एक पुरानी कहावत है  ‘जितनी बड़ी चादर हो उतना ही पैर पसारें’ अगर बिजनेस में इस वाक्य के बारे में समझें तो कह सकते हैं कि “जितना कमाएं उतना ही खर्च करें ”. साधारण सी बात है कि फायदे में रहने के लिए ऊपरी खर्च या ओवरहेट एक्सपेंस करने से बचना चाहिए. बिजनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार भी बिजनेस में हिट होने के लिए यह एक सक्सेस मंत्र है. आइए इसे साधारण तरीके से समझें.

लाभ= आय-व्यय. 

लाभ कमाने का सबसे अच्छा तरीका है-

  • अपनी आय को बढ़ाएं
  • खर्च कम करें

खर्च –

अगर आप बिजनेस में है तो बेशक खर्च होना अनिवार्य है. खर्च दो प्रकार के होते हैं, स्थाई खर्च और अस्थाई खर्च. स्थाई खर्च को कम करना थोड़ा मुश्किल होता है. इसलिए अगर आप फायदे में रहना चाहते हैं तो आपको अपने अस्थाई खर्च पर थोड़ा लगाम लगाना होगा. बिजनेस और अकाउंटिंग के टर्म में इसी अस्थाई खर्च को जरूरत से ज्यादा खर्च या ओवरहेड एक्सपेंस का नाम दिया गया है.

 ऊपरी खर्च

Overhead expenses

Source: Market Business News

ऊपरी खर्च से बचने के लिए आपको पहले उसके कॉनसेप्ट को समझना होगा. बहुत ही सरल शब्दों में, ऊपरी खर्च हर उद्योग के साथ अलग-अलग होता है. इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं. फर्नीचर उद्योग के लिए, लकड़ी और अन्य सामान जैसे स्क्रू, नट्स और बोल्ट्स और रॉ मटीरियल में आसानी से निवेश कर सकता है, जबकि खुदरा किराने की दुकान के लिए, एक ही फर्नीचर एक बन जाता है.

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लेकिन यहां कुछ ऐसे भी बिजनेस हैं जिनके लिए ऊपरी खर्च लगभग बराबर है. यहां हम ऊपरी खर्च के बारे में समझेंगे और साथ ही इसे कैसे कम कर सकते हैं उसके बारे में भी चर्चा करेंगे.

एक बात तो स्पष्ट है कि ऊपरी खर्च आपकी वार्षिक आय से कहीं ज्यादा बड़ी होती है. आपका बिजनेस चाहे फायदे में हो या घाटे में आपको इसे बढ़ाने के लिए पैसे लगाने ही पड़ते हैं. इसलिए आप अपने ऊपरी खर्च को कम करके काफी हद तक फायदे में रह सकते हैं.

 ऊपरी खर्च की सुचि- 

इस सुचि से आपको स्पेष्ट हो जाएगा कि ऊपरी खर्च कहां-कहां होता है और इसे कम किन किन तरीकों से कर सकते हैं.

रेंट – प्रत्येक व्यवसाय को काम करने के लिए एक अच्छे परिसर की आवश्यकता होती है. यदि आप किराए पर घर लेते हैं तो आपको रेंट देना ही पड़ता है. घर की खरीद के मामले में, आपको बंधक लागत का सामना करना पड़ सकता है. ऊपरी खर्चों की लिस्ट में रेंट सबसे साधारण है. आप इस खर्च को थोड़े कम महंगे परिसर में स्थानांतरित करके या इसे घर-आधारित व्यवसाय में रूपांतरित करके कर सकते हैं.

 यूटीलिटी- कुछ ओवरहेड खर्च ऐसे भी हैं जिनके बिना आप बिजनेस नहीं कर सकते. ऐसे ऊपरी खर्च उदाहरण गैस, बिजली, पानी, टेलीफोन, इंटरनेट जैसी जरूरतमंद चीजे हैं. ये खर्च अनिवार्य हैं. लेकिन, आप निश्चित रूप से उन्हें कम करने के लिए कदम उठा सकते हैं. कम ऊर्जा का उपभोग करने वाले उपकरणों का उपयोग करें. सौर ऊर्जा में निवेश करना एक बार का एक खर्च है. इससे आप बहुत सारी ऊर्जा की बचत कर सकते हैं. इसी तरह, मोबाइल और इंटरनेट सुविधाओं के लिए कम लागत वाली योजनाएं अपनाने से आप काफी रकम बचा सकते हैं.

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 इंटरेस्ट-  साधारण तौर पर सभी प्रकार के बिजनेस, अपने कार्यशील पूंजी और अचल संपत्तियों के लिए बैंक लोन पर निर्भर रहते हैं. SME के जरिए इन ऊपरी खर्च को कम करने के लिए मुनाफे का एक हिस्सा आप अपने बिजनेस में निवेश कर सकते हैं. इससे आप ब्याज घटक में भी बचत कर सकते हैं.

इंश्योरेंस (बीमा) – इंश्योरेंस, बिजनेस के साथ-साथ विनिर्माण क्षेत्र में होने वाले एक प्रमुख खर्च है. आप बीमा से बच नहीं सकते क्योंकि यह रिस्क कम करने वाला कारक है. हालांकि, आप इंटरनेट पर रिसर्च कर और योजनाओं को चुनने के साथ अपनी बीमा आवश्यकताओं की योजना भी बना सकते हैं, जो न्यूनतम प्रीमियम का भुगतान करके अधिकतम कवरेज प्रदान करते हैं.

मरम्मत और रखरखाव – विनिर्माण उद्दयोग में मशीनरी और अन्य अचल संपत्तियों के रखरखाव और मरम्मत में होने वाले खर्चे भी ऊपरी खर्च में आते हैं. आपको इस पहलू से कोई समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि यह आपके कारोबार को प्रभावित कर सकता है. लेकिन, बेहतर मशीनों में निवेश करना और नियमित रूप से रखरखाव करने से मरम्मत के खर्चों को कम करने की संभावना कम हो सकती है.

प्रशासनिक खर्चे-  प्रशासनिक खर्चों में वेतन, मजदूरी, स्टेशनरी खर्च, कंप्यूटर जैसे उपकरण आदि शामिल हैं. इस श्रेणी में ऊपरी खर्च को कम करना कठिन है क्योंकि आपको व्यवसाय को चलाने के लिए कम से कम लोगों की आवश्यकता है. इस जरूरत को आप मशीनीकरण या कम्प्यूटरीकरण में स्थानांतरित करके शारीरिक श्रम को कम कर सकते हैं. आपको एक बार पैसे खर्च करने पड़ते हैं लेकिन आप बदले में बहुत कुछ बचाते हैं. कंप्यूटर प्रिंटर स्याही और अन्य वस्तुओं जैसे कार्यालय की स्टेशन आपके ऊपरी खर्च का एक बड़ा हिस्सा है. प्रिंटर, स्टेपलर्स, पिंस और अन्य स्टेशनरी आइटम के उपयोग पर सख्त नियंत्रण करें. यह ऊपरी खर्च को कम करने का बेहतरीन तरीका है.

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 मारकेटिंग और सेल्स- किसी भी बिजनेस के लिए मारकेटिंग और विज्ञापन बेहद जरूरी है. इसके लिए आप ऑनलाइन विज्ञापन के तरीके अपना सकते हैं. टीवी, अख़बारों और अन्य मीडिया पर विज्ञापन करने से आपकी लागत ज्यादा लगती है. आपके पास स्काइप, व्हाट्सएप आदि जैसे संचार के कई अन्य तरीके हैं जो मुफ्त सेवाओं की पेशकश करते हैं. आप इन विधियों का उपयोग करके अपनी मार्केटिंग कर सकते हैं.

कर-  आईटी विभाग के स्कैनर को खत्म करने के लिए समय पर करों का भुगतान करना आवश्यक है. करों के भुगतान में देरी या अपने जीएसटी रिटर्न दाखिल करने से ब्याज और दंड जैसे अनावश्यक खर्च हो सकते हैं. अपने जीएसटी रिटर्न की गणना करते समय ठीक से अपने कर इनपुट का दावा करें, आप अपने कर भुगतानों पर बहुत बचत करेंगे.

निष्कर्ष- बिजनेस में फायदा कमाने के लिए अपनी आय ज्यादा करें और व्यय कम.

नोट-

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