वित्त मंत्री श्रीमती सीतारमण संसद में वित्त बजट पेश करते हुए कहा था कि 2024 तक भारत की वित्त व्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। लेकिन, इस बीच देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े आ रहे हैं उससे यह पता चलता है कि देश की विकास की रफ़्तार काफी धीमी चल रही है।

हलिया इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, वाहनों की बिक्री और वित्तीय संस्थानों के लोन वितरण में गिरावट से आर्थिक संकट दिखाई पड़ रहा है। ऐसे में 2024 तक 5 ट्रिलियन यानी 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना देखना महज सपना ही प्रतीत हो रहा है।

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हलांकि इस बात पर हम अपनी पीठ जरूर थपथपा सकते है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था दुनिया के शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति के साथ वृद्धि हासिल कर रहा है।

अर्थव्यवस्था की गति के मामले में हमने पड़ोसी देश चीन को पछाड़ दिया है लेकिन चिंता की बात यह है कि हमारे घरेलू बाजार में हमारी अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत ठीक नहीं है।

कई सेक्टर में आर्थिक मंदी के कारण भारी तादात में लोगों को नौकरियों से निकाला जा रहा है। कंपनियों के प्रोडक्ट बिक नहीं रहे हैं। रिटेल सेक्टर के कारोबारियों ने तो बाकायदा अख़बार में विज्ञापन देकर सरकार से मदद की गुहार लगाईं है।

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2016-17 में देश की जीडीपी विकास दर 8.2% थी, जो कि 2018-19 में 5.8% पर पहुंच गई है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की रिसर्च के मुताबिक 2019-20 की पहली तिमाही में यह और नीचे जाकर 5.6% पर पहुंचने की आशंका है।

क्या वर्तमान हालत के भरोसे 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन सकता है भारत?

इस सवाल का अभी वर्तमान तक उत्तर होगा – नहीं। हम इस 5.8 प्रतिशत की जीडीपी के साथ 2022 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था कभी नहीं बन सकते है।

दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला में लिखे एक लेख में कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के वाइस प्रेसीडेंट और रिसर्च हेड डा। रवि सिंह के अनुसार केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना का लक्ष्य रखा था।

अगर उसे हासिल की करने का उत्तर जानना चाहे तो यह नहीं में मिलेगा। डॉ सिंह आगे कहते है, ‘यदि केंद्र सरकार को न्यू इंडिया के सपने को पूरा करना है तो सरकार को आर्थिक मोर्चे पर कुशलतापूर्वक अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा।

सोर्स- https://www.amarujala.com/business/business-diary/how-five-trillion-economy-will-be-made-when-gdp-reached-its-lowest-level

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