आपने देखा होगा कि कभी – कभी समाचार में होता है कि अच्छी तरह से चलती हुई फला कंपनी अचानक से बंद हो गई या दिवालिया हो गई। दिवालिया होने का मतलब होता है कि कंपनी के पास अब खर्च करने के लिए पैसा नहीं बचा है।

ऐसा क्यों होता है? ऐसा तब होता है जब बिजनेस के लिए ठीक तरह से फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं की गई होती है। कंपनी का वर्किंग कैपिटल कब सूख जाता है, कारोबारी को पता भी नहीं चलता है। ऐसे में यह सबसे जरुरी होता है कि बिजनेस के लिए एक रणनीति के तहत फाइनेंशियल प्लानिंग तैयार किया जाय।

आगे की जानकारी देने से पहले यह स्पष्ट कर देना उचित होगा कि वर्किंग कैपिटल लोन लेकर बिजनेस का संचालन सही तरिके से किया जा सकता है। देश की प्रमुख एनबीएफसी ZipLoan से एमएसएमई कारोबारियों को 7.5 लाख रुपये तक बिजनेस लोन, सिर्फ 3 दिन* में प्रदान किया जाता है।

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बिजनेस के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग कैसे करना चाहिए?

बिजनेस के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग करने के बारें में जानने से पहले यह समझना जरुरी है कि फाइनेंशियल प्लानिंग क्या है – Financial planning meaning in Hindi और फाइनेंशियल प्लानिंग का उद्देश्य – Objective of financial planning in Hindi क्या होता है?

फाइनेंशियल प्लानिंग – Financial planning meaning in Hindi

Financial planning meaning in Hindi में दो शब्द है। दोनों शब्द अंग्रेजी भाषा का शब्द है। फाइनेंस का हिन्दी में अर्थ धन, वित्त और सरल भाषा में पैसा होता है। Planning का हिन्दी में अर्थ होता है – योजना बनाना। इस प्रक्रार फाइनेंशियल प्लानिंग – Financial planning meaning in Hindi का अर्थ हुआ – पैसों की योजना बनाना।

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किस तरह के पैसों की योजना बनाना? यह सवाल उठना लाजमी है। तो इसका उत्तर है कि कोइ व्यक्ति जितना पैसा कमाता है, उन पैसो का वह इस्तेमाल कहां करेगा और उन पैसो से पैसा कैसे कमाया जाएगा।

इसे हम सरल शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि धन सबंधित जरुरतों को पूरा करने के लिए बनाये जाने वाले योजना को फाइनेंसियल प्लानिंग कहा जाता है।

बिजनेस के लिए फाइनेंसियल प्लानिंग करते हुए इस बात का ध्यान रखा जाता है कि बिजनेस का संचालन करने के लिए पैसा कहां से आएगा और बिजनेस में मुनाफा कैसे बनाया जाएगा। बिजनेस का विस्तार करना भी फाइनेंसियल प्लानिंग का हिस्सा होता है।

फाइनेंशियल प्लानिंग का उद्देश्य – Objective of financial planning in Hindi

Objective of financial planning in Hindi यानी फाइनेंशियल प्लानिंग का उद्देश्य पैसो का सही प्रबंधन करना होता है। वित्तिय योजना बनाते समय यह लक्ष्य होता है कि पैसा कहां से आएगा और पैसा किस काम के लिए कहां जाएगा।

इसका विस्तार करते हुए यह कहा जा सकता है कि अगर युद्ध में जाने से पहले पसीना बहाया जाए तो रणक्षेत्र में कम खून गिरने की संभावना होती है। मतलब कि भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग तैयार की जाती है।

बिजनेस के लिए इस तरह फाइनेंशियल प्लानिंग करना चाहिए

वित्तीय स्थिति यानी फाइनेंशियल कंडिशन कारोबारियों के साथ ही सभी लोगों को सुरक्षात्मक रखना चाहिए। इसके लिए जरूरी है हर इंसान को फाइनेंशियल प्लान के बारे में जानकारी होना। जब कारोबारी किसी फाइनेंशियल प्लानिंग के मुताबिक चलते हैं तो किसी भी वित्तीय दिक्कतों से बचे रहते है।

फाइनेंस का नाम आते ही अधिकतर लोग लोन या जीवन बीमा समझ लेते है लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें यह जीवन बिना और लोन से बिल्कुल अलग है। यह पैसों की सही इस्तेमाल और मैनेजमेंट करने से संबंधित है। यह भविष्य को सुरक्षित करने के संबंध में है।

अकसर ऐसा होता है कि कारोबारी किसी जल्दबाजी में या किसी के कहने पर अपना पैसा गलत जगह इन्वेस्ट कर देते है और बाद में पछताते है। बाद में पता चलता है कि जो पैसा उन्होंने इन्वेस्ट किया था उस पर तो रिटर्न ही नहीं मिल रहा है।

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कभी- कभी ऐसा भी होता है कि किसी छोटी गलती के चलते भी फाइनेंशियल प्लान धरा का धरा रह जाता है और नुकसान हो जाता है। ऐसे में आपके काम आता है फाइनेंशियल प्लान से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां।

बिजनेस के लिए फाइनेंशियल प्लान से संबंधित 5 ऐसी बातों को समझाते है, जिनका पालन करके आप भी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत कर सकते है।

  1. बिजनेस लोन लेने से डरना
  2. सभी इनकम सोर्स को मर्ज करने की कभी गलती न करें
  3. बिजनेस का वर्किंग कैपिटल मेनटेंन रखें
  4. इमरजेंसी बजट रखना है जरुरी
  5. पैसा कहां से आया, पैसा कहां गया

फाइनेंशियल प्लान-1: बिजनेस लोन लेने से डरना

कारोबारियों में यह आम धारणा होती है कि बिजनेस लोन लेना ठीक नहीं होता है। लोन से बँध जाता है। लेकिन सोचिए अगर आपको अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए कोई मौका हो और आपके पास धन कम हो तो आप क्या करेंगे? मन- मसोस कर तो रह नहीं जायेंगे?

जानिएः बिज़नेस लोन कैसे काम करता है?

इसके लिए आपको तुरंत बिजनेस लोन लेना चाहिए। कारोबार बढ़ाने के लिए बिजनेस लोन बेहतरीन कदम होता है। वर्तमान में एनबीएफसी कंपनियों की बेहतरीन सेवाओं पर बिजनेस लोन बहुत ही जल्दी और कम शर्तों पर मिल जाता है।

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फाइनेंशियल प्लान-2: सभी इनकम सोर्स को मर्ज करने की कभी गलती न करें

कारोबार में ऐसा होता है कि इनकम यानी आय के कई जरिया होता है। जब आय के कई जरिया होता है तो कुछ समय बाद ऐसा होता है कि सभी सोर्स से आ रही इनकम इक्कठा होनी शुरु हो जाती है। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि किस सोर्स से कितनी इनकम हुई है।

जब यह नहीं पता चल पाता कुछ समय बाद मुश्किल होनी शुरु हो जाती है। अगर सभी सोर्स से हुई इनकम मर्ज होने लगेगी तो यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जायेगा कि किस सोर्स से कितनी इनकम हुई। किस सोर्स पर फोकस करना है। इसलिए इनकम के सभी सोर्स अलग- अलग करके रखे।

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फाइनेंशियल प्लान-3: बिजनेस का वर्किंग कैपिटल मेनटेंन रखें

किसी भी बिजनेस या कंपनी के लिए वर्किंग कैपिटल को ठीक रखना अनिवार्य होता है। वर्कींग कैपिटल को हिन्दी में कार्यशील पूंजी कहा जात है। यानी वह धन, जिससे बिजनेस का संचालन किया जाता है।

अधिकतर भारतीय स्टार्ट-अप अपने शुरुआत के 3 साल के भीतर ही बंद हो जाते हैं। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि इन बिजनेस का वर्किंग कैपिटल खत्म हो जाता है और कारोबारी पता भी नहीं चलता है।

इसे भी जानिएः कार्यशील पूंजी नीतियों के विभिन्न प्रकार

वर्किंग कैपिटल ही वह धन होता है, जिससे कर्मचारियों को सैलरी, बिजनेस की जगह का किराया, बिजली –  पानी का बिल इत्यादि का भुगतान किया जाता है। इसलिए बिजनेस का वर्किंग कैपिटल की सेहत ठीक रखना अनिवार्य होता है।

अगर किसी कारोबारी के पास वर्किंग कैपिटल मैनेज करने के लिए धन की कमी है तो उन्हें चाहिए कि वह ZipLoan से वर्किंग कैपिटल लोन के तौर पर बिजनेस लोन लेकर अपने बिजनेस का वर्किंग कैपिटल को ठीक रखें।

फाइनेंशियल प्लान-4: इमरजेंसी बजट रखना है जरुरी

कारोबार में कब मुनाफा हो जाए और कब घाटा, कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में अगर आप इमरजेंसी बजट नहीं रखते हैं तो बहुत सारी मुसीबतों से एक साथ दावत दे रहे हैं। इमरजेंसी बजट वह रकम रखी जाती है जिसे अचानक जरूरत पड़ने पर खर्च किया जाता है।

यह बजट कारोबार की पूरी बजट से अलग होती है। सभी कारोबारियों को चाहिए कि वह कारोबार में इमरजेंसी बजट जरूर रखे। ऐसा करके आप अपना भविष्य बेहतर कर सकते है।

फाइनेंशियल प्लान-5: पैसा कहां से आया, पैसा कहां गया

यह बहुत गलत आदत है। जिन कारोबारियों की भी ऐसी आदत है उन्हें सलाह कि वह बिना देर किए तुरंत अपनी आदत बदल लें। कैश फ्लो का हिसाब न रखना बड़ी गलती है। अगर कैश फ्लो पर नजर नही होगी तो कई तरह के गैर जरूरी खर्चे होंगे जिनका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं होगा।

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