में नगद बहीखाता, इनपुट टैक्स क्लेम (ITC) के डिटेल्स भी रिटर्न जमा करते समय दिखाई देगा। करदाता चाहे तो पोर्टल में माध्यम से अपने कर (टैक्स) संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है। इससे पहले यह प्रक्रिया काफी काफी जटिल थी। इस नई व्यवस्था से नए रिटर्न व्यापारियों को काफी सहूलियत होगी। रिटर्न 3 B में हुए बदलाव से, व्यापारी जैसे – जैसे टर्नओवर का विवरण भरता जाता है, वैसे – वैसे पोर्टल खुद से CGST, IGST की गणना करने लगता है।

लघु एवं मध्यम व्यापारियों को सहूलियत

सालाना 40 लाख तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को GST रजिस्ट्रेशन से मुक्ति दिया गया है। इस फैसले से उन तमाम व्यापारियों को सीधे लाभ होगा जिनके सालाना टर्नओवर 40 लाख रूपये से कम है। पहले यह सीमा 20 लाख रूपये तक ही थी। पुरोत्तर के राज्यों में यह छूट की सीमा क्रमशः 10 लाख से बढ़कर 20 लाख तक हो गई है। छूट की सीमा के साथ ही अगर कारोबारी 40 लाख से ऊपर तक के व्यवसाय को शुरू करना चाहता है तो उसे अपना व्यवसाय शुरू करने की अनुमति होगी, इसके साथ ही उसे 1 महीने के अंदर जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा लेने की व्यवस्था की गई है।

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कंपोजिशन स्कीम

व्यापरियों के हर महीने रिटर्न भरने से बचाने के लिए सरकार कंपोजिशन स्कीम लेकर आई है। कंपोजिशन स्कीम में रजिस्टर्ड व्यक्ति को उसके बिजनेस के टर्नओवर के आधार पर एक फिक्स्ड रेट से टैक्स देना होता है। कंपोजिशन स्कीम का सबसे बड़ा फायदा यह है की कारोबारी हर महीने टैक्स फाइल करने से बच जायेंगे, हर महीने के जगह पर तिमाही के रूप में टैक्स जमा कर सकते है। कंपोजिशन स्कीम का लाभ वह कारोबारी उठा सकते है, जिनके कारोबार का सालाना टर्नओवर 1 करोड़ से कम हो।

इस स्कीम में रजिस्टर्ड व्यक्ति को तिमाही यानी तीन महीने समाप्त होने के 18 दिनों के भीतर फॉर्म GSTR 4 में रिटर्न फाइल करना होता है। साल के समाप्त होते – होते 31 दिसंबर तक फॉर्म 9A में वार्षिक रिटर्न फाइल करना होता है। यहां यह ध्यान देने वाली बात है की अगर व्यापारी द्वारा साल में कुछ ट्रांजेक्शन नहीं भी किया गया हो तो भी उसे तिमाही और वार्षिक रिटर्न फाइल करना ही होगा, यानी करदाता को NIL फाइल करना होगा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि GST के बाद टैक्स व्यवस्था में निरंतर सुधार हो रहा है और कारोबारियों के साथ ही पब्लिक को भी लाभ प्राप्त हो रहा है।