पिछले वर्ष भारत में सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर (जीएसटी) लागू हो चुका है। जीएसटी पूरे देश एक चर्चा का विषय बना हुआ था। जीएसटी को लेकर लोगों के मन में कई सवाल थे। जैसे जीएसटी क्या है, इसके आ जाने से आम जनता को क्या फायदे और क्या नुकसान होंगे। बेशक पिछले दिनों जीएसटी ने पूरे देश में खलबली मचा के रख दी, जिधर देखो जीएसटी के ही चर्चे सुनाई दे रहे थे। एक देश, एक टैक्स, जी हां ऐसा हम इसलिए कह रहे है क्योंकि जीएसटी ने देश में एक बड़ा बदलाव ला दिया है। जीएसटी के आ जाने से देश में कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल अब भी बना हुआ है। हालांकि कुछ कंपनियां जीएसटी के आ जाने से फायदे में हैं तो वहीं कुछ कंपनियों की सेहत बिगड़ चुकी है।

जीएसटी कब आया- 

सरकार के लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार पिछले वर्ष जुलाई में जीएसटी को धरातल पर उतार ही दिया गया। वर्तमान में, लगभग 160 देशों ने जीएसटी या वैट को किसी न किसी रूप में लागू कर दिया है। जीएसटी लागू करने वाला पहले देश फ्रांस था। जीएसटी के आने के पहले से ही हर किसी के मन में सवाल था कि जीएसटी क्या है? चलिए देखते हैं जीएसटी क्या है।

जीएसटी क्या है- 

source- Financial express

किसी भी प्रोडक्ट के बनने से लेकर ग्राहकों तक पहुंचने में उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि उस पर बिक्री के समय तक कई तरह के टैक्स लागू हो जाते हैं। जब कोई सामान फैक्ट्री में बनता है तो उस समय उस पर एक्साइज ड्यूटी लगती है। इसके बाद जब वो सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचता है तो उस पर एंट्री टैक्स लागू होता है। राज्य में पहुंचने के बाद उस पर वैट यानी सेल्स टैक्स भी लगाया जाता है, जो हर राज्य में अलग-अलग होता है। अगर बात अलग-अलग सेवाओं की करें जैसे एंटरटेनमेंट, रेस्टोरेंट में खाना, मोबाईल बिल या क्रेडिट कार्ड के बिल पर भी टैक्स लागू होता है। जीएसटी लागू होने के बाद सभी अलग-अलग तरह के टैक्स से छुटकारा मिला। सभी प्रकार की सेवाओं और सामानो पर सिर्फ एक ही तरह का टैक्स लगाया जा रहा है वो है ‘जीएसटी’। जीएसटी क्या है, ये तो आपने देख लिया, अब देखते हैं कि जीएसटी को लेकर सोशल मीडिया पर कैसा रिएक्शन रहा।

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सोशल मीडिया और जीएसटी 

जीएसटी लागू होने से पहले और बाद तक सोशल मीडिया पर जीएसटी को लेकर लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। जीएसटी को समझने में लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतें आईं। जीएसटी के फूल फॉर्म से लेकर ‘जीएसटी क्या है’ हर चीज पर लोगों ने अपने-अपने तरीके से शोध किया। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

जैसे- ‘भगवान श्रीकृष्ण के शब्दों में – हे पार्थ, परिवर्तन संसार का नियम हैं, जो कल तक ‘सेल्स टैक्स’ था, आज ‘वैट’ हैं, कल ‘जीएसटी’ होगा, तुम्हारा क्या गया जो तुम रोते हो। जो लिया ‘कस्टमर’ से लिया, जो कमाया वो सरकार को दिया, और जो बचा वो पत्नी को दे दिया, तुम्हारे पास पहले भी कुछ नही था, आगे भी कुछ नही रहेगा, व्यर्थ में ‘जीएसटी’ से डरते हो।

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट की जानकारी को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर मजाक बनते रहता है। जीएसटी के लागू होने के वक्त भी लोगों ने आलिया भट्ट की चुटकी ला। उन पर बना जोक कुछ यूं है- ‘रिपोर्टर ने आलियाभट्ट से पूछा – क्या आपको ‘GST’ के बारे में पता हैं? अलियाभट्ट – हां, G–गुड नाइट S–स्वीट ड्रीम T– टेक केयर।

जीएसटी के इतिहास में काफी उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। दरअसल समय-समय पर देश में सरकारें बदलती रही हैं, इसी वजह से विपक्ष में रहने वाली सरकार ने जीएसटी लागू न होने के लिए कई अड़चने पैदा करती रही हैं।

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जीएसटी को मिलती आ रही है तारीख पर तारीख

2011 में जीएसटी के लिए कांग्रेस सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, लेकिन बीजेपी ने फिर विरोध किया। उस वक्त के वित्तमंत्री पी चिदम्बरम ने कहा 31 दिसम्बर 2012 तक जीएसटी लागू कर देंगे। खैर 2012 में भी जीएसटी लागू नहीं हो पाया। 2014 में सरकार बदल गई। इससे पहले भी बदलती सराकरों के चलते जीएसटी को तारीख ही मिलती रही है।

2015 में फिर हल्ला बोला गया-जीएसटी क्या है

2015 में सरकार बदल चुकी थी। सत्ता बीजेपी के हाथ में थी और विपक्ष में बैठी थी कांग्रेस। मई 2015 में बीजेपी ने लोकसभा में संशोधन बिल पेश किया। अब कांग्रेस ने वो किया जो कभी बीजेपी ने पहले किया था। हां हां, वही विरोध। लिहाजा बिल राज्यसभा की स्टैण्डिंग कमेटी के पास भेज दिया गया और जीएसटी फिर से नहीं लागू हो पाया।

जीएसटी के नुकसान 

  1. जीएसटी एक तरह का भ्रामित करने वाला शब्द है, एक टैक्सेशन सिस्टम के नाम पर 2 प्रकार का टैक्स लग रहा है। जैसे एक सेंट्रल टैक्स और एक स्टेट टैक्स। इसके नियमों के बारे में अभी भी कुछ साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता है। इन दो के अलावा एक इंटरस्टेट जीएसटी भी लागू है।
  2. अधिकतर इंडायरेक्ट टैक्स भी अब जीएसटी के तहत आते हैं।
  3. जीएसटी हर एक वर्ग के लोगों को जीएसटी देना पड़ता है। अगर बात किसानो की करें तो उनकी कोई निश्चित आय नही है, लेकिन उन्हें भी जीएसटी देनी पड़ता है।
  4. जीएसटी बड़े पैमाने पर बड़े उद्योग के लिए लाभकारी है लेकिन लघु और मध्यमवर्गीय उद्योग के लिए इससे कोई विशेष फायदा नहीं हुआ है।
  5. पुरानी टैक्स व्यवस्था में हर राज्य के लिए ये मौका था कि वे अपनी जरूरतों के मुताबिक टैक्स का फैसला करें। नई व्यवस्था में ये बात खत्म हो रही है।
  6. जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई पर कोई खास रोकथाम नहीं हुआ।
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जीएसटी लागू करने में आने वाली चुनौतियां

  • अनुकूल व्यवस्था का आभाव।
  • टैक्स चोरी होने पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट तंत्र का न होना।
  • जीएसटी के प्रभाव का सही आंकलन न हो पाना।
  • ट्रेंड स्टाफ की कमी।

जीएसटी के फायदे

  • जीएसटी के लागु होने से मशीनों के दाम सस्ते हो चुके हैं. पहले मशीनों पर 28% टैक्स लगता है लेकिन जीएसटी के लगने से यह टैक्स 18% हो गया है।
  • घर में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर सामान जैसे टूथपेस्ट, तेल, साबुन जैसी इस्तेमाल होने वाली चीजो के दाम भी घट चुके हैं।
  • अनाज जैसे बेसन, चावल, गेहूं पर अभी 11% तक का टैक्स लगता था। लेकिन जीएसटी के आने से यह टैक्स पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। यानी इन पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं है। इस वजह से अनाज के दाम में थोड़ी गिरावट आई है।

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