कारोबारी व्यापार बढ़ाने के लिए बिजनेस लोन की सहायता लेते है। कभी- कभी ऐसा भी होता है की लोन की रकम की बैंक या कंपनी से न लेकर किसी व्यक्ति या दोस्त से ले लेते हैं। बिजनेस के लिए ली गई उधारी को चुकाने के लिए चेक से भुगतान करने का फैसला करते है। ऐसा भी होता है की कारोबारी द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो जाता है। यह सभी को जानकारी होती है कि चेक बाउंस होने पर सख्त सजा का प्रावधान है।

पिछले कुछ समय से यह देखा गया की चेक बाउंस होने का कारण सिर्फ किसी को धोखा देना ही नहीं है बल्कि कई और कारण हैं जिनसे Check bounce हो जाते हैं। अधिकतर लोग इस नियम से अपडेट नहीं हो पाए हैं कि अब हर Check bounce होने के मामले में चेक सजा नहीं दी सकती। अब ऐसा नियम बना दिया गया है।

आईसीएसआई के द्वारा मिली है सूचना

चेक बाउंस होने पर अभी भी दर्ज हो सकता है कोर्ट में केश लेकिन अब केश हर Check bounce होने के मामले में दर्ज नहीं होगा। इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (आईसीएसआई) के पूर्व चेयरमैन अंकुर श्रीवास्तव के अनुसार चेक बाउंस के लिए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 है। इसके सेक्शन 138 के मुताबिक, कोई स्वीकार्य देनदारी भुगतान के लिए जारी किया गया चेक ही बाउंस होने पर कार्रवाई के दायरे में आएगा।

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इस परिस्थितियों में नहीं दर्ज होगा मुकदमा– जब आप किसी से बिजनेस लोन लेते हैं या किसी को बिजनेस लोन चेक के द्वारा देते है और Check bounce हो जाता है तो इस स्थिति में आपके ऊपर कोई कोर्ट में केश नहीं होगा।

मुकदमा सिर्फ एक स्थिति में दर्ज हो सकता है

सीए अंकुर के अनुसार अगर दो लोगों के बीच लेन- देन या पैसे का आदान- प्रदान चेक से हुआ हो तो उसके बाउंस होने पर सेक्शन 138 के तहत कार्रवाई होगी। वही अगर किसी व्यक्ति ने किसी परिचित व्यक्ति को सहायता के रुप में बिजनेस लोन चेक से दिया हो या कोई व्यक्ति दोस्ती में किसी को चेक के रुप में रकम वापस करता है और वह चेक बाउंस हो जाता है तो इस सूरत में किसी भी तरह का कोई मामला दर्ज नहीं होगा। इस तरह के मामले उधार और वापस करने के मामलों के अन्तर्गत आएंगे।

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गिरवी रखने के लिए दिया गया चेक बाउंस होने पर नहीं होगी कार्रवाई

कारोबारी अकसर बिजनेस लोन के बदले प्रापर्टी गिरवी रखकर लोन ले लेते हैं, कुछ प्रापर्टी गिरवी रखकर कुछ सामान खरीद लेते है। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि गिरवी रखने के लिए दिया गया Check bounce होने पर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं किया जायेगा।

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किन- किन मामलों में नहीं होती है कार्रवाई

  • चेक के तौर पर दी गई रकम पर
  • गिरवी के तौर पर दिया गया चेक के पर
  • जब चेक में लिखी गई रकम और शब्दों में लिखी गई रकम अलग- अलग हो तब
  • जब चेक के द्वारा चैरिटेबल संस्था को गिफ्ट या डोनेशन दिया गया हो तब
  • अगर चेक खराब फट-फूट गया ओ तब

चेक बाउंस होने पर क्या करना चाहिए

जब Check bounce होने के बाद 30 दिन में अंदर ही चेक देने वाले व्यक्ति/पार्टी को नोटिस भेज देना चाहिए।  इसमें चेक बाउंस होने की सूचना देने के साथ-साथ ब्याज सहित रकम वापसी की मांग करनी होगी। यह ध्यान रखना होगा कि जब भी नोटिस भेजें रजिस्टर्ड पोस्ट से ही भेजें, क्योंकि कोर्ट को रिसीविंग की सूचना देनी होती है। दूसरी पार्टी को नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर आपको पैसे लौटना अनिवार्य होता है। अगर नोटिस मिलने के बाद भी दूसरी पार्टी पैसे वापस नहीं करती है तो आप चेक बाउंस होने के 1 महीने के भीतर कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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