नया बिजनेस शुरु करने के लिए या बिजनेस का विस्तार करने के लिए लिया जाने वाले लोन को बिज़नेस लोन कहा जाता है। बिजनेस लोन सभी सरकारी बैंको और एनबीएफसी कंपनियों से मिलता है।

बिजनेस लोन चूंकि एक फाइनेंनशियल प्रोडक्ट है, इसलिए सभी लोन की तरह बिजनेस लोन पर भी ब्याज लागू होता है। बिजनेस लोन पर जो ब्याज लागू होता है, वह सभी बैंको और फाइनेंनशियल कंपनियों का अलग – अलग होता है।

बिना कोलैटरल बिजनेस लोन्स

बिजनेस लोन पर ब्याज दर

लोन पर ब्याज दर लागू करने के लिए फानेंशियल कंपनी कुछ ग्राहक के संबंध में कुछ जांच करती हैं। यह जांच कुछ इन पहलुओं पर की जाती हैः

  1. ग्राहक का सिविल स्कोर कितना है?
  2. बिजनेस का प्रकार क्या है?
  3. बिजनेस की स्थिति कैसी है?
  4. बिजनेस का सालाना टर्नओवर कितना है?
  5. लोन किस प्रकार का है?

ग्राहक का सिविल स्कोर कितना है?

लोन मिलने के प्रोसेस में सिविल स्कोर यानी कि क्रेडिट स्कोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिविल स्कोर के ही आधार पर यह तय किया जाता है कि ग्राहक को लोन मिलेगा या नहीं मिलगा। लोन की ब्याज दर निर्धारित होने में भी सिविल स्कोर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सिविल स्कोर 3 अंको की एक संख्या है, जिसे सिविल नामक कंपनी जारी करती है। सिविल स्कोर 300 से 900 तक का होता है। आइए अब क्रेडिट स्कोर के 300 से 900 के बीच के चरण को समझते है।

  1. 800 से ऊपर सिविल स्कोर को उत्कृष्ट क्रेडिट स्कोर माना जाता है। इतने क्रेडिट स्कोर पर लोन तुरंत मिल जाता है।
  2. 700 से 800 तक का सिविल स्कोर बेहतर होता है। इतने क्रेडिट स्कोर होने पर लोन मिलने की संभावना 95 प्रतिशत होती है
  3. 500 से 700 तक का सिविल स्कोर को औसत सिबिल कहा जाता है। औसत क्रेडिट स्कोर कहने का मतलब है कि ऐसे क्रेडिट स्कोर अधिकतर लोगों के होते है। 500 से 700 के बीच क्रेडिट स्कोर होने बिजनेस लोन मिलने की संभावना 60 से 70 प्रतिशत होती है।
  4. 500 से कम क्रेडिट स्कोर होने पर यह समझा जाता है कि संबंधित व्यक्ति या संस्था लोन चुकाने के लिए सीरियस नहीं है। लोन चुकाने के प्रति गंभीर नहीं है। इसीलिए 500 से कम क्रेडिट स्कोर होने पर एनबीएफसी कंपनियां या कोई अन्य लोन देने वाली संस्था से बिजनेस लोन या किसी अन्य प्रकार का लोन नहीं दिया जाता है।

लोन की ब्याज में सिविल स्कोर की भूमिका

फाइनेंशियल सेक्टर में सिविल स्कोर को ग्राहक की साख मापने का पैमाना माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो ग्राहक लोन को चुकाने को तत्पर होता है, उसका सिविल कभी खराब नहीं होता है। इसलिए अच्छे सिविल स्कोर वाले ग्राहको को कम ब्याज दर पर लोन दे दिया जाता है।

बिजनेस का प्रकार क्या है?

बैंक या एनबीएफसी कंपनी उन्हीं बिजनेस को लोन प्रदान करना चाहते हैं, जिसको लंबी अवधि तक चलाया जाना हो। बिजनेस मुख्य तौर से दो प्रकार का होता हैः

  1. सर्विस सेक्टर का बिजनेस
  2. मैन्युफैक्चरिंग (विनिनिर्माण) सेक्टर का बिजनेस

सर्विस सेक्टर के बिजनेस को अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर बिजनेस लोन मिलता है। ऐसा माना जाता है कि सर्विस सेक्टर के बिजनेस रोजाना इनकम होती है, इसलिए लोन की किश्त आती रहेगी।

मैन्युफैक्चरिंग के बिजनेस को मार्केट रेट की ब्याज दर पर बिजनेस लोन दिया जाता है। इसके पीछे यह सोच होती है कि मैन्युफैक्चरिंग के बिजनेस में प्रोडक्शन होगा फिर प्रोडक्ट मार्केट में जाएगा फिर इनकम होगी। इसके बाद लोन की किश्त आएगी।