इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। इनकम टैक्स भरने से पूर्व फॉर्म 26AS जरूर देख लेना चाहिए। क्योंकि ITR फाइल करने से पहले अपने सभी कागजी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करना जरुरी होता है। कागज़ी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करने वाला फॉर्म ही फॉर्म 26AS होता है। फॉर्म 26 एएस वार्षिक कन्सॉलिटेड टैक्स स्टेटमेंट होता है। इसमें टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स), टैक्स और ITR रिफंड इत्यादि का पूरा ब्यौरा होता है।

क्या होता है फॉर्म 26AS?

फॉर्म 26AS में उन सभी टैक्स की जानकारी होती है जो उपभोक्ता (संबंधित व्यक्ति) सरकार को चुकाते हैं। फॉर्म 26 एएस एकीकृत वार्षिक टैक्स स्टेटमेंट होता है। इस स्टेटमेंट की जानकारी उपभोक्ता (संबंधित व्यक्ति) अपने पैन कार्ड (PAN Card) के जरिए इनकम टैक्स की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।

कारोबारी या नौकरीपेशा व्यक्ति जब अपनी आमदनी के हिसाब से इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं। टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) कटता है तो इस ट्रांजेक्शन की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में तो होती है लेकिन उपभोक्ता (संबंधित व्यक्ति) नहीं होती है। अगर उपभोक्ता (संबंधित व्यक्ति) इन सभी की जानकारी प्राप्त करना चाहे तो वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म 26AS देख सकता है।

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फॉर्म 26 एएस में डिडक्टर का नाम (धन काटने वाली संस्था का नाम) से जुड़ी जानकारी मिलती है। फॉर्म 26 एएस में डिडक्टर से जुड़ी सभी तरह की जानकारी प्राप्त होती है। इन जानकारियों में जहां से पैसा काटा गया है उस संस्था का नाम इस और डिडक्शन अकाउंट नंबर यानी TAN की जानकारी और चालू वित्त वर्ष के दौरान कितना टैक्स रिफंड के रूप में प्राप्त किया गया इत्यादि की जानकारी एक पेपर पर मिल जाती है। इसे आप चाहे तो प्रिंट भी कर सकते हैं। फॉर्म 26AS किसी भी टैक्सपेयर के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है इसे सालाना टैक्स स्टेटमेंट है भी कहते हैं।

कहां मिलता है और कैसे मिलता है फॉर्म 26AS

फॉर्म 26AS पाने के लिए आपको कही दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। यह फॉर्म आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ऑफिसियल वेबसाइट https://incometaxindiaefiling।gov।in पर ही प्राप्त हो जाता है। फॉर्म को वेबसाइट से डाउनलोड करना होता है। डाउनलोड करने का स्टेप निम्न है:

पहला स्टेप: इनकम टैक्स की वेबसाइट ओपन करें।

दूसरा स्टेप: वेबसाइट पर अपना ई-फाइलिंग टैब ओपन करें।

तीसरा स्टेप: ई-फाइलिंग तब में लॉग इन करें (लॉग इन करने के लिए आपको यूजर आईडी और पासवर्ड की जरूरत पड़ेगी)।

चौथा स्टेप: ‘View Form 26AS(क्रेडिट टैब)’ ओपन करें।

पाँचवाँ स्टेप: अब आपको असेसेमेंट ईयर सलेक्ट करना होगा, जिसका फॉर्म आप डाउनलोड करना चाहते हैं।

छठा स्टेप: अब आप HTML फॉर्मैट में फॉर्म देख सकते हैं और एक्सपोर्ट पर क्लिक कर पीडीएफ फाइल सेव कर सकते हैं।

फॉर्म 26AS से संबंधित महत्वपूर्ण बातें

  • इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए बहुत जरूरी होता है फॉर्म 26AS
  • यह सालाना टैक्स स्टेटमेंट भी होता है, इसे पैन के द्वारा आयकर की वेबसाइट से प्राप्त किया जा सकता है
  • इस फॉर्म ने टीडीएस सर्टिफिकेट (फॉर्म 16/16A) भरने की परेशानी से छुटकारा दिया है।

ITR फाइल करने में कैसे मदद करता है फॉर्म 26AS

जब भी किसी कारोबारी या वेतनभोगी को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होता है तो उसे कई तरह की जानकारियों की जरूरत होती है। जानकारियों को वेरीफाई करने की जरूरत होती है। यह काम फॉर्म 26एएस ही करता है। इन जानकारियों में शामिल होता है- पहले चुकाए गए टैक्स का विवरण, टैक्स रिफंड का विवरण, किसी और तरह की हुई ट्रांजेक्शन का विवरण, टीडीएस इत्यादि संबंधित जानकारियां बहुत आसानी से प्राप्त हो जाती है। प्राप्त जानकारियां ITR फाइल करने में मदद करती हैं।

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आपके द्वारा चुकाए गए टैक्स का विवरण  

सरल शब्दों में कहें तो फॉर्म 26AS आपके हर तरह के टैक्स का सालाना स्टेटमेंट है। फॉर्म 26AS में काटे गए टैक्स (TDS) का विवरण होता है के साथ ही सभी तरह के भुगतान की जानकारी मिलती है। इस जानकारी का उपयोग इनकम टैक्स भरने में किया जाता है।

किराए पर दी गई प्रापर्टी पर कटा टीडीएस का विवरण

भारत में अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रापर्टी किराए पर देता है और किराए से 50 हजार से अधिक महीने की इनकम होती है तो किराया देने से पहले किराएदार टीडीएस काटकर पैसा देगा। इस प्रकार के कटे टीडीएस का भी विवरण भी फॉर्म 26एएस में होता है।

फॉर्म 26AS में बड़ी राशि के लेनदेन का भी विवरण होता है

टैक्सपेयर द्वारा किये गए किसी बड़ी राशि का भुगतान या किसी दूसरे सोर्स से प्राप्त बड़ी धनराशि के लेनदेन का विवरण फॉर्म 26AS में मौजूद होता है। यह जानकारी बैंकिंग व वित्तीय संस्थानों द्वारा फाइल किए गए वार्षिक रिटर्न सूचना यानी AIR पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए अगर आप महंगे म्यूचुअल फंड, प्रापर्टी या हाई-वैल्यू कॉर्पोरेट बॉन्ड आदि खरीदते हैं तो फॉर्म 26एएस में उसका विवरण दर्ज मिलेगा।

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  • बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख तक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

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