वर्तमान दौर टेक्नोलॉजी का है। टेक्नोलॉजी के इस दौर में चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। भारत में पहले पैसों का लेनदेन बैंक द्वारा होता था या हाथो-हाथ लेनदेन होता था। लेकिन टेक्नोलॉजी के इस दौर में पैसो के लेनदेन में भी काफी बदलाव हुआ है।

अब पेमेंट करने के बहुत से विकल्प हमारे सामने आ चुके हैं। आज कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को सेकेंडों में मनचाही रकम भेज सकता है और प्राप्त कर सकता है। इसके लिए व्यक्ति के पास बस एक मोबाइल फोन और उसमे इन्टरनेट कनेक्शन होना चाहिए।

लेकिन कहते हैं कि हर सिक्के के दो पहलु होते हैं यानी हर नई चीज कुछ अच्छाईयों के साथ कुछ गड़बड़ चीजें भी लेकर आती है। डिजिटली पेमेंट का उपयोग आज लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी माध्यम से कर रहा है।

जब टेक्नोलॉजी का उपयोग कर काम आसान हो सकता है तो स्वाभाविक सी बात है कि उसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके कोई चीजों को खराब भी कर सकता है। कुछ ऐसा ही है डिजिटल पेमेंट के साथ। समय के साथ डिजिटल पेमेंट में ऐसी बहुत सी न्यूज़ सुनने को मिलती है जिसमे यह होता है कि टेक्नोलॉजी के जरिये चोरी झो गई।

टेक्नो फ्रेंडली चोर किसी अकाउंट से कभी पैसा निकाल लेते हैं तो कभी किसी के अकाउंट से अपने लिए बहुत अधिक खरीददारी कर लेते हैं। जिनके अकाउंट से चोरी हुई होती है उनको जब इस बारे में पता चलता है तो वह अवाक् रह जाते हैं।

कई बार तो कारोबारी भी इस लपेटे में आ जाते हैं। कारोबारियों को भी डिजिटली धोखा देने की घटनाएं सुनने को मिलती रहती हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाओं से बचने का उपाय जानना सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है।

डिजिटल तरीके से रुप मुख्य रुप से 8 तरह की चोरियां होती हैं। आइये समझते हैं कि इस तरह से कैसे चोरियां होती हैं और इस तरह की चोरियों से कैसे बचा जा सकता है।

पेमेंट ट्रांजेक्शन पूरा करने के लिए अजनबियों की मदद नहीं लें। ऑफिशियल एप के अलावा कोई एप डाउनलोड नहीं करें।

फर्जी पेमेंट ऐप का इस्तेमाल करके डिजिटल ठगी

वर्तमान से हर रोज लगभग सैकड़ों की संख्या में मोबाइल ऐप लाँच हो रहे हैं। जबसे पेटीएम और यूपीआई मोबाइल ऐप से पेमेंट का विकल्प मुहैया करा दिए हैं तबसे सभी ऐप पेमेंट करने की सुविधा धड़ाधड़ देने की होड़ में हैं।

ऐसे में लोगों का बैंक खाता असुरक्षित हो गया है। अगर व्यक्ति गैराधिकारिक पेमेंट ऐप को डाउनलोड करता है तो ऐप में सभी फीचर तक पहुँचने की उसे अनुमति मिल जाती है। जब किसी गैराधिकारिक व्यक्ति को किसी व्यक्ति के फोन में चोरी छिपे एक्सेस करने की सुविधा मिलती है। फोन एक्सेस करके बैंक अकाउंट में हेरफेर कर दिया जाता है।

इंश्योरेंस के नाम पर धोखा

क्या रहता है तरीका इस तरह की ठगी का शिकार वो बने जो बीमा नियामक के ऑफिशियल और फर्जी पोर्टल के बीच अंतर नहीं कर पाए। दरअसल, www.irdaionline.org यूआरएल से एक फर्जी पोर्टल के जरिए पॉलिसी बेची जा रही थीं। बाद में इरडा ने इसके खिलाफ अलर्ट जारी किया। फिर यूआरएल को ब्लॉक कर दिया गया।

बचने का तरीका

क्या है सबक इरडा बीमा पॉलिसी नहीं बेचता है। डोमेन का दुरुपयोग करने वाले पोर्टलों से सावधान रहें। ठगी के लिए रेगुलेटर के नामों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ITR रिफंड को लेकर ठगी

इनकम टैक्स रिटर्न को लेकर बहुत सी ठगी हो जाती है। ठग कोई इनकम टैक्स रिटर्न के नाम की भेज देते हैं और उस लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में एक एप डाउनलोड हो जाता है। ठग अकाउंट लॉग-इन डीटेल हासिल करके अकाउंट से पैसे उड़ा देते हैं।

क्या सावधानी रखें

एक सिंपल सी बात हमेशा याद रखें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इनकम टैक्स रिटर्न हमेशा लाभार्थी के बैंक खाता में भेजता है। ऐसे में किसी और मैसेज पर भरोसा न करें।

KYC के जरिये फर्जीवाड़ा करके

बचने का तरीका

बैंक के अलावा किसी और के मैसेज पर विश्वास न करें, और बैंक के अलावा आये हुए मैसेज में लिंक पर क्लिक न करें।

कमजोर पासवर्ड को तोड़कर ठगी

कैसे बचे

इसका सीधा और बहुत सिंपल उपाय यह है कि अपना पासवर्ड बहुत अलग तरह का बनाये और किसी को भी न बताएं।

यूपीआई की फर्जी लिंक के जरिये ठगी

बहुत से लोगों को मैसेज आता है कि आपने 1 करोड़ धनराशि जीता है। अपनी जीती हुई धनराशि पाने के लिए इस लिंक पर करें। लिंक खुलने के बाद एक यूपीआई लिंक खुल जाती है और एक ऐप आपने मोबाइल में इंस्टाल हो जाता है। और उस ऐप के जरिये आपके बैंक अकाउंट में से रुपये गायब हो जाता है।

कैसे बचे

आप सोचे कि जब आपने किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ही नही लिया तो कैसे 1 करोड़ रुपये जीत गये। अपने बैंक के और भीम ऐप के अलावा किसी और ऐप के जरिये कोई लेनदेन न करें।

इस तरह देखा जाये तो बहुत सी तरीके से डिजिटल चोरियां हो जाती है। इन सभी चोरियों से बचने के लिए आप यहां बताए गये तरीको का पालन कर सकते हैं और अपना धन सुरक्षित रख सकते हैं।