भारत के बड़े बिजनेसमैन जैसे अडानी, अंबानी, टाटा ग्रुप्स और ऐसे कई अन्य बिजनेसमैन हैं जिनके बारे में लगभग हर कोई जानता है. लोग इनसे जुड़ा हुआ हर एक किस्सा और इनकी सफलता की कहानी के बारे में जानना चाहते हैं. लेकिन भारत के बड़े बिजनेसमैन यूं ही नहीं बड़े और सफल हुए, बल्कि इसके पीछे उनका संघर्ष है, कड़ी मेहनत और लगन है. हम आपको 5 ऐसे भारत के बड़े बिजनेसमैन के बारे में बता रहे हैं, जिन्‍होंने पाकिस्‍तान को छोड़ भारत में रहना और यहां व्‍यापार करना पसंद किया. इन कारोबारियों ने न सिर्फ पाकिस्‍तान छोड़ा, बल्कि इन्‍होंने भारत में बिजनेस करने के नए तरीके भी पेश किए. इसके साथ ही उन्‍होंने बिजनेस के क्षेत्र में भारत को एक नई और अलग पहचान दिलाई. यहां हम भारत के बड़े बिजनेसमैन की  सफलता की कहानियों को संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं जिससे हर एक उद्यमी बहुत कुछ सीख सकता है.

भारत के बड़े बिजनेसमैन 

1.बृजमोहन मुंजाल-

हीरो, जो सच में साबित हुआ देश की धड़कन

दुनिया की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकार्प के अध्यक्ष और हीरो ग्रुप के संस्थापक बृजमोहन मुंजाल ने अपने भाइयों के साथ मिलकर 1954 में हीरो साइकिल्‍स बनाने की शुरुआत की थी. बृजमोहन न सिर्फ हीरो साइकिल्‍स को नई ऊंचाइयों पर लेकर गए, बल्कि उन्‍होंने भारत में बिजनेस की एक नई राह भी स्‍थापित की. हीरो साइकिल लिमिटेड वर्ष 1986 से लगातार दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बनी हुई है और इनका

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source- financial express

नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है. बृजमोहन मुंजाल का जन्म अविभाजित पंजाब में हुआ था. बंटवारे के बाद अब वो हिस्सा हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में आता है. जब बंटवारा हुआ तब बृजमोहन अपने परिवार सहित लुधियाना आए थे जहां उन्होंने अपना कारोबार शुरु किया. व्यापार और उद्दयोग में विशेष योगदान के लिए वर्ष 2005 में बृजमोहन मुंजाल को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. लकिन इस बड़ी सफलता के पीछे कड़ी मेहनत थी. विभाजन के वक्त खुद का कारोबार स्थापित करना कोई बच्चे का खेल नहीं था. उस वक्त तमाम कंपनियां अपना पांव पसार रही थीं लेकिन हीरो साइकिल ने अपना दबदबा जारी रखा. आगे चलकर इसी हीरो समूह ने 80 के दशक में सर्वीधिक साइकिल बनाने का रिकॉर्ड बनाकर अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करा लिया. शून्य से शिखर तक पहुंचने में हीरो समूह को दुनिया भर की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था.

2. मोहन सिंह ओबेरॉय

ओबेरॉय होटल्स का साम्राज्य 

भारत में अगर होटल इंडस्ट्री का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें मोहन सिंह ओबेरॉय की कहानी स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी. उनकी विरासत और उनका होटल साम्राज्य आज भारत के साथ ही श्रीलंका, नेपाल ऑस्ट्रेलिया और हंगरी जैसे देशों में फैला हुआ है. ओबेरॉय होटल इंडस्‍ट्री के चर्चित चेहरा मोहन सिंह ओबेरॉय का नाता भी पाकिस्‍तान से है. वह भी विभाजन के दौरान पाकिस्‍तान के झेलम जिले को छोड़कर भारत आ गए थे. एक साधारण परिवार में जन्‍मे और बचपन में नौकरी के लिए भटकने के बाद वह शिमला चले आए. ये बात बहुत कम लोगों को पता होगी कि विश्व में सर्वाधिक होटल और रिजोर्ट चलाने वाले प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने ओबेराय ग्रुप के संस्थापक चेयरमैन मोहन सिंह ओबेराय ने अपना करियर महज 50 रुपये मासिक तनख्वाह से शुरू किया था. उन्होंने वर्ष 1922 में शिमला के सिसिल होटल में गेस्ट क्लर्क के रूप में काम शुरू किया था. यहां तकरीबन 5 साल तक उन्‍होंने काम किया और इसके बाद उन्‍होंने अपना एक होटल शुरू किया. इस तरह शुरुआत हुई देश के सबसे बड़े होटल ओबेरॉय ग्रुप की.

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3. परमानंद दीपचंद हिंदुजा

एक सफल कारोबारी

हिंदुजा समूह दुनिया के सबसे बड़े विविध समूहों में से एक है. हिंदुजा परिवार भारत में प्रौद्योगिकी, मीडिया और दूरसंचार की नई अर्थव्यवस्था जैसे बैंकिंग, वित्त, परिवहन और पुराने अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में योगदान देता है. आज देश के सबसे बड़े ग्रुप में से एक हिंदुजा ग्रुप की शुरुआत कभी पाकिस्‍तान के सिंध में हुई थी. जिसकी शुरुआत परमानंद दीपचंद हिंदुजा ने की जो  पाकिस्तान के शिकारपुर से थे. साल 1919 में उनका कारोबार ईरान तक फैल चुका था. वह देश से बाहर कारोबार करने वाले पहले कारोबारी भी थे. साल 1914 में वह अपने कारोबार को मुंबई लेकर आए. धीरे-धीरे उनका कारोबार भारत में भी फैला और सफल हुआ.

4. धर्मपाल गुलाटी (महाशय लाल चुन्नी)-भारत के बड़े बिजनेसमैन

महाशियां दी हट्टी

एमडीएच मसालों का ऐड तो आपने देखा ही होगा. इन चटपटे मसालों की शुरुआत करने वाले और कंपनी को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाने वाले कोई और नहीं बल्कि महाशय चुन्‍नी लाल हैं.इनका नाम धर्मपाल गुलाटी है.  पाकिस्‍तान में मसालों की एक छोटी सी दुकान चलाने वाले महाशय चुन्‍नी लाल ने ‘महाशियां दी हट्टी’ (एमडीएच) की स्थापना यहीं की थी. थोड़े ही समय में वह काफी फेमस हो गए थे और उन्हें ‘डेगी मिर्च वाले’ के नाम से लोग जानने लगे. वह विभाजन के बाद भारत आए और यहां उन्‍होंने मसालों का सबसे बड़ा ब्रांड खड़ा किया. मसालों के व्यापार के अलावा महाशय लाल चुन्नी ने अन्य छोटे व्यापार जैसे साबुन, बढ़ईगिरी, चावल इत्यादि का व्यापार भी किया. इसके अलावा चुन्नीलाल ने तांगे भी चलाई. आज वह मसालों के मैन्युफैक्चर, डिस्ट्रिब्यूटर और एक्सपोर्टर हैं. और इनका कारोबार करोड़ों में है. इनकी सफलता से हर एक युवा के लिए एक सीख है.

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5. एफसी कोहली

आईटी जगत की क्रांति 

भारत में आईटी क्रांति लाने वालों में सबसे पहले एफसी कोहली का नाम आता है. उन्‍होंने टाटा इलेक्ट्रिक कंपनीज को 1951 में ज्‍वाइन किया था. कोहली का जन्‍म पाकिस्‍तान के पेशावर में हुआ था. 970 में वह टाटा इलेक्ट्रिक कंपनीज के डायरेक्टर बने. वह टीसीएस के पहले सीईओ थे और भारत में आईटी क्रांति लाने वालों में हरदम आगे रहे.

 

 

 

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