नौकरी और सैलरी के मामले में एक कहावत है कि हमें जो सैलरी मिलती है, वह हमारी कमाई नहीं होती है, बल्कि जो पैसा हम सैलरी से बचाते हैं यानी सेविंग करते हैं, वह हमारी कमाई होती है।

ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को चाहें सैलरी, लाखों रुपये ही क्यों न मिलती हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, बल्कि इस बात से फर्क पड़ता है की व्यक्ति ने अपनी सैलरी में से कितना पैसा बचाया है। मतलब यह की जो पैसा हम बचाते हैं, वह पैसा ही हमारी कमाई होती है।

ऐसे में हर इंसान को फाइनेंशियल प्लान करना बेहद जरूरी होता है। फाइनेंशियल प्लानिंग व्यक्ति को बचत करने की आदत बनती है। फाइनेंशियल के तहत पैसों की बचत करता है तब उससे व्यक्ति का भविष्य सुरक्षित होता है।

भारत की आबादी एक सौ तीस करोड़ से अधिक है। इसी के साथ यह भी सत्य है की एक सौ तीस करोड़ जनसंख्या में सभी की इनकम एक – दूसरे से अलग है। ऐसे में विभन्न आय वर्ग वाले लोगों के लिए विभन्न तरीके से फाइनेंशियल प्लानिंग हो सकती है।

आइये आज हम बात करते हैं, उन लोगों की, जिनकी सैलरी 45 हजार से 50 हजार तक महिना है। आइये समझते हैं कि 45 से 50 हजार महिना सैलरी पाने वाले लोग, कैसे कर सकते हैं अपना फाइनेंशियल प्लानिंग।

पीएफ अकाउंट खोलना है बेहद जरूरी

किसी भी कर्मचारी के लिए पीएफ अकाउंट खोलना बहुत जरूरी और फायदेमंद होता है। पीएफ अकाउंट किसी भी कमर्चारी का पेंशन फंड अकाउंट होता है। इस अकाउंट में कर्मचारी की सैलरी का एक हिस्सा जमा किया जाता है, इसी के साथ बता दें कि जितना पैसा कर्मचारी की सैलरी से पीएफ अकाउंट में जमा होता है, उतना ही पैसा जिस संगठन या कंपनी में व्यक्ति काम करता है, उसके यहां से भी कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में जमा किया जाता है।

इस तरह व्यक्ति के पीएफ अकाउंट में धीरे – धीरे ही सही लेकिन, एक बड़ा अमाउंट जमा हो जाता है। सरकार की तरफ से पीएफ अकाउंट में बेहतरीन इंटरेस्ट दिया जाता है। व्यक्ति को जब जरूरत होती है या जब कर्मचारी रिटायर्मेंट लेता है, तब उसके हाथ में पीएफ अकाउंट का एक बड़ा अमाउंट मिल जाता है।

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जितना जल्दी हो सके, घर हो अपना

भारत में ऐसे बहुत से परिवार हैं, जो रोजगार की तलाश में अपना पुस्तैनी घर छोड़कर, किसी अन्य शहर में किराए के मकान में रहते हैं। अक्सर ऐसा देखा जाता है की लोग लंबे समय तक किराए के मकान में ही रहते हैं, इस कारण उन्हें घर का किराया देने में अपनी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हर महीने मकान मालिक को देना पड़ता है।

इस लिहाज से हमारी सलाह है कि जितना जल्द हो सके खुद का घर खरीद लेना चाहिए। खुद का घर खरीदने से व्यक्ति के द्वारा किराए के रुप में देने वाला पैसा बच सकता है। अगर किसी व्यक्ति के पास इतना पैसा नहीं होता है कि वह इक्कठे घर खरीद सके, तो उन्हें हमारी सलाह है की वह होम लोन लेने पर भी विचार कर सकते हैं।

चूंकि व्यक्ति पहले जहां किराए की रकम चुकाता था, तो उसमे भी उसे हर महीने पैसा देना होता था, अब जब व्यक्ति होम लोन लेकर घर खरीद लेगा, तब उसके पास उसका खुद का घर हो जायेगा। अब व्यक्ति जिन पैसों को घर का किराया देता था, अब उसी पैसों को होम लोन की EMI के रुप में दे सकता है। इस तरह व्यक्ति के पास खुद का घर भी हो जायेगा और उसे अलग से बहुत अधिक पैसों का इंतजाम भी नहीं करना पड़ेगा।

इंश्योरेंस को महत्व देना उचित होता है

45 – 50 हजार तक सैलरी होने पर इंश्योरेंस कराना बेहद फायदेमंद साबित होता है। इंश्योरेंस में मेडिकल इंश्योरेंस सबसे महत्वपूर्ण होता है। व्यक्ति अगर चाहे तो घर का इंश्योरेंस के साथ ही साथ घर के परिजनों का भी इंश्योरेंस करा सकता है।

इंश्योरेंस होने पर व्यक्ति के घर किसी प्रकार की दिक्कत होने पर पैसों के लिए बहुत परेशान नहीं होना पड़ेगा। कई लोग इंश्योरेंस को सिर्फ पैसों की बर्बादी ही समझते हैं, लेकिन इंश्योरेंस समय के साथ बेहतर साबित होता है। यह लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है।

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इन्वेस्टमेंट प्लान करें

व्यक्ति की सैलरी चाहे कितनी भी क्यों न हो, उसे इन्वेस्टमेंट जरुर प्लान करना चाहिए। 45 से 50 हजार रुपये मंथली सैलरी वाले व्यक्तियों के लिए तो इन्वेस्टमेंट प्लान करना बेहद ही जरूरी होता है।

यहां यह बताना जरूरी है की इन्वेस्टमेंट सिर्फ बड़े अमाउंट की ही नहीं होती है, बल्कि व्यक्ति के पास जितना भी पैसा बचता है या व्यक्ति जितना पैसा बचा सकता है, उसी पैसों की इन्वेस्टमेंट करना जरूरी होता है।

उदहारण के लिए, किसी व्यक्ति की सैलरी अगर 50 हजार महिना है और उस व्यक्ति के महीने का खर्च 30 हजार रुपया है। अब कई बोल सकते हैं कि सिर्फ 20 हजार रुपया ही तो बचता है, 20 हजार में क्या इन्वेस्टमेंट करें।

लेकिन व्यक्ति 20 हजार तो क्या, 2 हजार रुपये की भी इन्वेस्टमेंट रेगुलर करें तो भी उसे एक समय बाद एक बड़ा अमाउंट मिल सकता है। इसलिए इन्वेस्टमेंट करना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

बच्चों के भविष्य के लिए बचत प्लान

कोई भी व्यक्ति कितना भी पैसा क्यों न कम ले, उसका पैसा एक न एक दिन खत्म हो ही जाता है। ऐसे में बेहतर यह है की व्यक्ति जितना भी पैसा कमाता है, उन पैसों से अपने बच्चों के भविष्य के लिए ऐसा किया जाये, जिससे वह जब बड़े हो तो उनको अपना जीवन जीने में कठिनाई का सामना न करना पड़े।

बच्चों के भविष्य को देखते हुए प्लानिंग करना बेहद जरूरी होता है। बच्चों के भविष्य की प्लानिंग में, बच्चों के कॉलेज की फीस, उनकी शादी की प्लानिंग और शादी के बाद उनके रहने के लिए प्लानिंग करना जरूरी होता है।

इस तरह की फाइनेंशियल प्लानिंग करने के लिए, कोई भी व्यक्ति खुद की मंथली सैलरी में से हर महीने कुछ हिस्सा अलग निकालकर सेव करना होता है। बच्चों में अगर बिटिया है तो उसके नाम पर सुकन्या समृधि खाता खोला जा सकत है। सुकन्या खाता में बिटिया के नाम पर हर साल डेढ़ लाख तक पैसा जमा किया जा सकता है।

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खुद के बुढ़ापे के लिए बचत प्लान

घर में सबको फाइनेंशियल के रुप से मजबूत करने के बाद, अगर खुद के लिए पैसों का इंतजाम नहीं किया तो कैसे चलेगा? ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि खुद के बुढ़ापे के लिए पैसों का इंतजाम न किया जाये। ऐसे में खुद के बुढ़ापे के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग करना बेहद जरूरी है।