केन्द्र सरकार आमजन को बड़ी राहत प्रदान करने जा रही है। लॉकडाउन के चलते सभी की आमदनी पर कुछ न कुछ प्रभाव पड़ा था। ऐसे में वह लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए, जिनका किसी न किसी प्रकार का लोन चल रहा था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा राहत पैकेज घोषित किया गया। राहत पैकेज में एमएसएमई सेक्टर के कारोबारियों के साथ – साथ आमजन के लिए भी घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त एक अतिमहत्वपूर्ण राहत लोन सेक्टर में प्रदान किया गया।

जिन लोगों का चल रहा था, उन्हें तीन – तीन महीना करके 6 महीना तक ईएमआई का मोरेटोरियम की सुविधा दी गई। इस सुविधा में ग्राहको को 6 महीने तक लोन की EMI नहीं चुकाने का विकल्प प्रदान किया गया।

हालांकि कोरोना काल Coronavirus) में भी कुछ लोगो द्वारा मोरेटोरियम (Loan Moratorium) सुविधा का लाभ नहीं लिया गया और रेगुलर EMI का भुगतान किया गया है। इसके पीछे यह चिंता थी कि लोन मोरेटोरियम लेने वालों को बची अतिरिक्त EMI पर भी ब्याज देना होगा यानी ब्याज पर ब्याज।

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ब्याज पर ब्याज लेने के बैंको के फैसले को कुछ ग्राहको ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया। सुप्रीम कोर्ट नें सरकार को फटकार लगाते हुए आदेश जारी किया- ब्याज पर ब्याज लेना ग्राहकों के साथ ज्यादाती है। सरकार इसमे हस्तक्षेप करे और लोगो को राहत प्रदान करें।

केन्द्र सरकार ने यह फैसला किया

केन्द्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सरकार की तरफ से ब्याज पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा। इसका लाभ ग्राहको को मिलेगा। इसपर करीब 55 हजार करोड़ रुपये का बोझ आएगा, जिसका वहन केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा।

सरकार के इस फैसले के ठीक बाद एक और सुप्रीम पक्ष कोर्ट चला गया। दूसरे पक्ष का कहना था कि जिन लोगो ने ब्याज पर ब्याज की डर से कठिन परिस्थिती में भी लोन की इएमआई का भुगतान किये हैं, उनके लिए सरकार क्या कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से बताया गया कि जिन लोगो ने लॉकडाउन में भी लोन की किश्तों का भुगतान किया है, उनके लिए भी सरकार की तरफ से कुछ है। ऐसे लोगो को संबंधित बैंक या फाइनेंनशियल कंपनी की तरफ से कैशबैक मिलेगा।

EMI कैशबैक योजना क्या है?

यह एक ग्राहको के लिए प्रोत्साहन योजना है। इस योजना का मूल लक्ष्य मोरेटोरियम का लाभ लेने वालो और रेगुलर लोन की किश्त का भुगतान करने वालो के बीच असंतोष को समाप्त करना है। मोरेटोरियम वालो को ब्याज पर ब्याज नहीं देना होगा और किश्त का भुगतान करने वालो को कैशबैक मिलेगा।

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इसे इस तरह से समझिए कि अगर किसी लोन लेने वाले व्यक्ति ने मोराटोरियम का लाभ नहीं उठाया और EMI का समय पर भुगतान समय पर किया है तो बैंक से उन्हें कैशबैक मिलेगा। इस सरकारी योजना के तहत ऐसे ग्राहको को 6 महीने के सिंपल और कम्पाउंड इंट्रेस्ट में डिफरेंस का लाभ मिलेगा।

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इस सरकारी योजना में 2 करोड़ रुपये तक का लोन लेने वालो को लाभ मिलेगा। यह भी जानना जरुरी है कि यह लाभ एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 की अवधि के लिये है। लोन कैशबैक योजना का लाभ होम लोन, एजुकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, वाहन कर्ज, एमएसएमई लोन (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम), वर्किंग कैपिटल लोन पर समान रुप से मिलेगा।

कितना कैशबैक का लाभ मिलेगा?

कैशबैक का लाभ सभी ग्राहको को उनके लोन अमाउंट और लागू इएमआई के अनुसार मिलेगा। इसका फार्मुला है- लोन पर छह महीने (मार्च से अगस्त तक) के लिए दी गई मोरेटोरियन सुविधा के दौरान संचयी ब्याज यानी ‘ब्याज पर ब्याज’ और साधारण ब्याज के बीच अंतर के बराबर की राशि कैशबैक के रुप में ग्राहक बैंक अकाउंट में जमा होगी।

हलांकि एक शर्त यह है कि यह सुविधा ग्राहकों को तभी मिलेगी जब लोन की किस्त का भुगतान फरवरी के अंत तक होता रहा हो यानी संबंधित अकाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) नहीं हो।

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आपको जानकारी के लिए यह भी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने को निर्देशित किया है कि लोन लेने वालों में पात्र उधारकर्ताओं के खातों में पांच नवंबर 2020 तक कैशबैक का भुगतान हो जाना चाहिए।

किसको – किसको इएमआई कैशबैक का लाभ मिलेगा?

जिन लोन लेने वालों के ऊपर 29 फरवरी 2020 तक कुल लोन दो करोड़ रुपये से अधिक नहीं था, वे सभी इस सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र होंगे। यानी यह राहत सभी तरह का लोन लेने वालों को समान रुप से मिलेगी, चाहे उन्होंने इएमआई भुगतान से छह महीने की दी गई छूट का लाभ उठाया हो, या नहीं। जिन ग्राहकों ने मोरेटोरियम का लाभ नहीं उठाया था, उन्हें भी बैंक से कैशबैक मिलेगा।

इएमआई कैशबैक सुवधा किस तरह के लोन पर मिलेगी?

इस योजना के तहत होन लोन, एजूकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड बिल बकाया, व्हीकल लोन और MSME लोन और बिजनेस लोन के रुप में लिया गया वर्किंग कैपिटल लोन को समान लाभ मिलेगा।

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