देश के लाखों-करोड़ों छोटे कारोबारियों के लिए GST के लिए नया और बेहद कीमती सेदेश आया है। जिसे छोटे उद्यमियों और व्यापारियों को पूरे ध्यान से सुनना चाहिए, नहीं तो  परेशानी हो सकती है। सरकार छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को बड़ा झटका देने जा रही है। सरकार छोटा बिजनेस रखने और छोटा कारोबार करने के लिए ज्यादा सुविधाओं के हक में नहीं है।

यह भी पढ़ें:- स्टील उद्योग के आने वाले हैं अच्छे दिन, मांग में तेजी से वृद्धि होने के आसार: रिपोर्ट

यह है सरकार की मान्यता-

GST में हो रहे बदलावों से आप भले ही सहमत ना हों, लेकिन GST लगा रही सरकार का मानना है कि-

  1. लघु, अनौपचारिक, असंगठित कारोबारों में टैक्स चोरी होती है। छोटे रहना टैक्स चोरी को सुविधाजनक बनाता है।
  2. छोटी इकाइयों से टैक्स कम मिलता है और उसे जुटाने की लागत बहुत ज्यादा है।
  3. छोटे कारोबारियों को टैक्स के अलावा सस्ते कर्ज जैसी कई तरह की रियायतें मिलती हैं जिनकी लागत बड़ी है।

इसलिए GST ने देश के करीब 15 करोड़ छोटे उद्योगों और कारोबारियों को एक झटके में बड़े उद्योगों के बराबर खड़ा कर दिया है। GST चर्चा से पहले, कुछ तथ्यों पर निगाह डाल लेना बेहतर होगा।

GST

यह भी पढ़ें:- GST Registration कैसे और कहां करें? जानिए

रिसर्च में ये हैं आंकड़ें-

एडेलवाइस रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लगभग 17 उद्योग, सेवाएं या कारोबार ऐसे हैं। 30 फीसदी से लेकर 90 फीसदी तक असंगठित क्षेत्र में हैं। खुदरा (रिटेल), यार्न व फैब्रिक और परिधान में 90 से 70% उत्पाद या व्यापार असंगठित क्षेत्र में है। डेयरी, ज्वेलरी, प्लाइवुड, एयर कूलर, डाइज पिगमेंट्स, सैनिटरीवेयर, फुटवियर और पैथोलॉजी सेवा का 50 से 70 फीसदी और लाइटिंग, पंप्स, बैटरीज में करीब 30 फीसदी उत्पादन छोटी इकाइयों में होता है। 

GST के अंतर्गत कौन हैं छोटे व्यापारी-

  • जीएसटी के तहत अगर कोई रजिस्टर्ड इकाई, गैर रजिस्टर्ड इकाई से सामान लेती है तो उसका टैक्स और रिटर्न रजिस्टर्ड इकाई ही भरेगी।
  • जीएसटी से पहले लागू व्यवस्था के तहत 1.5 करोड़ रु. तक के सालाना कारोबार वाली उत्पादन इकाइयां एक्साइज ड्यूटी से बाहर थीं। जबकि 10 लाख रु. के सालाना कारोबार पर सर्विस टैक्स से छूट थी।
  • GST के तहत केवल 20 लाख रु. तक सालाना कारोबार करने वाली सेवा और उत्पादन इकाइयों को रजिस्ट्रेशन और रिटर्न से छूट मिलेगी।
  • 75 लाख रु. तक कारोबार करने वाले कंपोजिशन स्कीम का हिस्सा बन सकते हैं, इसके तहत निर्माताओं, व्यापारियों और रेस्तरांवालों को रियायती दर पर टैक्स देना होगा। तिमाही और सालाना रिटर्न भरने होंगे।

 

यह भी पढ़ें:- FSSAI क्‍या है और क्या है इसके लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन के लिए फीस स्ट्रक्चर?

ये हो सकता है समाधान-

छोटे कारोबारी अपने बिजनेस का विस्तार करके छोटे कारोबारी की श्रेणी से बाहर निकल सकते हैं। इसके लिए वे बिजनेस लोन लेकर अपने बिजनेस का विस्तार कर सकते हैं। बिजनेस लोन के लिए आप ZipLoan की वेबसाइट या फिर मोबाइल ऐप पर आवेदन कर सकते हैं। ZipLoan से आप अफने छोटे बिजनेस पर 1 से 5 लाख तक का बिजनेस लोन बिना किसी सिक्योरिटी के प्राप्त कर सकते हैं।