GST के तहत इलेक्ट्रॉनिक रोड परमिट द्वारा वस्तुओं का एक राज्य से दूसरे राज्य के भीतर या बाहर आवागमन ई-वे बिल के जरिए होता है. 50,000 से अधिक राशि के वस्तुओं के आवागमन के लिए विक्रेता और खरीददाता को ई-वे बिल की आवश्यकता होती है.

ई-वे बिल सभी प्रकार की सामाग्री जैसे स्टॉक की बिक्री या ट्रांसफर, कैपिटल गुड्स, नौकरी के काम के लिए भेजे गए सामान या बिजनेस के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रकम के लिए जरूरी होता है.

Source- E-Way Bill Details(Source: Tally)

ई-वे बिल को जनरेट कैसे करते हैं

ई-वे बिल के निर्माण के लिए आम पोर्टल पर निम्न जानकारी भरने की आवश्यकता होती है

Part A of Form GST EWB-01 

  • पार्टियों का विवरण
  • मूल्य के साथ सामान का विवरण
  • डिलीवरी के स्थान का विवरण
  • परिवहन के लिए दस्तावेज़ Part B of Form GST EWB-01 वाहन की सूचना.

ई-वे बिल की आवश्यकता से मुक्त सामान

Source- Exempted Goods

नियम 138 के प्रावधानों के अनुसार निम्नलिखित वस्तुओं के आवागमन के लिए ई वे बिल बनाने के लिए छूट दी गई है.

  •  ई-वे बिल की आवश्यकता के बिना 154 वस्तुओं को राज्य के भीतर या बाहर कोई भी आवाजाही स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है.
  • साइकिल रिक्शा के जरिए माल ढुलाई के लिए भी ई-वे बिल की आवश्यकता नहीं होती है या वो सामान जिन्हें बंदरगाह, हवाई अड्डे, एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स या  land custom station से inland container depot या container freight station  तक ले जाया जा रहा है उसके लिए ई-वे बिल की आवश्कता नहीं होगी.
  • कोई अन्य सामान जिसे राज्य द्वारा अधिसूचित किया गया हो.

सामान के ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस कंडीशन में ई-वे बिल तैयार करना आवश्यक है

नोट- जहां, कंसाइनर या कंसाइनी ने फॉर्म जीएसटी ईडब्ल्यूबी -01 नहीं भरा है और वाहन में किए गए सामान का मूल्य रुपए 50,000 से अधिक है उस स्थिति में ट्रांसपोर्टर को डिलीवरी चालान के आधार पर FORM GST EWB-01  जनरेट करवाना पड़ेगा.

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ई-वे बिल कैसे जनरेट करें

इस कंडीशन में ई-वे बिल की जरूरत होती है–

Movement of Goods Value E-way permit requirement to be generated by
Outward supply/Sales More than Rs. 50,000 Any person (supplier, recipient, transporter)
Any other Movement More than Rs. 50,000 Any person (supplier, recipient, transporter)
Inward supply from un-registered supplier, if recipient(registered) is known at the time of commencement of movement of goods More than Rs. 50,000 Registered Recipient
Inward supply from un-registered supplier, if recipient is not known No limit Un-registered supplier or Transporter
Inputs or capital goods sent by principal to job worker outside the State No limit Principal only
Handicrafts transported from one State to another No limit Handicrafts supplier
All movement Less than Rs. 50,000 Option to generate by Registered supplier orTransporter
All movement from consignor to transporter or from transporterto consignee within State distance less than 10 km No limit Part B of Form EWB-01 not required

                                                            ई-वे बिल जनरेशन

New E Way Bill Generation

Particulars Who will Generate Form Generated
Submit Part A Supplier or Recipient EBN–unique E-way Bill number
Submit Part B Transporter GST EWB-01
Submit Part A Transporter (where supplier is unregistered) GST EWB-01
Update Part B Transporter (change of vehicle) GST EWB-01
Update E-way Bill number Transporter (multiple consignments in one conveyance) GST EWB-02

ई वे बिल की वैद्यता

Sr No Distance Validity Period
1 Upto 100 Km One Day
2 For Every 100 km and part thereof thereafter One additional day

नोट: वैधता की अवधि उस समय से गिनी जाएगी, जब ई-वे बिल को जनरेट किया गया था. यदि ई-वे बिल के बन जाने के बाद ई-वे बिल में दिए गए डिटेल्स के अनुसार सामान नहीं ले जाया जाता है, तो बिल को 24 घंटों के भीतर रद्द कर दिया जा सकता है.

  •  Recipient के GSTIN के विरुद्ध जनरेट किया गया ई-वे बिल सामान्य पोर्टल पर प्राप्तकर्ता द्वारा देखने के लिए उपलब्ध होगा. सामान्य पोर्टल पर उत्पन्न प्रत्येक ई-वे बिल को recipient स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है.
  • यदि recipient द्वारा कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं है – स्वीकृति या अस्वीकृति की तो ई-वे बिल को 72 घंटों के बाद स्वीकार किया जाएगा.
  • जहां माल ई-वे विधेयक की वैधता अवधि के भीतर पहुंच पाता है, ट्रांसपोर्टर GST EWB-01 के भाग बी में दिए गए डिटेल्स को भरने के बाद एक दूसरा ई-वे बिल जनरेट कर सकता है.
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सामान के आवागमन के लिए जरूरी दस्तावेज

सामान के आवागमन के लिए ये दस्तावेज जरूरी होते हैं.

  • टैक्स चालान, आपूर्ति का बिल या अन्य चालान
  • ई-वे बिल या ईबीएन रिफरेंस हमारे tax invoice  में आवश्यक सभी जानकारी फार्म GST INV-01 में सामान्य पोर्टल पर अपलोड की जा सकती है और एक Invoice Reference Number (IRN) जनरेट किया जा सकता है.

वस्तुओं के ट्रांसफर के दौरान वैरिफिकेशन Commissioner या Commissioner द्वारा अधिकृत अधिकारी, को चेकिंग और वाहन की जांच करने की अनुमति है और एक ऑनलाइन सत्यापन रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर दर्ज करनी होती है.

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सत्यापन के लिए रुकावट का प्रमाण फॉर्म GST EWB-03 के भाग A में और तीन दिनों के निरीक्षण के अंदर फॉर्म GST EWB-03 के भाग B में अंतिम रिपोर्ट में आवश्यक है. जहां ट्रांजिट के दौरान राज्य में या किसी अन्य राज्य में एक स्थान पर वाहन का भौतिक सत्यापन किया जाता है, tax evasion की कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं होने तक वाहन का कोई और भौतिक सत्यापन राज्य में या राज्य से बाहर नहीं किया जाएगा.

हिरासत में लिए गए वाहन के रोक लगाने की निगरानी के दौरान ट्रांसपोर्टर फार्म GST EWB-04 में सामान्य पोर्टल पर सूचना अपलोड करके 30 मिनट से ज्यादा की अवधि के लिए रोक की घटनाओं को अपलोड कर सकता है.

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 ई-वे बिल के लाभ

  • सामान ट्रांसफर की गति में तेजी
  • ट्रकों पर RFID  टैग सक्षम होने के कारण विभिन्न चौकियों पर खर्च होने वाला समय कम हो सकता है.
  • उचित जवाबदेही और आसान सत्यापन

 ई-वे बिल की हानियां

  • Implementation में चुनौतियां: भारत में कम इंटरनेट पहुंच और जागरूकता की कमी के कारण यह लागू करना कठिन हो सकता है।
ई वे बिल का मतलब

ई-वेय बिल का फुल फॉर्म इलेक्ट्रानिक्स बिल होता है। जिसका अर्थ इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बिल काटना है। यह बिल 50 हजार रुपये या 50 हजार से रुपये से अधिक के माल सप्लाई या माल प्राप्त पर लागू होता है.

ईवे बिल कब से लागू हुआ?

ईवे बिल 1 दिसंबर 2020 से लागू है। यह नया ईवे बिल नियम 5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों पर लागू है।

जीएसटी कैसे बनाते हैं?

जीएसटी का फुल फॉर्म गुड्स एंड सर्विस टैक्स है। जीएसटी का निर्धारण करते समय सरकार टैक्स के सभी पहलुओं पर ध्यान देती है। जीएसटी में प्रोडक्ट बनाने से लेकर प्रोडक्ट को उपभोक्ता के हाथ में जाने तक का टैक्स शामिल होता है।

कंप्यूटर पर बिल कैसे बनाया जाता है?

कंप्यूटर पर बिल बनाने के लिए खास तरह का सॉफ्टवेयर तैयार किया जाता है। उसी सॉफ्टवेयर पर कंप्यूटरकृत बिल बनाया जाता है। बिलिंग सॉफ्टवेयर सभी प्लेटफॉर्म का भिन्न – भिन्न होता है।

मोबाइल से बिल कैसे बनाये?

अब लगभग बिजनेस से जुड़ा सभी कार्य मोबाइल पर हो जाता है। तो बिल भी मोबाइल से बनने लगा है। मोबाइल से बिल बनाने के लिए कई मोबाइल ऐप बनाये गये हैं। इन मोबाइल ऐप के माध्यम से मोबाइल से बिल बन जाता है। मोबाइल से बिल बनाने के लिए आप गूगल प्ले स्टोर पर बिल ऐप सर्च कर सकते हैं और ऐप डॉउनलोड कर सकते हैं।