एम.एस.एम.ई. (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम)देश केकुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 45% और कुल निर्यात में 40% योगदान देते है।भारत में छोटे व्यवसाय क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराते हैं, यही कारण है कि यह क्षेत्र सरकार के लिए विकास का केंद्र बिंदु है।एम.एस.एम.ई. (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम)के विकास में सहायता के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं शुरू की गई हैं।भारत की3 प्रमुख एम.एस.एम.ई. योजनाएं |

प्रदर्शन और क्रेडिट रेटिंग योजना (परफॉरमेंस एंड क्रेडिट रेटिंग स्कीम)

छोटे व्यवसायों के लिए क्रेडिट उपलब्धता की कमी एक प्रमुख मुद्दा है।अधिकांश लोन देने वाले संस्थानों के पास लोन उधारकर्ताओं की अत्याधिक मांग हैऔर अपने उधारकर्ताओं की लोन योग्यता के मूल्यांकन के लिए ये संस्थान एक समान प्रक्रिया का पालन करते हैं।एम.एस.एम.ई. के लिए प्रदर्शन और क्रेडिट रेटिंग योजना एक महत्वपूर्ण योजना है क्योंकि इसका उद्देश्य एम.एस.एम.ई.की क्षमताओं और क्रेडिट योग्यता पर एक विश्वसनीय तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) की रेटिंग प्रदान करना है।यह योजना एम.एस.एम.ई. के मौजूदा कार्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए भी तैयार है। एम.एस.एम.ई. सर्वोत्तम प्रैक्टिसेज के बारे में जागरुकता पैदा करेगा ताकि उनकी क्रेडिट पात्रता में सुधार हो और बेहतर दरों पर लोन मिल सके। एक मानकीकृत (स्टैण्डर्ड) रेटिंग प्रक्रिया भी एम.एस.एम.ई. को अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ स्वयं को बेंचमार्क करने में मदद कर सकती है और अपने विक्रेताओं (वेंडर्स) और ग्राहकों के प्रति उनकी स्वीकार्यता बढ़ा सकती है।
रेटिंग के उद्देश्य के लिए, रेटिंग एजेंसियों को दिया जाने वाला शुल्क सूक्ष्म और लघु उद्यमों के कारोबार पर निर्भर करेगा और इसे 3 स्लैब में वर्गीकृत किया गया है:
50 लाख रूपये तक के कारोबार के लिए:एम.एस.एम.ई. मंत्रालय रेटिंग एजेंसी को भुगतान करने के लिए शुल्क का 75% वापस करेगा, जो कि अधिकतम 15,000 रूपये हो सकता है।
50 लाख से 2 करोड़ रूपये रुपए के बीच कारोबार के लिए:एम.एस.एम.ई. मंत्रालय रेटिंग एजेंसी को भुगतान करने के लिए शुल्क का 75% वापसकरेगा जो कि अधिकतम 30,000 रूपये हो सकता है।
2 करोड़ रूपये से ऊपर के कारोबार के लिए:एम.एस.एम.ई. मंत्रालय रेटिंग एजेंसी को भुगतान करने के लिए शुल्क का 75% वापस करेगा जो कि अधिकतम 40,000 रूपये हो सकता है।
परफॉरमेंस और क्रेडिट रेटिंग योजना, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम द्वारा एम.एस.एम.ई. मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा है।
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एम.एस.एम.ई. के लिएक्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड:

एम.एस.एम.ई. और सिडबी (लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया) के मंत्रालय ने संयुक्त रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों(माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज) के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट(सीजीटीएमएसई) नामक ट्रस्ट की स्थापना की है। यह एम.एस.एम.ई. के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है और इसका उद्देश्य उद्यमियों और छोटे व्यवसायियों को जमानत मुक्त (कोलैटरल फ्री) ऋण प्रदान करना है। इस योजना में नए और मौजूदा सूक्ष्म और लघु उद्यम शामिल हैं जो सेवा (सर्विस) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) कार्यों में शामिल हैं।इस योजना में खुदरा व्यापार (रिटेल ट्रेड) को शामिल नहीं किया गया है.

ऋण (लोन) राशि: सीजीटी के तहत अधिकतम ऋण राशि 1 करोड़ है। इसेनए व्यवसाय (स्टार्टअप) या मौजूदा व्यापार को अवधि कर्ज (टर्म लोन) या कार्यशील पूंजी ऋण (वर्किंग कैपिटल लोन) के रूप में प्रदान किया जा सकता है।
मुख्य लाभ: यदि छोटे या लघु उद्यम बैंक को कर्ज चुकाने में नाकामयाब रहतेहैं, तो सीजीटीएमएसई (CGTSME) को क्रेडिट सुविधा के 85% तक की राशी, बैंक को चुकाने का प्रावधान है। इस मॉडल का फोकस यह है कि बैंकों को कर्ज का लाभ उठाने में सक्षम होने के लिए प्रोजेक्ट योग्यता (प्रोजेक्ट वायबिलिटी) और बिजनेस मॉडल की पुष्ठी (बिजनेस मॉडल वेलिडेशन) पर जोर देना चाहिए।
एसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड के बारे में अधिक जानने के लिए, यहां क्लिक करें

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डिजिटल एम.एस.एम.ई योजना:

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए डिजिटल एम.एस.एम.ई. योजना एक महत्वपूर्ण
योजना है। क्योंकि इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए प्रेरित करना है।इससे वे अधिक दक्षता और बढती हुई प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकेगें।इस योजना में एसएमई को समय और रूपये इन-हाऊस आईटी समाधानों को विकसित करने के लिए खर्च करने की बजाय क्लाउड कंप्यूटिंग पर स्विच करने को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है।क्लाउड आधारित तकनीक एमएसएमई को अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का संचालन करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करने में मदद करेगी|
कलाउड आधारित मॉडल के लाभ:
1.एक व्यापारीको अपनी आवश्यकता के अनुसार ही भुगतान करना है और उसे शुरुआत में भारी निवेश नहीं करना पड़ता ।
2. आसानी से मापनिय (स्केलेबल): यदि उपभोगता को व्यवसाय बढ़ाना है तो वे समय और प्रयास (एफर्ट) लगाये बिना बहुत ही आसानी से व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं।
3. कलाउड आधारित मॉडल के लिए आपको किसी विशेष स्थान और डिवाइस की जरुरत नहीं रहती।इसके लिए आपको केवल इंटरनेट की आवश्यकता है।

इस मॉडल पर स्विच करने के लिए एम.एस.एम.ई को प्रोत्साहित करने के लिए,सरकार उपभोगता के भुगतान पर 2 साल की सब्सिडी प्रदान कर रही है। हर यूनिट को 1 लाख तक की अधिकतम सब्सिडी 2 वर्ष की अवधि में एम.एस.एम.ई के द्वारा वितरित की जाएगी।
क्लाउड आधारित मॉडल के अंतर्गत दी गई सेवाएं:

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1. इआरपी
2. लेखांकन (एकाउंटिंग)
3. विनिर्माण डिजाइन (मैन्युफैक्चरिंग डिजाईन)
4.कराधान (जीएसटी) और अनुपालन

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