कई कारोबारी बिजनेस लोन लेना नहीं चाहते हैं। जिसके चलते उनके बिजनेस का विस्तार नहीं हो पाता है और ग्राहक टुटने लगते हैं। ऐसी 10 गलतियां एमएसएमई अक्सर कर देते हैं। आइये आपको बताते हैं कि MSME कारोबारियों की किस तरह की गलतियां नहीं करना चाहिए।

प्रोडक्ट पेटेंट में भारतीय एमएसएमई बहुत पीछे

आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू एंड ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के हिसाब से 90 फीसदी भारतीय सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME बिजनेस) अपने पहले ही 5 साल में खत्म हो जाते हैं।

विश्व स्तर पर प्रोडक्ट पेटेंट के लिए आवेदन की बात करें तो 2015 – 16 की एशिया की रिपोर्ट के अनुसार इंडिया ने सिर्फ 1423 पेटेंट फाइल किये। कोरिया ने 14600 पेपेंट फाइल किये।

चीन के तरफ से 29800 पेटेंट फाइल किये गये। जापान अकेले 44200 से अधिक पेटेंट फाइल करके एमएसएमई और स्टार्ट अप के मामले में एशिया के अंदर सबसे आगे खड़ा है।

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इसका मतलब यह है कि भारतीय एमएसएमई नये प्रोडक्ट बनाने के मामले में विश्व के प्रमुख देशों की अपेक्षा कहीं भी नहीं ठहरता है। जबकि परंपरागत प्रोडक्ट के साहारे एमएसएमई देश की जीडीपी को थामे हुए है।

कमी सिर्फ नये इनोवेशन को लेकर है। रतन टाटा जी भी सार्वजनिक तौर पर देश में इवोवेशन के गिरते स्तर पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अगर भारतीय एमएसएमई इनोवेशन की तरफ ध्यान देना शुरु कर दें तो यह इंडस्ट्री बहुत बड़ी बन सकती है।

आइये समझते हैं कि वह 10 प्रमुख गलतियां कौन सी हैं जिसे कारोबारियों को कभी भी नहीं करना चाहिए

बिजनेस लोन को बोझ समझने की धारणा

कुछ कारोबारियों का यह धारणा होती है कि बिजनेस लोन एक तरह का बोझ है। इससे कारोबारी फंस जाता है। जबकि होता इसके ठीक उल्टा है। अगर कारोबारी के पास बिजनेस चलाने के लिए जरुरी वर्किंग कैपिटल नहीं होता है तो इस कंडिशन में बिजनेस को अधिक दिनों तक नहीं चलाया जा सकता है।

जिस भी कारोबारी के पास बिजनेस चलाने के लिए जरुरी घन उपलब्ध न हो उसे चाहिए कि वह तत्काल बिजनेस लोन के लिए अप्लाई दें। क्योंकि बिजनेस लोन की साहायता से बिजनेस के लिए जरुरी घन की कमी को पूरी किया जा सकता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan द्वारा एमएसएमई कारोबारियों को 7.5 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन, बिना कुछ गिरवी रखें, सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है। ZipLoan से मिलने वाला बिजनेस लोन 6 महीना बाद प्री-पेमेंट चार्जेस फ्री होता है।

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पहले अपना मुनाफा देखो, कस्टमर अपना खुद समझ लेगा

भारतीय कारोबारियों की सबसे बड़ी गलती यह है कि वह सबसे पहले अपना मुनाफा देखते हैं। सिर्फ अपने मनी मॉडल पर विचार करते हैं। अपने कस्टमर के मनी मेकिंग मॉडल पर विचार नहीं करते हैं।

अब आप सोचिए कि जब तक कस्टर को अपना फायदा नहीं दिखेगा, तब तक वह क्यों आपके साथ लंबे समय तक बिजनेस करेग। इस तरह कस्टमर भी अपना सप्लायर बदलता रहेगा।

इसलिए कारोबारियों को चाहिए कि वह अपने साथ – साथ कस्टमर के प्रॉफिट मॉडल पर भी विचार करें। ताकि कस्टमर को लगे कि उसके लाभ का भी ध्यान दिया जा रहा है।

नेगेटिव कैश फ्लो और नेगेटिव वर्किंग कैपिटल

कैश फ्लो को हिंदी में धन का प्रवाह और वर्किंग कैपिटल को हिंदी में कार्यशील पूंजी कहा जाता है। मतलब वह धन जिसका उपयोग बिजनेस के संचालन में किया जाता है।

अधिकतर भारतीय एमएसएमई का कैश फ्लो और वर्किंग कैपिटल सूख जाता है और कारोबारी को पता भी नहीं चलता है। यह बड़ा कारण है किसी भी बिजनेस को ठप करने के लिए।

अगर आप चाहते हैं कि आपका वर्किंग कैपिटल न सूखे और नेगेटिव में न जाये तो इसके लिए जरुरी है कि आप वर्किंग कैपिटल लोन लेकर अपना कैश फ्लों हर-वक्त ठीक रखें।

नेगेटिव मार्जिन के साथ आगे बढ़ना

बिजनेस में सबकी चाहत होती है खूब मुनाफा हो। इसके लिए कारोबारी सोचते हैं कि माल को कम कीमत पर बेचकर पहले मार्केट पर कब्ज़ा करो। इसके बाद मुनाफा ही मुनाफा होगा। यहीं पर कारोबारी बड़ी गलतियां करते हैं।

कारोबारियों को खुद का घाटा उठाकर प्रोडक्ट बेचने की होड़ में शामिल होने से बचना चाहिए। क्योंकि हो सकता है कि कस्टमर कल आपके यहां से माल ही न खरिदे। बिजनेस में कभी भी नेगेटिव मार्जिन के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

टैलेंटेड मैनपावर यानी कुशल कर्मचारियों की कमी

बिजनेस को चलाने के लिए आपको प्रतिभाशाली साथियों की जरूरत होगी है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि अकबर के सभी नवरत्न भारतीय ही थे। मतलब आपको ऐसे लोगों की जरूरत है जो आपके विजन को समझ सके और उस विजन को पूरा करने में जी – जान लगा दें।

हां, यह जरुर है कि कुशल कर्मचारियों का अधिक सैलरी देना पड़ सकता है। लेकिन यह गारंटी तो होगी कि कल को वहीं कर्मचारी आपको मुनाफा कमाकर देंगे। आप चाहें तो कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए बिजनेस लोन ले सकते हैं।

निरंतर रेवन्वू देने वाला बिजनेस मॉडल

बिजनेस में रेवन्वू इक्कठा करते हुए बिजनेस को बड़ा करने का मॉडल अपनाना चाहिए। अधिकतर भारतीय एमएसएमई कहते हैं – पहले आज की देखो, कल की कल देखंगे। यही बड़ी गलती होती है।

यह तो वहीं वाली बात हो गई कि आज खा लेते हैं कल का कल देखा जायेगा। हो सकता है कि कल कुछ मिले ही नहीं तो क्या होगा। इसलिए बिजनेस का रेवन्वू ऐसा होना चाहिए जिससे निरंतर आमदनी हो।

मिक्स्ड मार्केटिंग सिग्नल और पोजिशनिंग

बिजनेस में यह नहीं चल सकता कि यह भी ले लो, वह भी ले लो। अधिकतर भारतीय एमएसएमई यही करते हैं। जबकि करना यह चाहिए कि सभी स्पेसिफिक एमएसएमई को अपने स्पेसिफिक कस्टमर तक पहुंच बनाना चाहिए।

बेहद सुस्त तरीके से प्रोडक्ट लाँच करना

एक कहावत है “जो सोवत है, वो खोवत है” यह कहावत प्रोडक्ट लाँच करने में बिल्कुल फीट बैठती है। अपना प्रोडक्ट बहुत सुस्त तरीके से बेहद लेट लतीफी के साथ कभी नहीं लाँच करना चाहिए।

अपने कॉम्पीटीटर से खुद को बचाएं

अपने कॉम्पीटीटर से खुद को बचाना बिजनेस बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अपनी रणनीति अपने किसी भी कॉम्पीटीटर के साथ शेयर नहीं करना चाहिए।

कस्टमर के फीडबैक को बेहतर तरीके से लेना

अगर कस्टमर के फीडबैक को महत्व नहीं दिया जायेगा तो वह बिजनेस के लिए घातक साबित हो सकता है। कस्टमर के फीडबैक को हमेशा सर माथे पर रखना चाहिए और फीडबैक पर काम करना चाहिए।

बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से इको-सिस्टम पर लाइए

अमेज़न सिर्फ अपना प्रोडक्ट बेचता तो क्या आज की तारीख में अमेज़न इतना पॉपुलर होता? कभी नहीं। इसलिए अपने बिजनेस को पूरी तरह से इको-सिस्टम के भीतर लाइए।

हो सकता है कि इस प्रोसेस में आपके बजट से अधिक पैसा लगे। तो इसके लिए सबसे बेहतरीन समाधान बिजनेस लोन का है। बिजनेस लोन के जरिए बिजनेस का विस्तार करें और बिजनेस लोन को ईएमआई के रुप में चुका दें।

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