कोविड-19 महामारी ने चारो तरफ हाहाकार मचा दिया है। अस्पताल कम पड़ गए। मेडिकल उपकरण कम पड़ गये। स्थिति खराब हो गई कि शमशान घाट कम पड़ने लगे। इसके अलावा इस महामारी का असर कारोबार पर भी व्यापक तौर पर पड़ा है। कोरोना के चलते लॉकडाउन चल रहा है। लॉकडाउन का सबसे बुरा असर एमएसएमई पर देखने को मिल रहा है। बहुत सी एमएसएमई बंद हो गई है। हालांकि बहुत सी एमएसएमई के लिए बिजनेस लोन बहुत बड़ा मददगार बनकर आया है।

एमएसएमई सेक्टर

यह एक तथ्य है कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अकेले एमएसएमई सेक्टर का 29% योगदान है। इसके अलावा यह सेक्टर 12 करोड़ से अधिक लोगों को परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर रोजगार प्रदान करता है। इन फैक्ट से यह समझा जा सकता है कि एमएसएमई सेक्टर कितना बड़ा है और इसका देश की अर्थव्यवस्था में कितना महत्वपूर्ण योगदान है।

कोविड-19 महामारी की वजह से लॉकडाउन का दंश पूरे देश पर पड़ रहा है। सभी के जीवन पर इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। एमएसएमई सेक्टर में लगभग दुर्घटनाग्रस्त ही हो गया, राजस्व में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है। मांग में गिरावट दर्ज होने से कैश फ्लो की भारी कमी हो गई है।

इसी के साथ, बिजनेस में निरंतरता बनाये रखने में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।  हालांकि इस संकट के बीच, भारत सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए कुछ योजना शुरु की गई है। जिससे इस संकठ से उबरने में मदद मिलेगा। इसके अलावा कुछ एनबीएफसी भी बिजनेस लोन के तौर पर सहायता प्रदान कर रहे हैं।

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आरबीआई से वित्तीय सहायता नीति

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी कर बैंकों को नए एमएसएमई उधारकर्ताओं को उनकी शुद्ध मांग और समय देनदारियों से जारी राशि में कटौती करने की अनुमति दी है। इसका मतलब यह है कि बैंकों को पहली बार MSME उधारकर्ताओं को 1 जनवरी से 31 अक्टूबर 2021 तक के लोन के लिए कैश आरक्षित अनुपात बनाए रखने की छूट है।

इसके अलावा, आरबीआई ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को वृद्धिशील लोन को बढ़ावा देने और महामारी प्रभावित क्षेत्रों के पुनरुद्धार को बढ़ावा देने के लिए लक्षित दीर्घकालिक रेपो संचालन (टीएलटीआरओ) के तहत बैंक फंडिंग का लाभ उठाने की अनुमति दी है। इस योजना के तहत, एनबीएफसी वित्तीय रूप से कमजोर हो जाने वाले एमएसएमई को क्रेडिट ऑफ लाइन प्रदान करने में सक्षम होंगे।

ये उपाय एनबीएफसी करेंगे। एनबीएफसी को इस उपाय को करने के लिए बड़े वित्तीय संस्थानों और बैंकों से वित्तीय सहायता मिलेगा। जिससे एनबीएफसी द्वारा एमएसएमई को आसानी से बिजनेस लोन उपलब्ध हो सकेगा। यहां पर बता दें कि देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan से एमएसएमई को 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जा रहा है।

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बजट और नीति समर्थन

केंद्रीय बजट 2021-2022 पूंजीगत-संकटग्रस्त MSMEs के लिए राहत लेकर आया, जिसमें सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 15,700 करोड़ रुपये खर्च किए। बजट में वन पर्सन कंपनियों (ओपीसी) को शामिल करने के प्रोत्साहन का निर्णय एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए बेहतरीन साबित होगा।

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एमएसएमई को फिर से परिभाषित करके, केंद्र सरकार और एमएसएमई मंत्रालय ने बड़ी संख्या में सूक्ष्म और छोटी इकाइयों को इस क्षेत्र में लाया है, जिससे उन्हें अपने उपायों, योजना के साथ लाभ मिल रहा है।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की कार्यवाही से सेक्टर के लिए कीमती वित्तीय संसाधनों की निकासी होती है। मामलों के तेजी से समाधान पर जोर देने के लिए, सरकार ने लोन समाधान के वैकल्पिक तरीकों की शुरुआत की घोषणा करते हुए एनसीएलटी ढांचे को मजबूत करने की मांग की है, जिसके लिए ई-कोर्ट और एमएसएमई के लिए विशेष ढांचे का माध्यम बनाया है।

सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पहले ही कई उपाय शुरू कर दिए थे। उपायों में एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपये के एमएसएमई लोन और एमएसएमई के लिए फंडों के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपये के इक्विटी शामिल हैं।

MSMEs को 3 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) से भी फायदा हुआ है। 21 जनवरी तक 2.39 लाख करोड़ रुपये के कुल लोन के साथ, व्यवसायों के लिए बिना गिरवी रखे लोन इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा समर्थन रहा है। इसके अतिरिक्त धातुओं, चमड़े और कपड़ों के निर्माण पर टैक्स और चार्जेस को कम किया गया है। जिसका सीधा लाभ एमएसएमई सेक्टर को मिल रहा है।

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एमएसएमी की स्थायी चुनौतियों पर एक नजर

सरकारी सहायता और एमएसएमई सेक्टर के लिए दिखाए गए लचीलेपन के कारण, यह क्षेत्र एक पुनरुद्धार की कहानी को आगे बढ़ाते हुए टेक-ऑफ करने में सक्षम है। हालांकि, अर्थव्यवस्था में तकनीकी मंदी के बीच, इस क्षेत्र को अभी भी अपनी क्षमता को अधिकतम करने के लिए एक मजबूत नीति की आवश्यकता है।

यह क्षेत्र लंबे समय से कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की अनुपलब्धता, कठिन लोन के नियम, जटिल नियामक और लाइसेंसिंग तंत्र की चुनौतियों से जूझ रहा है।

अधिकांश MSMEs कागजी कार्रवाई, दस्तावेज प्रोसेस, क्रेडिट हिस्ट्री और पर्याप्त गिरवी की अनुपलब्धता के कारण लोन वितरण के उपायों का लाभ उठाने में असमर्थ हैं, विशेष रूप से पहली बार लोन लेने वाले के लिए तो और भी अधिक कठिनाई होती है। जिसका सीधा असर एमएसएमई की प्रोडक्शन पर पड़ता है। कारोबारी का मनोबल गिरता है। हालांकि, कोरोना माहामारी के इस समय में बहुत सारे नियमों में बदलाव किया गया है। जैसे एमएसएमई रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरु किया गया है। स्ट्रेस्ट एमएसएमई के लिए भी बिजनेस लोन देने के लिए कहा गया है और लोन की गारंटी कारोबारी पर से हटाकर क्रेडिट गारंटी योजना लाया गया है। इन कार्यो से कारोबारियों को लाभ मिलना शुरु हो गया है।

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