सोमवार को भारतीय उद्योग जगत के साथ Ease of doing business पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वबैंक की Ease of doing business की रैंकिंग में भारत को शीर्ष 50 में पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के आकार को लगभग दोगुना कर 5,000 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के स्तर पर नीतिगत अपंगता का दौर खत्म हो चुका है।

Ease of doing business

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देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का प्रयास-

पीएम मोदी ने कहा कि देश में कंपनियों के लिये काम करने को आसान बनाने के लिए सुधार जारी रहेंगे और प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था का आकार भी बढ़ाकर 5,000 अरब डॉलर करने के लिये प्रयास किए जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि यह भारत के सतत सुधारों का नतीजा है कि देश की दुनियाभर में साख बढ़ी है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व आर्थिक मंच और अंकटाड जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थान भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।

Ease of doing business में भारत की लंबी छलांग-

वर्ष 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के समय कारोबार सुगमता की सूची में भारत 142वें स्थान पर था।   मोदी ने कहा कि उस समय देश लालफीताशाही और नीतिगत अपंगता में जकड़ा हुआ था। चार साल के सुधारों के बाद विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में कारोबार सुगमता के मामले में भारत 190 देशों की सूची में 77वें स्थान पर पहुंच गया। इससे पिछले साल भारत 100वें स्थान और उससे पिछले साल 130वें स्थान पर था। पीएम मोदी सरकार के चार साल के कार्यकाल में भारत ने इस रैंकिंग में 65 स्थानों की छलांग लगाई है।

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इस आधार पर तय होती है रैंकिंग-

विश्व बैंक की यह रिपोर्ट दस मानकों के आधार पर तैयार की जाती है। इसमें कोई भी व्यावसाय शुरू करने, निर्माण अनुमति मिलने, बिजली कनेक्शन पाने, कर्ज मिलने, कर का भुगतान, विदेश व्यापार, अनुबंध का क्रियान्वयन और दिवाला समाधान जैसे मुद्दों पर गौर किया जाता है। विश्व बैंक की Ease of doing business रैंकिंग में न्यूजीलैंड पहले उसके बाद सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग का स्थान रहा है। अमेरिका 8वें और चीन को 46वां स्थान मिला है। पाकिस्तान इस सूची में 136वें स्थान पर है।