भारत सरकार की तरफ से वित्तीय वर्ष 2011-12 में एक फूड प्रोसेसिंग योजना की शुरुआत की गई थी। जिसके तहत सरकार का मिशन था कि इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और स्थानीय स्तर पर कच्चे माल का उत्पादन हो सकेगा। जिससे कि बाजार की खरीद और बिक्री प्रक्रिया में सुधार आ सके। इस योजना के तहत उद्योग की कुल लागत का 35% सरकार की तरफ से सब्सिडी के रूप में मिलना था। जिसमें 75% हिस्सा केन्द्र सरकार को और 25% हिस्सा राज्य सरकार को देना था।

फूड प्रोसेसिंग यूनिट में हो रहा उद्यमियों को नुकसान

यह योजना देखने और सुनने में जितनी अच्छी लग रही है दरअसल यह उतनी ही बुरी तरह से फेल भी हो चुकी है। केन्द्र सरकार की तरफ से जो रकम सब्सिडी के रूप में राज्य सरकार को देनी वो नहीं दी गई है। सरकार के भरोसे राजस्थान के सैकड़ों लोगों ने करोड़ों रुपये लगाकर बिजनेस शुरु कर दिया। मगर सरकार की तरफ से सब्सिडी न मिलने की वजह से वे सारे कारोबारी कंगाल होने की कगार पर हैं।

176 उद्यमी लगा चुके हैं उद्योग-

सरकार की इस योजना के भरोसे राजस्थान के 176 लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च करके फूड प्रोसेसिंग की यूनिट लगाई। इसके साथ ही इससे संबंधित विभिन्न प्रकार के कामों का संचालन भी शुरु कर दिया। इस योजना में जयपुर, जोधपुर समेत राजस्थान के तमाम शहरों के उद्यमियों ने उद्योग लगाए।

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केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच घूम रहे कारोबारी-

कारोबारियों ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि करोड़ों रुपये खर्च करके उद्योग शुरु करने के बाद जब कारोबारी राज्य सरकार के सब्सिडी के लिए गए तो राज्य सरकार से जवाब आया कि केन्द्र सरकार ने सब्सिडी नहीं दी है। इसके बाद दिल्ली में संबंधित विभागों से पता लगाया गया तो पता चला 2015 में ही यह योजना बंद कर दी गयी थी। योजना शुरु होने के समय से लेकर बंद होने के समय तक की अनुदान राशि राज्य सरकार को दी जा चुकी है। निश्चित ही तौर पर राज्य सरकार के इस रवैये से उद्यमियों को करोड़ों का चूना लग रहा है।

Source:- Rajasthan Patrika