कोविड19 यानी कोरोना वायरस से पूरी दुनिया प्रभावित है। चीन, इटली और आस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप हुई पड़ी है। भारत में तीन सप्ताह का लॉकडाउन चल रहा है।

लॉकडाउन का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका जाहिर की जा रही है। भारत में लॉकडाउन का आज पांचवा दिन है। लॉकडाउन में दैनिक जरूरी चीजों की दुकान छोड़कर बाकी सबकुछ बंद है। आइये समझते हैं कि लॉकडाउन का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है या पड़ने वाला है।

कोरोना चीन के वुहान शहर से शुरु होकर पूरी दुनिया में पहुंच गया है। जिनकी वजह से वैश्विक कारोबार में गिरावट की आशंका जाहिर की जा रही है। कोरोना की वजह से दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन और अमेरिका के कारोबार में सुस्ती के आसार हैं जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है।

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भारत सरकार अर्थव्यवस्था पर कोरोना के असर को लेकर सचेत है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि इस मामले में विभिन्न स्तर पर विकल्पों की देखा जा रहा है। कई मंत्रालयों के सचिव लगातार कोरोना के असर की समीक्षा कर रहे हैं और पूरी नजर रख रहे हैं।

क्या कहती है मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट?

रिसर्च एंड रेटिंग एजेंसी मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर में कोरोना की वजह से इस साल 0.4 फीसद की गिरावट हो सकती है। पहले वर्ष 2020 के लिए वैश्विक विकास दर में 2.8 फीसद की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था जिसे घटाकर अब 2.4 फीसद कर दिया गया है।

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कितना हो सकता है नुकसान?

जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट होगी, इससे भारत अछूता नहीं रहेगा। यही कारण है भारतीय अर्थशास्त्री भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का प्रभाव पड़ने की आशंका से इंकार नहीं कर रहे हैं। हालांकि कुछ भारतीय अर्थशास्त्रीयों द्वारा अभी यह नहीं बताया जा रहा है कि कुल कितना नुकसान होगा।

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लॉकडाउन के दौरान ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, टूरिज्म एंड ट्रेवेल इंडस्ट्री, शेयर मार्केट, मेडिसिन इंडस्ट्री जैसी कई बड़ी इंडस्ट्री बंद हैं। आईपीएल और ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों को अगले साल में टाल दिया गया है। इन सभी का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक कोरोना वायरस के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को तकरीबन 34.8 हजार करोड़ का नुकसान पहुंचेगा।

किन सेक्टर में होगा सबसे अधिक नुकसान?

टूर एंड टूरिज्म इंडस्ट्री

अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के मुताबिक विमानन उद्योग को यात्रियों से होने वाले कारोबार में कम से कम 63 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का बहुत बुरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। यह असर मैन्युफैक्चरर्स, सर्विस प्रोवाइडर और सेल्स में समान रुप से देखने को मिलेगा।

भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में करीब 3.7 करोड़ लोग काम करते हैं। भारत में ऑटो उद्योग पहले से ही आर्थिक सुस्ती का शिकार था। अब यह और प्रभावित हो सकता है।

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सेल तो घटेगी ही, इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी भी जाएगी। इनफैक्ट डेली बेजेस पर काम करने वाले मजदूरों को काम से निकाल दिया गया है।

मेडिसिन इंडस्ट्री

थोक ऑनलाइन कारोबार की सबसे बड़ी भारतीय कंपनी ट्रेड इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक, पिछले तीन माह में सैनिटाइजर और मास्क की मांग में 3.6 फीसदी का इजाफा हुआ है।

ट्रेड इंडिया के सीओओ संदीप छेत्री ने बीबीसी को बताया कि, “भारत के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग ने इस मांग को पूरा करने के लिए अपना उत्पादन कई गुना बढ़ा दिया है। ऐसे अन्य निजी सुरक्षात्मक उत्पादों की मांग भारत में भी बढ़ रही है और बाकी दुनिया में भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इसका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।’

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आभूषण उद्योग

कोरोना वायरस से जूलरी सेक्टर को करीब सवा अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका है। दरअसर भारत के तराशे और पॉलिश किए हुए हीरों के निर्यात के सबसे बड़े केंद्र चीन और हांगकांग हैं। इन देशों में वायरस का बहुत बुरा असर पड़ा है।

बहुत से ऐसे व्यापारी हैं, जिन्होंने माल की सप्लाई कर दिया है लेकिन उनको अभी तक पेमेंट नहीं मिली है। अब वह ग्राहकों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके लिए बड़ी चुनौती है। भुगतान ना मिलने के कारण भारतीय कारोबारी अपने छोटे सप्लायर्स को भी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। जिसकी वजह से लोगों का पैसा अटक गया है।

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भारतीय जीडीपी पर कोरोना का क्या असर पड़ेगा?

कई अर्थशास्त्री हैं, जिनका मानना है कि कोरोना का प्रभाव भारतीय विकास दर यानी जीडीपी पर बहुत अधिक नहीं पड़ेगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रभाव होगा।

सप्लाई चेन प्रभावित होने से कई चीजों के लिए कच्चे माल की कमी हो सकती है तो कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। वही कच्चे माल की कमी और उत्पादन लागत बढ़ने की सूरत में आयात बिल भी बढ़ सकता है।

अर्थव्यवस्था में एक फीसदी की गिरावट का आशंका जताई जा रही है

अर्थव्यवस्था में एक फीसदी की गिरावट सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था में ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट देखने को मिलेगी। ऐसा विश्व बैंक का मानना है।

मूडीज एनालिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिका अर्थव्यवस्था में कोरोना की वजह से वर्ष 2020 में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 0.2 फीसद की गिरावट के साथ 1.7 फीसद रहने का अनुमान है। इस साल की पहली छमाही में अमेरिका समेत दुनिया के कारोबार में सुस्ती की आशंका जताई जा रही है।

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एमएसएमई कारोबारियों को क्या सुरक्षा अपनाना चाहिए?

यह एक दौर है। धीरे – धीरे यह दौर भी समाप्त हो जायेगा। लेकिन कारोबार रहेगा। भारत में कुल 21 दिन का लॉकडाउन है। 21 दिन में सबसे अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उधमी यानी कारोबारी प्रभावित होंगे। चूंकि प्रोडक्टशन और सप्लाई दोनों बंद है। लेकिन, कारोबार जिन्दा रखना है। यह बड़ी चुनौती है।

जब लॉकडाउन समाप्त होगा होगा, तो अचानक से चीजों की मांग बढ़ जाएगी। लोग खरीदारी करने निकलेंगे। ऐसे में जिन कारोबारियों के पास पर्याप्त इन्वेंटरी और माल नहीं होगा, उनके बिजनेस को फिर से एक बार जूझना पड़ेगा।

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ऐसे में एक ही उपाय है, जिससे कारोबार को बचाया जा सकता है। यह उपाय है, बिजनेस में पर्याप्त मात्रा में इन्वेंटरी और प्रोडक्ट बनाये रखना। या इतना धन इक्कठा रखना कि जैसे ही लॉकडाउन समाप्त हो, वैसे माल खरीदा जा सके जिससे, प्रोडक्ट्शन और सप्लाई दोनों शुरु हो सके।

इन सभी कार्यों को करने के लिए पर्याप्त धन का होना बहुत जरूरी है। ऐसे में अगर किसी कारोबारी के पास पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है, तो कारोबारियों को हमारी सलाह है की वह बिना देर किये बिजनेस लोन के लिए अप्लाई कर दें।

वर्तमान समय में सभी लेंडर से बिजनेस लोन ऑनलाइन ही मिल रहा है। एमएसएमई कारोबारियों को 5 लाख तक का बिजनेस लोन ZipLoan से सिर्फ 3 दिन* में मिल रहा है। खास बात यह है कि ZipLoan से बिजनेस लोन लेने के लिए कोई प्रॉपर्टी गिरवी नहीं रखना होता है।

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आंकड़ों के लिए साभार: अमर उजाला, दैनिक जागरण

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