भारत की स्वतंत्रा प्राप्ति के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ऐसी पहली सरकार है जो कारोबारियों के लिए ऐसे फैसले ले रही है जिससे कारोबारियों के लिए चीजें बेहतर हुई हैं।

बात चाहें प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना लाने की हो या एक देश – एक कर यानी जीएसटी व्यवस्था लागू करने की हो, सभी फैसलों में मोदी सरकार ने यह दिखाया है कि सरकार कारोबारियों के हितों के लिए किसी प्रकार का कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों से मोदी सरकार के ऊपर इस बात का आरोप लग रहा था की मोदी सरकार में बेरोजगारी बढ़ी है। लोगों को नौकरियां नहीं मिल रही है। यह सच है। लेकिन, हमें यह सोचना होगा कि एक सौ तीस करोड़ जनसँख्या वाले देश में सभी को नौकरी उपलब्ध करा पाना संभव नहीं है।

ऐसे में नौकरी की अल्टरनेट व्यवस्था करना ही रोजगार उपलब्ध कराने का जरिया बन सकता है। नौकरी की अल्टरनेट विकल्प है स्वरोजगार है। स्वरोजगार एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति खुद तो रोजगार प्राप्त करता ही है साथ में और भी लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद करता है।

केन्द्र सरकार का इस बात का जोर है कि देश में अधिक से अधिक उद्योग स्थापित हो जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो सके। जब देश में अधिक रोजगार होगा तो लोगो के हाथ में पैसा होगा, जब लोगों के हाथ में पैसा होगा तो लोग पैसे खर्च करेंगे।

जब लोग पैसे खर्च करेंगे तो वह पैसा मार्केट में जायेगा जिससे मार्केट की स्थिति बेहतर होगी। जब मार्केट की स्थिति बेहतर होगी तो देश की जीडीपी ग्रोथ बढ़ेगी। इस तरह पूरे एक फोलो में देश का विकास होगा।

इस पूरे क्रम से चलाने के लिए जरूरी है उद्योग – धंधे होना। उद्योग – धंधे और बिजनेस होने के लिए धन की जरूरत होती है। मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना चलाई जा रही है।

मुद्रा योजना के जरिये कारोबार करने की चाहत रखने वाले लोगों 10 लाख रुपये तक का बिजनेस बिना कुछ गिरवी रखे दिया जाता है।

मुद्रा लोन उन कारोबारियों को भी दिया जाता है जिनका पहले से कोई बिजनेस होता है और वह अपना बिजनेस बढ़ाने की चाहत रखते हैं तो भी उन्हें मुद्रा लोन योजना के तहत उन्हें 10 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन मिल सकता है।

मोदी सरकार द्वारा ऐसे ही कई फैसलें लिए गये हैं जिनमें कारोबारियों को सीधा लाख मिलता है। आइये जानते हैं कि मोदी सरकार द्वारा कारोबारियों के लिए कौन – कौन से सकारत्मक कदम उठाए गये हैं।

एक देश – एक कर: जीएसटी व्यवस्था

कारोबारियों को 1 जुलाई 2017 से पहले कुल 37 तरह का टैक्स अलग – अलग तरीके से भरना होता था। इसमें अधिक पैसों के साथ अधिक समय भी लगता था।

इसके साथ ही सभी राज्यों में एक वस्तु का मूल्य अलग – अलग होता था। इससे कारोबारियों के साथ ही ग्राहकों को भी परेशानी होती थी।

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा भारत में 1 जुलाई 2017 को गुड्स एंड सर्विसिज़ टैक्स या वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST –  Goods and Services Tax) लागू किया। जीएसटी लागू होने के साथ ही सभी टैक्स मर्ज होकर एक टैक्स बन गया जिसका नाम जीएसटी रखा गया।

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जहां पहले कारोबारियों को कई स्तर पर कई तरह का टैक्स भरना होता था वहीं जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद सिर्फ एक टैक्स जीएसटी रह गया। इससे कारोबारियों को तो फायदा हुआ ही इसके साथ ही ग्राहकों को भी लाभ मिला।

जीएसटी से पहले वस्तुओं पर राज्यों के अनुसार और उनके नियमों के अनुसार टैक्स लगता था जिससे एक ही वस्तु अलग – अलग राज्यों में अलग – अलग मूल्य पर बिकती थी। जीएसटी व्यवस्था में एक वस्तु पर पूरे देश में एक टैक्स लागू हुआ। इससे कीमतों में समानता हुई। जीएसटी व्यवस्था स्वतंत्रा प्राप्ति के बाद सबसे बड़ा आर्थिक सुधार कहा गया।

प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना

उद्योग चलाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। कभी – अभी ऐसा भी होता है कि कारोबारियों का पैसा मार्केट में लगा होता है। ऐसे में कारोबारी के पास पैसा होते हुए भी उनके पास पैसा नहीं होता है। लेकिन स्थिति कोई भी हो, बिजनेस तो बंद नहीं किया जा सकता है।

कारोबारी बिजनेस चलाने के लिए सूद पर पैसों का इंतजाम करते हैं। कभी – कभी सूद का पैसा ही इतना अधिक हो जाता है कि कारोबारी के लिए सूद की ब्याज दर ही चुकाने में बहुत अधिक पैसा चला जाता है।

अभी बिजनेस लोन पाए

कभी ऐसा भी होता है कि कोई व्यक्ति बिजनेस तो शुरु करना चाहते हैं लेकिन पैसों का इंतजाम न होने के चलते बिजनेस शुरु नहीं कर पाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को अगर बिजनेस लोन की सहायता मिल जाये तो उसके लिए कारोबार करना काफी आसान हो सकता है।

नरेंद्र मोदी जब 2014 में प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने कारोबारियों की इस समस्या का समाधान करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना लाँच किया। मुद्रा लोन योजना के तहत कारोबारियों को और नया कारोबार शुरु करने की चाहत रखने वाले व्यक्तियों को 10 लाख तक का बिजनेस लोन बिना कुछ गिरवी रखे मिलता है।

बजट 2020 में कारोबारियों के लिए उठाए गये कदम

अभी वित्त मंत्री मंत्री निर्मला सीतारमण जी द्वारा बजट 2020 पेश किया गया है। इस बजट में कारोबारियों के लिए बहुत से सकारत्मक निर्णय किया गया है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि कारोबारियों की संपत्ति सृजित करने वालों को मोदी सरकार हर तरह से मदद करेगी।

इसके साथ ही वित्त मंत्री निर्मला ने कॉर्पोरेट टैक्स को 30 से घटाकर 25 फीसदी तक लाने के वादे को फिर दोहराया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 400 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना कारोबार वाली कंपनियों के लिए कारपोरेट कर की दर धीरे-धीरे घटाकर 25 फीसदी की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि संपत्ति सृजित करने वालों को सरकार हर प्रकार की मदद देगी। सीतारमण ने पिछले महीने साल 2019-20 के अपने पहले बजट में 400 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर को 30 से घटाकर 25 फीसदी कर दिया था।

ऐसा नहीं है कि कार्पोरेट के लिए टैक्स घटाने के लिए यह पहली बार प्रयास हो रहा है। पिछले साल तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 250 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर को घटाकर 25 फीसदी किया था।

उद्योग से जुड़े एक कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा कि बची हुई कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स की दर को धीरे-धीरे कम किया जाएगा। हालांकि उन्होंने कटौती की समयसीमा के बारे में कुछ नहीं कहा।

देश में मंदी के माहौल के बीच सरकार का यह रुख अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि आर्थिक सुस्ती के लिए जीएसटी समेत मोदी सरकार के कई कड़े फैसलों को भी अहम वजह माना जा रहा है, ऐसे में सरकार ने कारोबारियों के हितों की रक्षा की बात कर अहम संदेश दिया है।

देश में कॉर्पोरेट टैक्स को अंतर्राष्ट्रीय पैमाने के हिसाब से बनाने के लिए पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे धीरे-धीरे कम करने की वकालत की थी। निर्मला ने कहा, “कारोबार के आकार के हिसाब से अब देश की सिर्फ 0.7 फीसदी कंपनियां ही इस दायरे से बाहर रह गयी हैं। हम धीरे-धीरे उनके लिए भी टैक्स की दरें कम करेंगे।”