कोरोना यानी COVID-19 यह एक ऐसा वायरस है, जिसके प्रभाव एक बार फिर से दुनिया पर पड़ने लगा है। कोरोना के पहले फ़ेज के बाद, कोरोना का टीका बन गया। टीका लगने भी लगा। लेकिन, इसके बावजूद फिर से कोरोना का दोबारा लौटना चिंताजनक है। भारत के कई राज्यों में आंशिक लॉकडाउन तो, अधिकतर राज्यों में रात्रि कर्फ्यू लगा हुआ है। इसका बड़ा असर बिजनेस पर पड़ा है। आइये आपको कोरोना वायरस की जानकारी देते हुए, जानकारी देते हैं कि इसका बिजनेस पर क्या असर पड़ा है।

कोरोना वायरस क्या है?

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई वायरस (विषाणु) प्रकारों का एक समूह है, जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग के कारक होते हैं। यह आरएनए वायरस होते हैं। मानवों में यह श्वास तंत्र संक्रमण के कारण होते हैं, जो अधिकांश रूप से मध्यम गहनता के लेकिन कभी-कभी जानलेवा होते हैं। गाय और सूअर में यह अतिसार और मुर्गियों में यह ऊपरी श्वास तंत्र के रोग के कारण बनते हैं।

कोरोना का टीका यानी वैक्सीन

वैक्सीन शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘Vacca’ से हुई है। वैक्सीन की खोज को मेडिकल हिस्ट्री में बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। विभिन्न प्रकार की वैक्सीन की वजह से पूरे विश्व में हर साल तीस लाख लोगों की जान बच पाती है। कोरोना के बाद सभी देशों के वैज्ञानिकों को यह निर्देश जारी किया गया कि जितना जल्द हो सके, उतना जल्द कोरोना की वैक्सीन की खोज करें। इसके बाद कोरोना वैक्सीन विकसित की गई है।

कोरोना वैक्सीन व्यक्ति के शरीर को किसी बीमारी, वायरस या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है। शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को इतना विकसित करती है। शरीर में विकसित ‘इम्यून सिस्टम’ कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ शरीर में एंटीबॉडी बनाते हैं। जिससे शरीर कोरोना वायरस के बाहरी हमले से लड़ने सक्षम हो जाता है और कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश नहीं कर पाता है। आम भाषा में कहें को कोनोना वैक्सीन ही कोरोना की दवाई है।

कोरोना वैक्सीन कहां बन रही है?

भारत में दो वैक्सीन निर्माण केंद्रो में कोरोना वैक्सीन का निर्माण किया गया है।

  • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया- Serum Institute of India
  • भारत बायोटेक- Bharat Biotech

सीरम सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई कोरोना वैक्सीन का नाम कोविशील्ड है। यह वैक्सीन ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका, अमेरिका के सहयोग के बनाई जा रही है। भारत बायोटेक- Bharat Biotech द्वारा बनाई जाने वाली वैक्सीन का नाम कोवैक्सीन है। कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी वैक्सीन है।

भारत में व्यापार पर कोरोना का क्या असर पड़ा है?

कोरोना वायरस से प्रभावित दुनिया की 15 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत भी है। चीन में उत्पादन में आई। उस कमी का असर भारत से व्यापार पर भी पड़ा है और इससे भारत की अर्थव्यवस्था को क़रीब 34.8 करोड़ डॉलर तक का नुक़सान उठाना पड़ सकता है।

यूरोप के आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी ओईसीडी ने भी 2020-21 में भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की गति का पूर्वानुमान 1.1 प्रतिशत घटा दिया है।

ओईसीडी ने पहले अनुमान लगाया था कि भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.2 प्रतिशत रहेगी लेकिन अब उसने इसे कम करके 5.1 प्रतिशत कर दिया है।

भारत में इन सेक्टरों पर कोरोना का असर पड़ा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा जनता कर्फ्यू की अपील के बाद भारत का व्यापार आंशिक रुप से ठप हो चुका है। हालांकि प्रथम लॉकडाउन के प्रकोप को देखते हुए लॉक डाउन नहीं लगा है, जनता कर्फ्यू ही लगा। जिसके चलते भारत के कई बिजनेस पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा है। आइये जानते हैं, कि किन सेक्टर पर कोरोना का असर सबसे अधिक हुआ है।

ट्रेवेल सेक्टर

भारत में अब कई पर्यटन वाली जगहों को बंद कर दिया गया है। ऐसे में ट्रेवेल एजेंसी चलाने वालों की कमर टूट रही हैं, क्योंकि भारी संख्या में पहले से बुक टिकट कैंसिल हो रहा है।

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ट्रेवेल रएजेंसी चलाने वाले नगीना कहते हैं कि “कोरोना के चलते अब तो बिजनेस का दैनिक खर्चा निकालना भी मुश्किल लग रहा है। ऐसे कहीं बिजनेस बंद न करना पड़े, यह बड़ी चुनौती है”।

मेडिकल मार्केट

ये केवल फार्मा कंपनियों की आमदनी का मामला नहीं है। किसी भी बुरे प्रभाव की एक मानवीय क़ीमत भी होती है। मेडिकल स्टोर में दवाओं की कमी हो रही है। तमाम बड़े शहरों में केमिस्ट, सैनिटाइज़र और मास्क के ऑर्डर तो दे रहे हैं लेकिन उन्हें एक हफ़्ते से माल की डिलिवरी नहीं मिल पा रही है।

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अब जब बहुत से भारतीय अपने यहां दवाएं, सैनिटाइज़र और मास्क जमा कर रहे हैं, तो ये सामान अधिकतम खुदरा मूल्य से भी अधिक दाम पर बिक रहे हैं। इसके अतिरिक्त ऑक्सीजन की मांग बहुत बढ़ गई है, लेकिन सप्लाई नहीं हो पा रहा है।

कपड़ा उद्योग पर कोरोना का पड़ा है प्रभाव

चीन के साथ काम करने वाले कारोबारियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि  हमारे देश में परिधान (कपड़ा) निर्यात का लगभग 30% ऑर्डर यूरोप से आते हैं।

अब जब कोरोना वायरस महामारी घोषित हो गई है और यूरोपीय देशों से माल माल और माल सप्लाई करना बंद कर दिया गया  है।

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इसके आलावा भारत में सार्वजनिक जगह जैसे शॉपिंग माल इत्यादि रात्रि में बंद करने का आदेश हो गया है, तो इसका सीधा असर परिधान (कपड़ा) उद्योग पर पड़ा है।

इलेक्ट्रानिक्स मार्केट

कोरोना वायरस से इलेक्ट्रानिक मार्केट को गहरा घक्का लगा है। चूंकि इलेक्ट्रानिक का अधिकतर प्रोडक्ट चीन से बनकर आता है। चीन में कोरोना महामारी विकराल रुप धारण किया है। ऐसे में लोग अब इलेक्ट्रानिक का प्रोडक्ट खरीदने से पीछे हटने लगे हैं।

लोगों के दिमाग में यह बात घर कर गई है कि इलेक्ट्रानिक का माल चीन से बनकर आया है, तो इसे छूने से कोरोना संक्रमण होने का खतरा बढ़ेगा।

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गांधी विहार, दिल्ली में इलेक्रनिक्स सामान बेचने वाले मनोहर बताते हैं कि, उन्होंने पिछले दिनों 5 लाख तक माल मंगा लिया। अब लोग न तो मार्केट में आ रहे हैं और न ही प्रोडक्ट बिकने रहा है।

व्यवसायी को क्या करना चाहिए

सरकार की तरफ से अभी जो भी संवाद किया जा रहा है, उसमे यही कहा जा रहा है कि लॉकडाउन नहीं लगेगा। यानी सरकार अपनी तरफ से हरसंभव प्रयास कर रही है। हम ऐसी उम्मीद कर रहे हैं की स्थिति जल्दी सामान्य होगी।

ऐसे में अगर किसी कारोबारी ने माल का स्टाक मंगा लिया है, जिसके चलते कारोबारी की पूंजी फंस गई है। या बिजनेस की सभी बुकिंग कैंसिल हो जाने के कारण बिजनेस का दैनिक खर्च मैनेज करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, तो कारोबारी के लिए बिजनेस लोन लेकर बिजनेस को सस्टेन करना सबसे सही तरीका हो सकता है।

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बिजनेस लोन के जरिये कारोबारी अपने बिजनेस का दैनिक खर्च मैनेज कर सकते हैं। और जब, स्थिति समान्य हो और माल बिकना शुरु हो जाए तो बिजनेस लोन को किश्तों में वापस कर सकते हैं।

आपको जानकारी के लिए बता दूं कि एनबीएफसी कंपनी ZipLoan द्वारा कारोबारियों को 7.5 लाख तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखे, न्यूनतम कागजातों पर, सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है। बिजनेस लोन लेने के लिए अभी अप्लाई करें।

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