कोरोनावायरस महामारी ने भारत के एमएसएमई उद्यमियों और छोटे व्यवसायों को तोड़ कर रख दिया है। कई व्यवसाय के मालिक अनिश्चित हैं कि इस तरह की स्थिति में मदद के लिए कहां जाएं और आगे क्या हो सकता है। कोरोना वायरस की मार एमएसएमई सेक्टर पर दोहरी पड़ी है। एक तरफ काम करने वाले लोग, अपने – अपने प्रदेश चले गये हैं, तो वहीं दूसरी तरफ बिजनेस का संचालन करने के लिए फंड का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि कई एनबीएफसी कंपनियों द्वारा बिजनेस लोन की सहायता प्रदान करने कार्य हो रहा है।

एमएसएमई व्यवसाय के मालिकों को इस समय में बिजनेस का वर्किंग कैपिटल कैसे मैनेज करना चाहिए और  कैसे अपने बिजनेस का संचालन करना है, इसके बारें में हम इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं। आइये सबसे पहले वर्किंग कैपिटल के बारें में जानिए।

वर्किंग कैपिटल यानी कार्यशील पूंजी

वर्किंग कैपिटल वह धन होता है, जिससे बिजनेस का संचालन किया जाता है। जरुरी खर्चो को पूरा किया जाता है।वर्किंग कैपिटल प्रमुख रुप से दो प्रकार का होता है।

  1. टोटल वर्किंग कैपिटल – सकल कार्यशील पूंजी
  2. नेट-वर्किंग कैपिटल

सकल कार्यशील पूंजी

यह व्यवसाय की वर्तमान परिसंपत्तियों जैसे नकद धन, अकाउंट में प्राप्त धन, इनवाइस, मार्केटिंग में लगा धन और शॉर्ट टर्म में निवेश की गई राशि को संदर्भित करता है।

नेट-वर्किंग कैपिटल

यह वर्तमान देनदारियों से कटौती करने के बाद वर्तमान संपत्ति के अधिशेष-मूल्य को इंगित करता है। मतलब, कुल वर्तमान धन में से कुल देनदारी घटाने के बाद जितना धन बचता है, उसे नेट-वर्किंग कैपिटल कहते हैं।

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वर्तमान संपत्ति यहां नकदी, इन्वेंट्री, रॉ-मटेरियल और खाता प्राप्य है। और, वर्तमान देनदारियों में देय खाते शामिल हैं। लोन प्रदान करने वाली संस्था हमेशा वर्किंग कैपिटल लोन को आगे बढ़ाने से पहले शुद्ध वर्किंग कैपिटल पर विचार करते हैं।

समय के आधार पर वर्किंग कैपिटल

स्थायी वर्किंग कैपिटल

इसे निश्चित वर्किंग कैपिटल के रूप में भी जाना जाता है और यह न्यूनतम वर्किंग कैपिटल है जिसे बिजनेस को बिना किसी रुकावट या कठिनाई के व्यावसायिक कार्यों को करने के लिए रखना पड़ता है। उदाहरण के लिए, परिचालन को सुचारू रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम नकदी। स्थायी वर्किंग कैपिटल की मात्रा व्यवसाय के आकार और विकास की संभावनाओं पर निर्भर करती है।

नियमित वर्किंग कैपिटल

यह व्यवसायों द्वारा दिन-प्रतिदिन के कार्यों के लिए धन की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, वेतन, मजदूरी, कच्चे माल आदि का भुगतान करने के लिए आवश्यक नकदी।

परिवर्तनीय वर्किंग कैपिटल

इस वर्किंग कैपिटल में उतार-चढ़ाव के रूप में भी जाना जाता है, निधियों को एक अस्थायी अवधि के लिए निवेश किया जाता है जो व्यवसाय के आकार को बदलने या व्यवसाय की संपत्ति में परिवर्तन के संबंध में भिन्न होता है।

रिजर्व मार्जिन वर्किंग कैपिटल

रिजर्व वर्किंग कैपिटल को नियमित वर्किंग कैपिटल आवश्यकताओं के ऊपर और ऊपर रखा जाता है और इसे अप्रत्याशित परिस्थितियों जैसे हड़ताल, प्राकृतिक आपदाओं, व्यावसायिक संपत्तियों को नुकसान, आदि के दौरान खर्च को पूरा करने के लिए एक आकस्मिकता के रूप में रखा जाता है।

मौसमी परिवर्तनीय वर्किंग कैपिटल

जैसा कि नाम से पता चलता है, यह व्यवसाय की मौसमी है तो पीक मौसमी मांग को पूरा करने के लिए अलग रखी गई वर्किंग कैपिटल की राशि है। उदाहरण के लिए, ऊनी कपड़े का निर्माण के लिए बचा कर रखा जाने वाला धन।

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वर्किंग कैपिटल साइकिल

व्यवसायों के लिए सही वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता का निर्धारण करने के लिए, उन्हें अपने व्यवसाय के वर्किंग कैपिटल साइकिल को समझने की आवश्यकता है।

इसे ऑपरेटिंग साइकिल के रूप में भी जाना जाता है, यह व्यवसाय संचालन के दौरान नकदी के बहिर्वाह और प्रवाह के बीच की अवधि है। दूसरे शब्दों में, किसी परिसंपत्ति में नकदी का निवेश करने और उसे नकदी में बदलने का समय है।

कोरोना काल में वर्किंग कैपिटल कैसे मैनेज करें?

इस कठिन समय में व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाना कोई आसान काम नहीं है क्योंकि संचालन और विभिन्न सेवाओं को बनाए रखने के लिए निरंतर कैश- फ्लो की आवश्यकता होती है। कभी-कभी, विभिन्न कारकों के कारण संचालन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त कैश फ्लो उत्पन्न करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे मामले में, आप एक वर्किंग कैपिटल लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसे बिजनेस लोन के रूप में भी जाना जाता है।

वर्किंग कैपिटल लोन के विभिन्न प्रकार

शॉर्ट टर्म वर्किंग कैपिटल लोन: व्यापार में अल्पकालिक वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयुक्त है, लोन प्रकार एक निश्चित ब्याज दर के साथ आता है और 12 महीने तक का लोन कार्यकाल होता है।

लांग टर्म वर्किंग कैपिटल लोन: लोन प्रकार नियोजित पूंजीगत व्यय या क्षमता विस्तार को पूरा करने के लिए उपयुक्त है और इसका कार्यकाल 60 महीने तक है। इसमें ओवरड्राफ्ट सुविधा, लेटर ऑफ क्रेडिट, बैंक गारंटी, ट्रेड क्रेडिट आदि शामिल हैं।

वर्किंग कैपिटल लोन कहां मिल सकता है?

इस कठिन समय में एमएसएमई कारोबारियों को कुछ एनबीएफसी से बिजनेस लोन की के तौर पर सहायता प्राप्त हो सकता है। एमएसएमई को सहायता प्रदान करने में ZipLoan कंपनी अग्रणी है। ZipLoan से 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, बहुत आसान तरीके से, घर बैठे, सिर्फ 3 दिन* में मिल सकता है। अभी आवेदन करें।

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कोरोना काल में बिजनेस कैसे मैनेज करें?

जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें जीवन के साथ जीविका भी बचाना है। इसका अर्थ है कि व्यवसाय का संचालन करते रहना है। इस कोरोना काल में बिजनेस को निम्नलिखित तरीको के साथ मैनेज किया जा सकता है।

कोविड प्रोटोकाल का पालन करें

आप रहेंगे तो ही बिजनेस रहेगा और तभी मुनाफा होगा। इसलिए, कोरोना प्रोटोकाल का पालन करना अनिवार्य है। कोविड प्रोटोकाल के तहत बिजनेस के अंदर हर किसी को न घुसने दें। अगर दुकान है तो दुकान के बाहर ग्राहकों के लिए दो फीट गोला बनाइये। और इसका कड़ाई के साथ पालन करें। बिना मास्क के किसी को भी सामान न दें। बिजनेस पर आने वाले हर व्यक्ति को सेनेटाइज करें।

बिजनेस का कैश – फ्लो मेंटेन रखें

कैश-फ्लो व्यवसाय की जीवनरेखा है। अपने बिजनेस के कैश – फ्लो को निरंतर मेंटेन रखें। अगर आपको लगता है कि आपके बिजनेस का वर्किंग कैपिटल घट रहा है या कैश – फ्लो टुट रहा है, तो उस कंडिशन में बिजनेस लोन के लिए आवेदन करने में देरी न करें। क्योंकि, बिजनेस लोन की सहायता पाकर आप अपने का कैश – फ्लो मेंटेन रख सकते हैं।

भविष्य के लिए सकारात्मक रहें

जैसे काली रात के बात एकदम सफेद सबेरा होता है। ठीक उसी प्रकार कठिन दिन के बाद बेहतर समय भी आता है। इसलिए, किसी भी परिस्थिती से घबराना नहीं चाहिए। तेजी से बदलती स्थिति अच्छी तरह से सूचित रहने और कठिन गलत सूचना से बचने के लिए कठिन बना सकती है जो आपके व्यवसाय के संचालन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। घर के लोगों से बात करें। दोस्तों के साथ बैठक करें। इससे जीवन आसान लगने लगता है।