कोरोना वायरस से पूरी दुनिया ठप पड़ी हुई थी। कई देशों की सरकारों द्वारा लोगों से यह कहा जा रहा है, लोग घर में रहे, बाहर न निकले। इसके पीछे कारण यह है की अभी तक कोरोना की कारगर दवा नहीं बन पाई है। या यूँ  कहे की जो दवा बनी है वो सभी लोगो तक नहीं पहुंच पायी है ऐसे मैं कोरोना को पूरी तरह से हम हारने में अभी तक नाकाम रहे है और वो पिछले वर्ष की तरह ही फिर से अपने पैर पसार रहा है।

पिछले वर्ष कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू का अहवाह्न किया गया था । लोगों ने प्रधानमंत्री की बात माना और 22 मार्च 2020 को अपने घरों पर ही रहे।

इन सब के बीच सबसे अधिक जो प्रभावित हुआ है, वह है उद्योग धंधे और कारोबार। लॉकडाउन के आदेश के बाद सभी उद्योग बंद कर दिया गया है। ट्रांसपोर्ट की सर्विस बंद होने की वजह से सभी तरह के कारोबार जबरदस्त तरीके प्रभावित हुआ है।

अगर हम मोटा – मोटा भी आंकड़ा लगाते हैं, तो देखने को मिलता है कि सभी कारोबार बंद हैं। ऐसे में हम यह नहीं कह सकते हैं की फला उद्योग कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। आइये देखते हैं कि भारत में कोरोना का उद्योगों पर क्या प्रभाव पड़ा है।

मुंबई-स्थित अर्थशास्त्री विवेक कौल कहते हैं, ”जहाँ तक मैन्युफैक्चरिंग की बात है, महाराष्ट्र देश में सबसे ऊपर है. साल 2018-19 में भारत के कुल विनिर्माण का लगभग 17% योगदान महाराष्ट्र से था. सरकार के कड़े क़दम से महाराष्ट्र और देश की आर्थिक प्रगति प्रभावित होगी. उदहारण के लिए ऑटो और इससे जुड़े उद्योगों को ले लें, ये सब पुणे और इसके क़रीब के शहर में हैं, जो भारत के सबसे अधिक संक्रमित इलाक़ों में से एक है. पाबंदियों का इन उद्योगों के उत्पादन पर असर पड़ेगा, चाहे सरकार इन्हें खुला भी रखे.”

विवेक कौल का मानना है कि इसका असर उन उद्योगों पर भी पड़ेगा, जिन पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं. वे कहते हैं, “इस्पात, से लेकर रबर और प्लास्टिक तक, ऑटोमोबाइल के निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली हर चीज़ नकारात्मक रूप से प्रभावित होगी.”

मुद्रा बाज़ार में सक्रिय एक कंपनी के अध्यक्ष पराग गायकवाड़ के मुताबिक़, व्यपारियों का आत्मविश्वास कम हुआ है, जिसका असर सभी तरह के व्यपार पर पड़ेगा, चाहे वो प्रतिबंध के अंदर हो या बाहर।

संयुक्त राष्ट्र की कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवेलपमेंट (UNCTAD) ने ख़बर दी है कि कोरोना वायरस से प्रभावित दुनिया की 15 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत भी है

यूरोप के आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी ओईसीडी ने भी 2020-21 में भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की गति का पूर्वानुमान 1.1 प्रतिशत घटा दिया है

कोरोना से प्रभावित उद्योग: ट्रैवेल ऐंड टूरिज़्म इंडस्ट्री

कोविड 19 वायरस यानी कोरोना वायरस की पहचान सबसे चीन के वुहान शहर में की गई। चीन से ही यह वायरस पूरी दुनिया में फ़ैल गया। कोरोना वायरस एक ऐसा वायरस है, जो प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी किसी व्यक्ति के शरीर में फ़ैल सकता है।

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ऐसे में जब चीन से लोग अन्य देशों में गये तो वह अपने साथ कोरोना वायरस भी साथ लेते गये। एक तो खुद संक्रमित हुए ऊपर से अपने साथ यात्रा कर रहे अन्य लोगों को भी कोरोना वायरस से संक्रमित किया।

इस तरह से कोरोना से संक्रमित लोगों की तादात बढ़ते – बढ़ते बहुत अधिक बढ़ गई। इटली और आस्ट्रेलिया जैसे देशों में हालात बेकाबू है।

कोरोना रोकने की दिशा सभी देशों ने अपने यहां लॉकडाउन करने की एडवाइजरी जारी कर दिया। भारत के संबंध में बात करें, तो भारत 31 मार्च 2020 तक लॉक डाउन था। भारत के सभी पर्यटन स्थल पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।

ऐसे में पर्यटन एजेंसियों में बुक किया गया टिकट धड़ाधड़ कैंसिल हो गये। टूरिस्ट एजेंसियों के पास लगातार कॉरपोरेट ग्राहकों और व्यक्तिगत कस्टरमर के फ़ोन आने लगे, सभी ने फोन पर सिर्फ एक ही बात कही कि वह अपना टिकट कैंसिल कराना चाहते हैं।

टूर एंड ट्रेवेल एजेंसी चलाने वाले अश्वनी कहते हैं कि “मैंने अपनी ज़िंदगी में इससे बड़ी मेडिकल इमरजेंसी अब तक नहीं देखी। इसके आगे सार्स (SARS), मार्स (MARS) और स्वाइन फ्लू का संकट कुछ भी नहीं है।

जितना बुरा असर कोरोना वायरस का हुआ है, उतना किसी बीमारी के प्रकोप से नहीं हुआ। बाहर जाने वाले कम से कम 20 प्रतिशत टूर या तो कैंसिल कर दिए गए हैं या फिर आगे के लिए टाल दिए गए हैं।

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अश्वनी के अनुसार, होटलों के कमरों की बुकिंग 90% तक कैंसिल हो गई है। दुनिया भर से भारत वाले वाली इंटरनेशनल फ्लाईट की बुकिंग रद्द हो गई हैं और सबसे खराब प्रभाव तो डेस्टिनेशन वेडिंग पर पड़ा है।”

अश्विनी कहते हैं कि, “भारत आने वाले पर्यटकों की यात्राओं का अनुमान लगाना भी बहुत मुश्किल है। क्योंकि सरकार हर रोज़ नई नीति की घोषणा कर रही है और हमें पता नहीं है कि आगे किन और देशों के नागरिकों के भारत आने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।”

एहतियात के तौर पर सरकार ने कोरिया और इटली से आने वाले लोगों को कहा है कि वो अपनी यहां कि आधिकारिक लैब से इस बात का प्रमाणपत्र लेकर आएं कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हैं। (स्टेटमेंट साभार: बीबीसीहिन्दी)

स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी प्रेस रिलीज जारी किया है

हेल्थ मिनिस्ट्री द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज़ के अनुसार, “इटली, ईरान, दक्षिण कोरिया और जापान के नागरिकों को जो भी वीज़ा और ई-वीज़ा 3 मार्च 2020 या उससे पहले जारी किए गए हैं और जिन्होंने अभी भारत में प्रवेश नहीं किया है, वो सभी वीज़ा तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाते हैं।

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भारत सरकार ने नागरिकों को ये भी सलाह दी है कि वो चीन, इटली, ईरान, रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया, जापान, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी की यात्रा तब तक न करें, जब तक ये बहुत ज़रूरी न हो।”

ट्रैवेल ऐंड टूरिज़्म काउंसिल और ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिक्स द्वारा कहा गया है, कि उनके द्वारा कोरोना वायरस के प्रभावों का स्टडी किया जा रहा है। साथ ही ऐसी संभवना जताई गई है कि कोरोना वायरस की महामारी से दुनिया के पर्यटन उद्योग को क़रीब 22 अरब डॉलर का नुक़सान होगा।

वही इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) द्वारा कहा जा रहा है कि कोरोना के चलते कम से कम 63 अरब डॉलर का नुक़सान हो सकता है। इस नुकसान में माल ढुलाई का बिजनेस शामिल नहीं किया गया है।

कोरोना से प्रभावित उद्योग: आभूषण उद्योग ठप पड़ गया है

गुजरात राज्य को आभूषण प्रदेश कहा जाता है। गुजरात में हीरे तराशने के साथ ही पॉलिश करने का काम बड़ी संख्या में होता है। गुजरात से तराशे और पॉलिश किये गये हीरे चीन और हांगकांग में निर्यात होता है।

ऐसे में जब कोरोना वायरस चीन को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। न तो भारत से कोई मालवाहक चीन जा रहा है और न चीन से कोई मालवाहक भारत आ रहा है। ऐसे में गुजरात का आभूषण उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।

क्या आप जानते हैं कि कोरोना वायरस से जूलरी कारोबार को कितना नुकसान हुआ होगा? आपको जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस से आभूषण उद्योग को लगभग सवा अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।

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गुजरात में हीरों का कारोबार करने वाले मोहन सिंह बताते हैं कि, ‘हमारे लिए बहुत से कारोबारी हीरे तराशने का काम करते थे, हीरे तराश कर हमें देते थे और हम उन तराशे हुए हीरों को हॉन्ग-कॉन्ग में बेच देते थे। अब ऐसी स्थिति हो गई है की हॉन्ग-कॉन्ग से न कोई ऑर्डर आ रहा है और न ही पहले गये ऑर्डर का अभी तक भुगतान मिल रहा है। ऐसे हमारा पैसा दोनों तरफ से अटका पड़ा है।’

कोरोना से प्रभावित उद्योग: ऑटोमोबाइल उद्योग

सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (SIAM) का कहना है कि भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में क़रीब 3.7 करोड़ लोग काम करते हैं। भारत में ऑटो उद्योग पहले से ही आर्थिक सुस्ती का शिकार था। अब चीन में मंदी के कारण भारत के ऑटो उद्योग को भी कल-पुर्ज़ों की किल्लत हो रही है।

ऑटो उद्योग की कई बड़ी कंपनियों ने कहा है कि उन्हें कल-पुर्ज़ों की आपूर्ति में परेशानी उठानी पड़ रही है। टाटा मोटर्स, टीवीएस मोटर्स, हीरो मोटर कॉर्प और बजाज ऑटो ने कहा है कि वो कोरोना वायरस के प्रभावों पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं।

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कोरोना से प्रभावित बिजनेस: मेडिसिन उद्योग

आज से एक महीने पहले तक सैनिटाइज़र भारत में कुलीन माना जाता था। छोटे शहरों में लोग सैनिटाइज़र का नाम भी नहीं जानते थे। लेकिन आज की डेट में सैनिटाइज़र हर किसी के जुबान पर चढ़ा हुआ है। सैनिटाइज़र की कालाबाजारी जमकर हो रही है।

ये केवल फार्मा कंपनियों की आमदनी का मामला नहीं है। किसी भी बुरे प्रभाव की एक मानवीय क़ीमत भी होती है। मेडिकल स्टोर में दवाओं की कमी हो रही है। तमाम बड़े शहरों में केमिस्ट, सैनिटाइज़र और मास्क के ऑर्डर तो दे रहे हैं लेकिन उन्हें एक हफ़्ते से माल की डिलिवरी नहीं मिल पा रही है।

अब जब बहुत से भारतीय अपने यहां दवाएं, सैनिटाइज़र और मास्क जमा कर रहे हैं, तो ये सामान अधिकतम खुदरा मूल्य से भी अधिक दाम पर बिक रहे हैं।

थोक ऑनलाइन कारोबार की सबसे बड़ी भारतीय कंपनी ट्रेड इंडिया डॉट कॉम (Trade.i ndia.com) के अनुसार, पिछले तीन महीनों में सैनिटाइज़र और मास्क की मांग में 316 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हो गया है।

भारत, जेनेरिक दवाओं का दुनिया भर में सबसे बड़ा सप्लायर है। चीन में उत्पादन बंद होने से भारत ने ऐहतियाती क़दम उठाते हुए कुछ दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि भारत को अपनी ज़रूरत पूरी करने में कोई कमी न हो।

इसीलिए पैरासेटामॉल, विटामिन B1, B6 और B12 के साथ-साथ अन्य एपीआई और फ़ॉर्मूलों की दवाओं के निर्यात पर पाबंदियां लगाई गई हैं।

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केंद्रीय जहाज़रानी, रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा, “देश में दवाओं की कमी होने से रोकने के लिए एक टास्क फ़ोर्स बनाने का सुझाव दिया गया है। मंत्रियों का एक स्थायी समूह लगातार स्थितियों का आकलन कर रहा है। हम एक्टिव फार्मास्यूटिकल इन्ग्रेडिएंट्स (API) और इंटरमीडियरी का निर्यात भी करते हैं और आयात भी।”

“अगर निर्यात जारी रहता है, तो कुछ एपीआई के मामलों में भविष्य में भारत में संकट खड़ा होने की आशंका है। इसीलिए हमने थोड़े समय के लिए ऐसे एपीआई के निर्यात पर पाबंदियां लगाई हैं, जो कोरोना वायरस के इलाज में काम आ सकती हैं।”

कोरोना वायरस से पोल्ट्री फॉर्म गर्त में चले गये

भारत में कब कौन सी और क्या अफवाह उड़ जाए, कहा नहीं जा सकता है। एक ऐसी ही अफवाह यह उड़ी कि मुर्गा, मांस और अंडा खाने से कोरोना वायरस होता है।

यह अफवाह इतनी तेजी से फैली कि देश भर की पोल्ट्री फॉर्म्स में उपलब्ध मुर्गों को नष्ट कर दिया गया। अण्डों को फेक दिया गया। इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था के साथ – साथ पोल्ट्री फॉर्म के मालिकों की भी अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

आंकड़ा साभार: बीबीसीहिंदी

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