ऐसा कोई दिन नहीं जाता है जब हम COVID-19 महामारी के बारे में बात नहीं करते हैं। यह खबरों में है, हमारे सोशल फीड्स में है और इसने हमारी व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों दुनिया में घुसपैठ की है। कई व्यवसायों ने कर्मचारियों को घर से काम करने की दिनचर्या में स्थानांतरित कर दिया है। लेकिन यह सुविधा सिर्फ कार्पोरेट के पास है। एमएसएमी इससे वंचित है। यह भी कह सकते हैं कि एमएसएमई सेक्टर में घर से कार्य करने का कोई तरीका भी नहीं है।

एमएसएमई को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसी के साथ सीमित संसाधनों से भी जूझना पड़ रहा है। पिछले एक साल में दुकानें गायब हो गई हैं। छोटे बिजनेस अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं। यह एक कठिन समय है। इस कठिन समय में भी बहुत से एमएसएमई चल रहे हैं और लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। आइये इस आर्टिकल में बताते हैं कि छोटे बिजनेस में आने वाली प्रमुख दिक्कतें क्या हैं।

वर्किंग कैपिटल मैनेज करने में समस्या

बड़ी कंपनियों के पास सालाना बजट होता है। जिसमें वह वार्षिक खर्च करने के लिए धन का इंतजाम कर लेती हैं। लेकिन, असल समस्या एमएसएमई बिजनेस के साथ आ रही है। क्योंकि एमएसएमई का संचालन करने में वर्किंग कैपिटल यानी बिजनेस चलाने के लिए धन की कमी हो रही है। इसके पीछे पर्याप्त बिक्री न होना और समय पर भुगतान न मिलना है। इसका उपाय यह है कि बिजनेस लोन के तौर पर वर्किंग कैपिटल ले लिया जा सकता है।

अभी बिजनेस लोन पाए

वर्तमान में कई बैंक और एनबीएफसी आसानी के साथ वर्किंग कैपिटल मुहैया करा रहे हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan से एमएसएमई को 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिनों* में मिलता है।

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कैश-फ्लो मेंटेन रखने की दिक्कत

यह ऐसा समय है जिसमें माल की सप्लाई तो चली जा रही है लेकिन पेमेंट कब मिलेगा, यह तय नहीं हो पा रहा है। जिससे बिजनेस का कैश – फ्लो गड़बड़ हो रहा है। मजबूत कैश – फ्लो होने से आपका व्यवसाय चालू रह सकता है। यह इतना महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इसका कैश –फ्लो का नियमित होना अनिवार्य होता है। कैश – फ्लो ठीक रखने का विकल्प बिजनेस लोन है।

बिजनेस प्लानिंग करने में समस्या

COVID-19, संभव को असंभव बना दे रहा है। इसलिए कुछ भी तय नहीं किया जा सकता है। यह जाने बिना कि यह कब तक और किस हद तक रहेगा, मार्केटिंग प्लान योजना बनाना, स्टाफिंग की जरूरतों का आकलन करना, या सिर्फ यह जानना लगभग असंभव है कि हमारे ग्राहकों और ग्राहकों को क्या चाहिए।

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कोरोना काल में बिजनेस प्लानिंग किसी भी एंगल से संभव नहीं हो पा रही है। जिसके वजह से बिजनेस का भविष्य भी अंधकारमय होने का खतरा बना रहता है। कारोबारी कोई माल इसलिए नहीं मंगाते कि पता नहीं कल क्या आदेश आ जाय। या कब पूर्ण लॉकडाउन हो जाय।

कार्य संतुलन बिगड़ जाना

कार्य-जीवन-संतुलन कठिन हो गया है। कोरोना महामारी से पहले, हम क्लॉक इन और क्लॉक आउट कर सकते थे। कारोबारी और कर्मचारी अपने काम से संबंधित सभी समस्याओं को बिजनेस पर छोड़ देते थे। अब यह चीज बदल गई है। कारोबारी कब घर कार्य कर रहा और कब बिजनेस का कार्य कर रहा है, पता ही नहीं चलता।

खर्च बढ़ गया है

यह समय ऐसा है कि इसमे एक रुपये का सामान मंगवाने के लिए दो रुपये खर्च करना पड़ सकता है। क्योंकि सार्वजनिक परिवहन बंद है। सामान्य दिनों में माल की सप्लाई आसान थी। लेकिन कोरोना के चलते माल की सप्लाई करना और माल मंगवाना दोनों महंगा हो और चुनोतीपूर्ण हो गया है। इन दोनो की कास्ट बढ़ गई है।

उत्पादन में गिरावट

एमएसएमई सेगमेंट के मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स का उत्पादन गिर गया है। उत्पादन पर कोरोना की मार दोहरी पड़ी है। को कर्मचारी उत्पादन यूनिट्स में काम करते थे, वह अधिकतर दुसरे प्रदेश के होते थे। महामारी के चलते वह अपने – अपने गृह नगर में चले गये हैं। इस कारण एमएसएमई मालिक चाहते हुए भी प्रोडक्शन नहीं शुरु कर पा रहे हैं। इसी के साथ उत्पादन गिरने का एक बड़ा कारण कच्चा माल न मिलना भी है। कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है।

ऑर्डर न मिलना या ऑर्डर कैंसिल होना

ऑर्डर न मिलने की समस्या और कैंसिल होने की परेशानी का सामना सबसे अधिक सर्विस सेक्टर कर रहा है। होटल उद्योग से लेकर कैटरिंग बिजनेस तक सब कुछ बंद है। जिसके कारण ऑर्डर नहीं आ रहा है। और जो पहले का ऑर्डर था, वह अब कैंसिल हो रहा है। सर्विस सेक्टर के व्यापारी पर यह दोहरी मार है।

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