कई बार ऐसा देखा गया है कि कई कंपनी शुरु होती हैं लेकिन कुछ ही समय बाद अचानक बंद भी हो जाती है। स्टार्ट-अप सेक्टर में यह समस्या व्यापक स्तर पर है। पिछले साल एक स्टार्ट – अप खुला, स्टार्ट अप का प्रोडक्ट एक ऐसा मोबाइल ऐप था जिससे मधुमेह यानी शुगर के मरीज अपना शुगर लेबल अपने मोबाइल पर ही चेक कर सकते थे।

लोगों को यह प्रोडक्ट पसंद आया और लोगों इस प्रोडक्ट का उपयोग करना शुरु कर दिया। मीडिया को लगा कि इस स्टार्ट उप में बहुत संभावना है। मीडिया से इस स्टार्ट अप के बारे में खूब खबरें आने लगीं। पत्रकारों द्वारा खूब स्टोरी बनाई गई।

मीडिया में अ रही ख़बरों के आधार पर इन्वेस्टर को लगा कि इन स्टार्ट अप में पैसा इन्वेस्ट किया जा सकता है। लोगों ने पैस इन्वेस्ट भी किया। लेकिन, 15 वें महीने में ही कंपनी अचानक बंद हो गई और जो कंपनी का संस्थापक था वह किसी और कंपनी में नौकरी करने लगा। आखिर ऐसा क्यों हुआ?

ऐसा भी नहीं हुआ कि इस स्टार्ट अप की कहानी देखकर किसी बड़ी कंपनी ने इसके मालिक को अधिक पैसे देकर खरीद लिया हो। यह भी नहीं था कि कंपनी का प्रोडक्ट चल नहीं रहा था और कंपनी घाटा में चल रही थी। आइए कंपनी बंद होने के तह में विचार करते हैं।

इस कहानी के तह में जायेंगे तो पाएंगे कि यह कंपनी 10 महीने ठीक चली लेकिन ग्यारहवें महीने से ही दिक्कत आने लगी थी। कंपनी में दैनिक खर्चो को पूरा करने में दिक्कत आने लगी थी। कंपनी के पास पर्याप्त फण्ड होने के बावजूद कर्मचारियों को ठीक समय पर सैलरी नहीं मिल रही थी।

जब कर्मचारियों को ठीक समय पर सैलरी नहीं मिलना शुरु हुई तो कर्मचारी कंपनी छोड़कर निकालने लगे। स्टार्ट अप में जो दैनिक खर्चें होते है जैसे – पानी, बिजली, स्नेक्स इत्यादि के बिलों का भी भुगतान नहीं हो प् रहा था। एक दिन कंपनी अचानक से बंद हो गई और किसी को पता भी नहीं चला।

ऐसी स्थिति बहुत से एमएसएमई कारोबारियों के साथ होती है। किसी कारोबारी को इस तरह की स्थिति का तब सामना करना पड़ता है, जब उसके पास वित्त यानी प्रबंधन यानी फाइनेसियल मैनेजमेंट की समझ नहीं होती या कम समझ होती है।

अगर स्टार्ट अप संस्थापक को वर्किंग कैपिटल यानी कार्यशील पूंजी की समझ होती तो यह स्थिति ही नहीं आती। लब्बोलुआब यह है कि किसी भी कारोबार का वर्किंग कैपिटल यह निर्धारित करता है कि कारोबार आगे बढ़ेगा या बंद होगा।

वर्किंग कैपिटल किसे कहते हैं?

इसे अगर लाइन में कहें तो – वह धन जिससे कारोबार में दैनिक जरूरतों को पूरा किया जाता है, उसे वर्किंग कैपिटल कहते हैं। इसे परिभाषा के अनुसार समझे तो – कारोबार में कुल उपलब्ध धन और देनदारियों के बीच जो रकम बचती है वह वर्किंग कैपिटल होती है।

वर्किंग कैपिटल से कारोबारी कोई जरूरी उपकरण, बिजनेस की जगह का किराया, इंटरनेट की बिल भरने के लिए, पानी की बिल भरने के लिए और दैनिक कर्मचारियों की सैलरी इत्यादि जैसे कार्यों में उपयोग किया जाता है।

यहां यह स्पष्ट करना बेहद जरूरी होता है कि जिस बिजनेस में वर्किंग कैपिटल की रकम नहीं होती उसको सलाह है कि वह वर्किंग कैपिटल फण्ड में जरूरी रकम जरुर रखे। किन्हीं कारणों से बजट कि परेशानी हो तो वह वर्किंग कैपिटल लोन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

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मैनुफैक्चरिंग सेक्टर का कारोबार हो सर्विस सेक्टर का, सभी के लिए कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल लोन के जरिए कारोबार की कार्यशील पूजी रखना अनिवार्य होता है।

वर्किंग कैपिटल लोन और टर्म लोन के बीच अंतर को जानिए

वर्किंग कैपिटल फ़ॉर्मूला

Working Capital (वर्किंग कैपिटल) = Current Assets (करंट एसेट्स) – Current Liabilities (करंट लायबिलिटीज)

इसे और सिंपल तरीके से समझते हैं: मान लीजिए, आपके पास 10,00,000 की वर्तमान संपत्ति और  वर्तमान देनदारी यानी बकाया 8,00,000 हो तो इस स्थिति में आपके पास 2,00,000 रुपये वर्किंग कैपिटल इन हिंदी कार्यशील पूंजी बनता है।

वर्किंग कैपिटल इन हिंदी कार्यशील पूंजी आपके द्वारा कम समय की देनदारियों का हिसाब रखने के बाद आपके द्वारा छोड़ी गई नगद रकम का माप है। कार्यशील पूंजी दो तरह के होते हैं। पॉजिटिव और नेगेटिव वर्किंग कैपिटल यानी सकारात्मक और नकारात्मक कार्यशील पूंजी।

बिजनेस चलाने में वर्किंग कैपिटल लोन का होता है महत्वपूर्ण योगदान! जानिए कैसे

ZipLoan से मिलता है सिर्फ 3 दिन में वर्किंग कैपिटल लोन

फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी यानी एनबीएफसी ZipLoan द्वारा कारोबारियों को बिजनेस में कार्यशील पूजी यानी वर्किंग कैपिटल मैनेज रखने के लिए 1 से 5 लाख तक का वर्किंग कैपिटल लोन सिर्फ 3 दिन में दिया जाता है।

ZipLoan से वर्किंग कैपिटल लोन के लिए शर्ते बेहद मामूली हैं, जैसे- बिजनेस 2 साल पुराना हो, सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख तक हो और पिछले साल भरी गई ITR न्यूनतम डेढ़ लाख की हो।

इन मामूली शर्तों को कोई कारोबारी पूरा करता है तो उसे ZipLoan से प्राप्त होगा 1 से 5 लाख तक का वर्किंग कैपिटल लोन। ZipLoan से मिलने वाला लोन बिना कुछ गिरवी रखे होता है और 6 महीने बाद प्री पेमेंट चार्जेस फ्री होता है।

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