जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती है उन्हें बिजनेस लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड मिलने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बिना क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहकों का बैंक से क्रेडिट कार्ड नहीं बन पाता। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता है कि जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है उन्हें क्रेडिट कार्ड न मिले या लोन न मिले।

क्रेडिट हिस्ट्री दरअसल किसी भी व्यक्ति का फाइनेंशियल लेखा – जोखा होता है। क्रेडिट हिस्ट्री में व्यक्ति के द्वारा किये गये लेनदेन का रिकार्ड दर्ज होता है। व्यक्ति ने अगर कोई लोन लिया होता है तो उसको चुकाने का रिकार्ड दर्ज होता है कि व्यक्ति ने कैसे लोन चुकाया है।

किन लोगों की क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती है ?

उस सभी लोगों की कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती है जिन्होंने कभी लोन नहीं लिया होता है या जिनके पास कोई क्रेडिट कार्ड नहीं होता है। क्रेडिट हिस्ट्री तब दर्ज होती है जब व्यक्ति लोन लेता है या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है।

दरअसल क्रेडिट हिस्ट्री में यह दर्ज होता है कि व्यक्ति ने जो लोन लिया है उस लोन को वापस कैसे किया है। अगर व्यक्ति क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करता है तो व्यक्ति का क्रेडिट कार्ड के द्वारा किये गये खर्च का पैसा वापस करने के तरीके को दर्ज किया जाता है।

व्यक्ति द्वारा लोन या क्रेडिट कार्ड की बिल का भुगतान या तो अच्छी तरह से किया गया होता है या लेट-लतीफ तरीके से। इन्हीं दोनों का रिकार्ड क्रेडिट हिस्ट्री कहलाता है। क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर ही क्रेडिट रिपोर्ट बनती है और क्रेडिट रिपोर्ट के आधार पर ही सिबिल स्कोर तैयार किया जाता है।

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इस तरह का हम कह सकते हैं कि क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर ही यह डिसाइड किया जाता है कि व्यक्ति को लोन मिलेगा या उसका क्रेडिट कार्ड बन पायेगा या नहीं बन पायेगा।

इस तरह से देखा जाये तो जिन्होंने कभी लोन नहीं लिया होता है या जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं होता है उनकी क्रेडिट हिस्ट्री नहीं बन पाती है। आइये समझते हैं कि जिनकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती है वह कैसे अपनी क्रेडिट हिस्ट्री बना सकते हैं ?

बिना क्रेडिट हिस्ट्री वाले कैसे क्रेडिट हिस्ट्री बना सकते हैं ?

जिन लोगों का कोई लोन नहीं चल रहा होता है या जो लोग कोई क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं कर रहे होते हैं वह लोग इस तरीके से अपना क्रेडिट हिस्ट्री बना सकते हैं।

पर्सनल लोन लेकर

क्रेडिट हिस्ट्री बनाने के लिए यह सबसे अधिक प्रचलित तरीकों में से एक है। इस तरीके का इस्तेमाल करके कोई भी व्यक्ति खुद की क्रेडिट हिस्ट्री बना सकता है। जब कोई व्यक्ति लोन लेता है तब उस व्यक्ति को लोन चुकाने के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है। व्यक्ति कोई हर महीने एक निश्चित रकम EMI के रुप में जमा करता है। यह प्रक्रिया ही क्रेडिट हिस्ट्री बन जाती है।

क्रेडिट लाइन लेकर

वर्तमान में ऐसी बहुत ही नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी – एनबीएफसी हैं जहां से क्रेडिट लाइन मिलता है। क्रेडिट लाइन भी एक तरह का लोन ही होता है लेकिन यह इसका नाम लोन न होकर क्रेडिट लाइन होता है। क्रेडिट लाइन में छोटा अमाउंट मिलता है। इस छोटे अमाउंट को चुकाने के लिए समय भी कम मिलता है।

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क्रेडिट लाइन के साथ एक अच्छी बात यह है कि इसके लिए क्रेडिट स्कोर की जरूरत नहीं पड़ता है। जब ग्राहक क्रडिट लाइनले लेता है तो उसे चुकाने का तौर तरीका व्यक्ति के क्रेडिट हिस्ट्री में जुड़ जाता है और इस तरह से क्रेडिट हिस्ट्री बन जाती है।

इन गलतियों से खराब होता है क्रेडिट स्कोर 

क्रेडिट कार्ड की बिल देरी से भरना पर

जब कोई ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करता है या कार्ड से कैश निकाल लेता है लेकिन उन पैसों का भुगतान जल्दी न करके देरी से करता है तो उसके सिबिल स्कोर पर असर पड़ता है और सिबिल स्कोर कम हो जाता है। ऐसे ग्राहकों को दोबारा लोन मिलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

एक साथ कई लोन के लिए अप्लाई करने पर

सरकारी बैंक और एनबीएफसी कम्पनियां एक साथ कई लोन के लिए अप्लाई करने वाले ग्राहकों को अपेक्षाकृत बेहतर ग्राहक नही मानती हैं। एक साथ कई लोन के लिए अप्लाई करने पर लोन देने वाली संस्थाओं का मानना होता है कि ग्राहक एक बार ही सभी लोन की मंथली EMI नहीं भर पायेगा इससे लोन के एनपीएस होने का खतरा अधिक हो जाता है। इस लिए कोशिश करना चाहिए कि एक बार में एक ही लोन एप्लीकेशन भरा जाये।

सिबिल स्कोर की नियमित जाँच नहीं करने पर

जब क्रेडिट स्कोर को नियमित तौर पर जांचा नही जाता है तो उसके बारे में कोई जानकारी नही मिल पाती है। इससे ग्राहक को पता ही नही चल पाता है कि उसका क्रेडिट स्कोर क्या है। इसीलिए ग्राहकों को यह सलाह दी जाती है कि वह अपने क्रेडिट स्कोर की जाँच नियमित तौर पर करते रहें इससे अगर क्रेडिट स्कोर कम भी हुआ तो उसमे सुधार किया जा सके।

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इत्यादि जैसे कारण होते हैं जिनके चलते क्रेडिट स्कोर कम हो जाता है या खराब हो जाता है। ग्राहकों को इससे बचने के लिए हर संभव उपाय करना चाहिए।

क्रेडिट स्कोर के फायदे

अगर इस सवाल का उत्तर एक लाइन में कहें तो – बेहतर क्रेडिट स्कोर ही तय यानी डिसाइड करता है कि लोन  मिलेगा या नहीं। बेहतर क्रेडिट स्कोर के और भी कई फायदे हैं, आइये सभी फायदों के बारे में जानते हैं।

अधिकतम सीमा तक लोन मिल जाता है

जब क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है ग्राहक जिनकी रकम लोन के रुप में मांगता है, उसको उतनी रकम मिल जाती है। बेहतर क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक और एनबीएफसी कंपनियों को भरोसा होता है कि यह व्यक्ति लोन चुकाने के लिए सीरियस है। सीरियस का मतलब है कि व्यक्ति लोन चूका सकता है इसलिए उसे जितनी रकम मांग रहा है उसको दे दिया जाता है।

क्रेडिट कार्ड आसानी से मिल जाता है – Credit Card

जब सिबिल स्कोर बेहतर होता है तो क्रेडिट कार्ड भी आसानी से मिल जाता है। यहाँ क्रेडिट कार्ड से उधार कार्ड से है। क्रेडिट कार्ड देने वाली कम्पनियाँ जब सिबिल स्कोर की जांच कर करती है और जब सिबिल स्कोर बेहतर होता है तो क्रेडिट कार्ड भी बहुत आसानी से मिल जाता है।

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