किसी भी बिजनेस का सफलतापूर्वक चलाने के लिए आवश्यक धन की जरुरत होती है। बिजनेस के लिए जरुरी धन की आवश्यकता बिजनेस लोन के जरिए पूरी होती है। देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan से बिजनेस का विस्तार करने के लिए 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, सिर्फ 3 दिनो* में मिलता है।

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व्यापार की योजना (बिजनेस प्लान) कैसे तैयार करें?

भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में व्यापार करना स्वरोजगार का शानदार विकल्प होता है। भारत सरकार द्वारा यह प्रयास किया जा रहा है कि लोन अधिक से अधिक संख्या में खुद का व्यापार करें।

इसके लिए सरकार द्वारा एमएसएमई बिजनेस की कार्यनीति में व्यापक बदलाव किया किया गया है। अब एमएसएमई सेगमेंट का कारोबार शुरु करना बहुत आसान हो गया है। क्योंकि अधिकतर चीजों को ऑनलाइन कर दिया गया है।

हालांकि किसी व्यापार को ऐसे ही नहीं शुरु किया जा सकता है। बिजनेस शुरु करने के लिए सबसे पहले व्यापार की योजना बनाई जाती है। किसी भी बिजनेस का योजना (बिजनेस प्लान) बनाते समय यह इन 5 बातों पर निर्णय करना अनिवार्य होता है।

  1. बिजनेस किस प्रकृति का होगा?
  2. किस चीज का व्यापार होगा?
  3. बिजनेस के लिए पर्याप्त संसाधन कहां से आयेगा?
  4. व्यापार की मार्केटिंग रणनिति क्या होगी?
  5. बिजनेस का राजस्व (Revenue) मॉडल क्या होगा?

बिजनेस प्लान 1: बिजनेस किस प्रकृति का होगा?

बिजनेस की योजना (बिजनेस प्लान) बनाते समय सबसे पहले यह तय किया जाता है कि बिजनेस की प्रकृति क्या होगी। बिजनेस की प्रकृति के हिसाब से ही बिजनेस का ढ़ाचा तैयार किया जाता है। बिजनेस 3 प्रकार का होता है।

  1. एकल स्वामित्व
  2. भागीदारी में बिजनेस
  3. सीमित दायित्व वाला व्यापार
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एकल स्वामित्व (सोल प्रोप्रीएटर) का बिजनेस

एकल स्वामित्व (सोल प्रोप्रीएटर) में एक ही व्यक्ति बिजनेस का सर्वे-सर्वा होता है। जो कारोबार एक व्यक्ति द्वारा चलाया जाता है उसे एकल स्वामित्व सोल प्रोप्रीएटर) वाला बिजनेस कहा जाता है। इस बिजनेस में मालिक और व्यापार में कोई कानूनी अंतर नहीं होता है। मतलब मालिक जो कहे, वही कानून होता है।

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इस तरह के बिजनेस में होना वाला लाभ और किसी प्रकार का नुकसान या लोन इत्यादि सभी के प्रति कारोबारी खुद जिम्मेदार होता है। एकल स्वामित्व वाले बिजनेस का प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैः

  1. छोटे स्तर पर व्यापार शुरू करना आसान होता है।
  2. कम धन में भी बिजनेस शुरु हो सकता है।
  3. अपने स्वयं के दिशा निदेशों पर इच्छानुसार बिजनेस चला सकते हैं।
  4. टैक्स बेनिफिट्स होता है।
  5. इसमें सरकारी स्तर पर कोई हस्तक्षेप नहीं होता है।

भागीदारी में होना वाला बिजनेस

जिस बिजनेस को दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर बिजनेस मैनेजमेंच तथा संचालन करते हैं तथा समान रूप से व्यापारिक लाभों एवं लोन के लिए उत्तरदायी होते है, उस बिजनेस को भागीगारी में होने वाला बिजनेस कहा जाता है। भागीदारी में होने वाले बिजनेस का प्रमुख लाभ हैः

  1. दो या दो से अधिक पार्टनर होने की वजह से बिजनेस में अधिक धन इक्कठा होता है।
  2. सभी भागीदार समान रूप से लाभ-हानि बांटते हैं।
  3. किसी भी भागीदार सदस्य की पूंजी पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है।
  4. सभी भागीदारों को समान वेतन मिलता है।
  5. बिजनेस का संचालन करने में सभी भागीदारों को समान तरजीह मिलती है।

सीमित दायित्व वाला व्यापार

सीमित दायित्व वाली कम्पनी में जितनी पूँजी शेयर के माध्यम से निवेशित की जाती है दायित्व केवल उस सीमा तक ही सीमित होते हैं। इसे इस तरह समझे कि किसी बिजनेस को शुरु करने में 100 करोड़ रुपये लगता है। तो कोई कारोबारी 10 करोड़ रुपया निवेश करता है तो वह उस बिजनेस में 10 प्रतिशत का मालिक होता है।

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शेयर धारकों की जवाबदारी जारी की गई शेयर कैपीटल की दत्त अथवा अदत्त राशि तक ही सीमित होती है। बिजनेस का अस्तित्व असीमित काल के लिये हो सकता है और इसमें शेयरधारकों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होती। सीमित दायित्व वाले व्यापार का लाभ निम्नलिखित हैः

  1. बिजनेस के किसी भाग को बेचना आसान होता है।
  2. इन कारोबार की साख व प्रतिष्ठा बहुत अधिक होती है।
  3. सदस्यों, संचालक व शेयर धारकद्ध की वित्तीय देनदारी केवल उतनी ही रकम तक सीमित होती है जितनी उन्होंने शेयर के लिये दी हो।
  4. प्रबंधन का ढांचा बिल्कुल स्पष्ट होता है जिससे नियुक्तियों, सेवानिवृत्ति या संचालकों को हटाने की प्रक्रिया सरल व नियमानुसार हो जाती है।
  5. यदि अतिरिक्त पूँजी की आवश्यकता हो तो इसकी पूर्ति निजी रूप से और अधिक शेयर बेचकर की जा सकती है।
  6. अधिक सदस्यों को शामिल करना आसान होता है।

बिजनेस प्लान 2: किस चीज का व्यापार होगा?

बिजनेस की प्रकृति को तय होने के बाद बिजनेस किस चीज का होगा? यह तय करना महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि बिजनेस का प्रोडक्ट ही यह तय करता है कि बिजनेस का ग्राहक कौन होगा और बिजनेस का मुनाफा कैसे प्राप्त किया जा सकता है। बिजनेस का प्रोडक्ट तय करने के दौरान यह 5 महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरुरी होता हैः

  1. बिजनेस का एरिया क्या है?
  2. कारोबार का सेगमेंट क्या है?
  3. उस एरिया में लोगों की जरुरतें क्या हैं?
  4. बिजनेस के स्थान तक पहुंचने की व्यवस्था है या नहीं?
  5. बिजनेस प्रोडक्ट की आसानी से पहुंच में है या नहीं है?

बिजनेस प्लान 3: बिजनेस के लिए पर्याप्त संसाधन कहां से आयेगा?

भले ही बिजनेस का आइडिया बहुत शानदार हो, लेकिन उस बिजनेस आइडिया को जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त धन नहीं होगा, तो बिजनेस का वह बिजनेस आइडिया सिर्फ एक कोरा आइडिया बनकर ही रह जाता है।

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बिजनेस आइडिया को धरातल पर उतारने के लिए पर्याप्त धन का होना आवश्यक होता है। यह भले हो सकता है कि कम धन के साथ बिजनेस शुरु कर सकते हैं और समय आने पर बिजनेस लोन लेकर बिजनेस का विस्तार किया जा सकता है।

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बिजनेस प्लान 4: व्यापार की मार्केटिंग रणनीति क्या होगी?

एक पॉपुलर मार्केंटिंग गुरु ने कहा है कि बिना प्रचार के बिजनेस करना ठीक वैसे ही है, जैसे किसी अंधेरे कोठरी में किसी खूबसूरत लड़की को आंख मारना होता है। कहने का अर्थ है कि चलता वही है जो दिखता है।

व्यापार में मार्केटिंग की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए बिजनेस प्लान बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कारोबार की मार्केटिंग रणनीति अच्छी होनी चाहिए।

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मार्केटिंग रणनीति के तहत डिजिटल और पोस्टर, बैनर के जरिए बिजनेस का प्रचार किया जा सकता है। मार्केटिंग से सबसे बड़ा फायदा होता है कि बिजनेस का मुनाफा बढ़ने के साथ कारोबार का विस्तार होता है।

बिजनेस प्लान 5: बिजनेस का राजस्व (Revenue) मॉडल क्या होगा?

व्यापार की योजना बेहतरीन बना लिया। बिजनेस प्लान को धरातल पर भी उतार दिया लेकिन यह तय नहीं कर पाये कि बिजनेस का मुनाफा कहं से आयेगा और बिजनेस को चलाने के लिए रेगूलर पैसा कैसे आएगा। इस बात का उत्तर मिलेगा कि बिजनेस का राजस्व मॉडल क्या होगा।

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बिजनेस प्लान बनाते समय इस बात पर खास ध्यान देने की जरुरत होती है कि किस – किस चीज पर ग्राहकों से पैसा प्राप्त किया जा सकता है। यह प्रोडक्ट पर मार्जिन को जोड़कर भी राजस्व मॉडल बनाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त भी अन्य तरीका भी हो सकता है बिजनेस का राजस्व मॉडल। बिजनेस का राजस्व मॉडल तय करना मुख्य रुप से कारोबारी के ऊपर निर्भर करता है

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