वर्तमान वक्त बहुत कठिन है। पूरा विश्व कोरोना यानी कोविड -19 जैसी महामारी से जूझ रहा है। कोविड – 19 यानी कोरोना एक वायरस है। यह वायरस एक बहुत गंभीर बीमारी का रुप ले चुकी है।

कोरोना रूपी महामारी सर्वप्रथम चीन के वुहान शहर में दर्ज की गई थी। वुहान शहर में दिसंबर 2019 में ही कोरोना बीमारी के लक्षण दर्ज किये जाने लगे थे। चीन सरकार द्वारा इस बीमारी पर व्यापक तैयारी की लेकिन फिर भी कोरोना बीमारी अपने पैर पसार ही दिया।

कोरोना चूंकि एक वायरस जनित बीमारी है, जो छुआछूत से फैलती है। इस वैश्विक दौर में पूरा विश्व एक बड़े परिवार की तरह हो गया है। मतलब कब किस देश का नागरिक किस देश में पहुंच जाए, कहा नहीं जा सकता है।

ऐसे में चीन के रहने वाले लोग जब अन्य दूसरे देशों में यात्रा किये तो उनके साथ कोरोना वायरस भी कई देशों की यात्रा किया। इस तरह यह वायरस चीन से निकलकर पूरे विश्व में फैल गया। भारत भी इससे अछुता नहीं रहा।

चीन में रहने वाले भारतीय जब भारत आये या अन्य लोग वह लोग जो भारत में आये जो चीन में रहते हैं। उन्होंने अपने साथ कोरोना वायरस भी भारत लेकर आये।

अब वर्तमान में भारत कोरोना वायरस पीड़ित एक प्रमुख देश बन चुका है। आज दिनांक 13-04-2020 तक देश में 10 हजार से अधिक लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। पांच सौ से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि अच्छी खबर यह भी है की कोरोना से पीड़ित एक हजार से अधिक लोग ठीक भी हो चुके हैं।

कोरोना के बारे में जितना यह सत्य है की कोरोना एक महामारी है। इसके साथ ही यह भी सत्य है की कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अभी तक कोई कारगर दवा नहीं बन पाई है। कोरोना से निपटने के लिए अभी तक एक ही उपाय कारगर साबित हुआ है। वह कारगर उपाय है सोशल + फिजिकल डिस्टेंसिंग।

सोशल + फिजिकल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र उपाय है जिससे कोरोना को हराया जा सकता है। कोरोना से बचाव के लिए सोशल + फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ हैण्ड सेनिटाइजर का उपयोग और साफ – सफाई के जरिये ही कोविड – 19 से पार पाया जा सकता है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना से निपटने के लिए सर्वप्रथम 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया। नरेंद्र मोदी जी द्वारा किया गया जनता कर्फ्यू का ऐलान इसलिए किया गया की उस दिन भारत के लोग कोरोना से ग्रसित लोगों का ईलाज कर रहे हैं।

उन लोगों का शुक्रिया लोग अपनी बालकनी में खड़े होकर ताली और थाली बजकर करें। जनता उस दिन अपने घर में ही रहे। बाहर न निकले। यह एक कारगर कदम था। भारतीय जनता ने पीएम मोदी का भरपूर साथ दिया। लोगों ने 22 मार्च 2020 को शाम के 9 बजे अपने घरों की बालकनी में खड़े होकर फ्रंट पर काम कर रहे लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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वो कहते हैं न कि होनी को कौन टाल सकता है? ठीक ऐसा ही कुछ हुआ भारत में। कोरोना से पीड़ितों के संख्या दिन – प्रतिदिन बढ़ने लगी। चूंकि कोरोना से ईलाज के लिए कोई समुचित दवा उपलब्ध न होने के चलते देश में मेडिकल इमरजेंसी लागू करना ही एकमात्र विकल्प रह गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 25 मार्च 2020 को तीन सप्ताह के लिए यानी 14 अप्रैल 2020 तक के लिए देश में लॉकडाउन लागू हो गया। इन लॉकडाउन में सभी कुछ बंद कर दिया गया। जो जहां था, उससे वहीं पर रुकने के लिए अपील की गई।

प्राइवेट के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बंद कर दिया गया। भारतीय रेल जो कि विश्वयुद्ध में भी बंद नहीं की गई थी, लेकिन यह लॉकडाउन में 21 दिन में बंद कर दी गई। इस दौरान सबसे अधिक अर्थव्यवस्था पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा।

देश में कल – कारखाने, उद्योग – धंधे, सरकारी – प्राइवेट कंपनियों के साथ सभी कार्यालय एकाकक बंद कर दिए हो गये। इससे लोगों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा। लोगों की आमदनी पर असर पड़ने की वजह से उन लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी, जिन लोगों का किसी प्रकार का लोन चल रहा था।

भारत जैसे एक सौ तीस करोड़ से भी अधिक जनसंख्या वाले देश में लगभग 60 प्रतिशत ऐसी आबादी है, जिसपर किसी न किसी प्रकार ला लोन चल ही रहा है। किसी का होम लोन चल रहा है, किसी का बिजनेस लोन चल रहा, किसी का कार लोन चल रहा है तो किसी का बिजनेस लोन चल रहा है।

ऐसी स्थिति में अगर लोगों की आमदनी अचानक बंद हो जाए, तो वह लोग लोन की मंथली किस्त कैसे भरेंगे? यह बड़ा सवाल दिखने लगा। लोग परेशान होने लगे। लेकिन, सरकार की तरफ से एक ऐसा फैसला किया गया जिसके बाद जिन लोगों को लोन की EMI जमा करना था, उनकी चिंता चंद मिनट में काफूर हो गई।

जी हां। मोदी सरकार द्वारा फैसला किया गया कि सभी टर्म लोन की EMI अगले 90 दिन यानी 3 महीने के लिए मोरेटोरियम कर दी जायेगी। मोरेटोरियम शब्द का बैंकिक भाषा में अर्थ किस्त को टाल देना होता है। यानी सभी टर्म लोन की EMI तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दी गई।

क्या है रिजर्व बैंक का आदेश/सुझाव?

यह जगजाहिर है कि भारत में 3 मई 2020 तक  के लिए लॉकडाउन है। लॉकडाउन की वजह से व्यापारी, कारोबारी, उधमी, किसान, मजदूर, कामगार श्रमिक इत्यादि समान रुप से प्रभावित हैं। सभी की आमदनी समान रुप से रुकी हुई है।

इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वित्तीय संस्थाओं, बैंकों, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों और को-ऑपरेटिव बैंकों को सभी टर्म लोन के लिए तीन महीने के मोरोटोरियम की अनुमति दी है।

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीई के गर्वनर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार यानी 27 मार्च 2020 को कहा कि सभी टर्म लोन पर 3 महीने का मोरोटोरियंम होगा। इस आदेश को समझने के लिए हम “टर्म लोन” और “मोरोटोरियंम” शब्द दोनों अर्थ निकालकर देखेंगे तो और अधिक क्लियरिटी होगा।

टर्म लोन क्या होता है?

लोन कई तरह का होता है। कोई व्यक्ति जब एक साल के लिए लोन लेता है, उसे हम डिमांड लोन के रुप में जानते हैं। वहीं जब कोई लोन 1 साल से अधिक के लिए लिया जाता है, उसे टर्म लोन के रुप में जाना जाता है।

टर्म लोन में कौन – कौन सा लोन आता है?

अधिकतर लोन, टर्म लोन ही होता है। टर्म लोन में कार लोन, होम लोन,  बिजनेस लोन और इसके साथ वह सभी लोन जो 1 साल से अधिक के लिए जाता है, उसे टर्म लोन की कैटेगरी में रखा जाता है। यहां यह साफ़ कर देना बेहतर है की क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम टर्म लोन के तहत नहीं आती है।

मोरोटोरियम क्या होता है?

“मोरोटोरियंम” शब्द का शाब्दिक अर्थ कुछ दायित्वों से पहले एक कानूनी तौर पर अधिकृत स्थगन को छोड़ दिया जाना चाहिए। एक निरंतर गतिविधि का निलंबन। स्थगन होता है। इसे हम फाइनेंशियल व्यवस्था के तहत समझे तो इसका अर्थ कुछ इस तरह निकलता है। “इस अवधि यानी समय में लोन लेने वालों को लोन की EMI जमा करने की आवश्यकता नहीं है”।

क्या EMI नहीं जमा करना है?

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने सभी बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों से लोन की EMI तीन महीने के लिए मोरोटोरियंम करने की अनुमति दे दिया है। साथ ही, बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों को सुझाव भी दिया है कि लोन की EMI तीन महीने के लिए मोरोटोरियंम करने की तरफ वित्तीय संस्थाएं आगे बढ़े।

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ऐसे में अगर बैकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा आरबीआई गर्वनर की सलाह पर अमल किया गया है. इसलिए सभी टर्म लोन की EMI (किश्त) 31 जून 2020 तक नहीं जमा करना होगा/EMI किश्त नहीं कटेगी। लेकिन आपको यह याद रखना है की EMI जमा करवाना है या EMI नहीं जमा करवाना है, यह फैसला पूर्ण रुप से बैंक और एनबीएफसी के ऊपर निर्भर है।

क्या तीन महीने की EMI माफ़ हो जाएगी?

बिल्कुल भी नहीं। अगर बैंक और एनबीएफसी कंपनी आरबीआई का सुझाव मानते हुए मोरोटोरियंम के तहत तीन महीने तक EMI नहीं जमा कराती हैं तो इन तीन महीने की EMI माफ़ नहीं होगी, बल्कि आगे बढ़ जाएगी।

इसे इस तरह से समझिये। अगर किसी व्यक्ति का लोन जनवरी 2021 में खत्म हो रहा होगा, तो मोरोटोरियंम के कारण उसे तीन महीने EMI नहीं जमा करना होगा। अब उस व्यक्ति का लोन अप्रैल 2021 में समाप्त होगा। मतलब EMI माफ़ नहीं होगी, बल्कि लोन के आखिरी महीने के बाद जुड़ जाएगी।

लोन लेने वालों को मोरेटोरियम का विकल्प चुनना चाहिए?

लोन मोरेटोरियम की सुविधा सिर्फ जरूरतमंदों को ही लेना चाहिए। लोन मोरेटोरियम सुविधा के लिए सिर्फ लोगों को आवेदन करना चाहिए जिन लोगों की आमदनी लॉकडाउन की वजह से प्रभावित है। क्योंकि, मोरेटोरियम में लोन की EMI माफ़ नहीं हुई है बल्कि आगे बढ़ाया गया है।

मतलब यह है कि लोन की EMI 3 महीने के लिए आगे बढ़ा दी गई हैं। इन महीने की EMI लोन खत्म होने की बाद जमा करना होगा और मोरेटोरियम के समय के लिए भी ब्याज देना होगा। इससे अधिक ब्याज चुकाना होगा। इसलिए लोन मोरेटोरियम सुविधा का लाभ सिर्फ जरुरतमंदो को ही लेना चाहिए।

लोन मोरेटोरियम का लाभ क्या है?

है। RBI से मोरेटोरियम की सुविधा जरुर प्राप्त हुई है। लेकिन, लोन की EMI माफ़ नहीं हुई है। बल्कि EMI को आगे बढ़ा दिया गया है। ऐसे में आपको मोरेटोरियम के समय का ब्याज भी अतिरिक्त चार्ज के रुप में जमा करना ही होगा।

ऐसे में जिन लोगों की आमदनी लॉकडाउन की वजह से प्रभावित है सिर्फ उन्हीं लोगों को लोन मोरेटोरियम सुविधा के लिए आवेदन करना चाहिए। ऐसे में जिन लोगों की आमदनी लॉकडाउन की वजह से प्रभावित है सिर्फ उन्हीं को लोन मोरेटोरियम सुविधा लेना चाहिए.

लोन मोरेटोरियम का नुकसान क्या है?

लोन मोरेटोरियम का मतलब लोन की EMI आगे बढ़ाना है। मतलब इन 3 महीने की EMI लोन समाप्त होने के बाद जमा करना ही होगा। इसके साथ इन 3 महीने का ब्याज भी अतिरिक्त चार्ज के रुप में जमा करना होगा।

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