कई लोग इस बात से दर जाते हैं कि उनकी इनकम पर टैक्स कटेगा। या सरकार उनकी कमाई पर जबरन टैक्स वसूल करेगी। जबकि ऐसा बिल्कुल भी नही है। इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करके टैक्स वापसी हो सकती है।

किन्हीं स्थितियों में अगर आपने सरकार को अधिक टैक्‍स चुका दिया है तो आप इनकम टैक्स रिटर्न – ITR फाइल करके उसे रिफंड के रूप में वापस ले सकते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में या लापरवाही के चलते जानकारी नही ले पाते हैं और टैक्स नाम से ही डरते रहते हैं।

भारत में टैक्स नाम एक हौव्वा की तरह होता है। बहुत से लोग इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर ) भरने से बचते हैं। अधिकतर लोगों का मानना होता है कि जब उनकी सालाना कमाई टैक्स छूट की सीमा के आस-पास है तो ITR फाइल करने की जरूरत क्या है?

लेकिन आपको बता दें कि सच्चाई यह नहीं है। सच्चाई यह है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से लोगों को बहुत से फायदे हैं। आइये इस आर्टिकल में इनकम टैक्स रिटर्न – ITR फाइल करने के फायदों के बारे में समझते हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न – आईटीआर फाइल करने से लाभ

आईटीआर किसी भी व्यक्ति के सालाना इनकम का लेखा – जोखा होता है। यानी व्यक्ति ने एक साल में कितना कमाई किया और कितना खर्च किया इन सभी बातों का लिखित में विवरण होता है जिसे सरकार के आयकर विभाग में जमा करना होता है।

आयकर रिटर्न ऑनलाइन से साथ ही ऑफलाइन भी जमा होता है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि जिन लोगों की सालना आमदनी 2 लाख 50 हजार से अधिक हो उन्हें आईटीआर फाइल करना चाहिए। आईटीआर फाइल करने से उन्हें कई तरह का लाभ मिलता है।

खुद की आमदनी साबित करने का लिए प्रूफ

इनकम टैक्स रिटर्न जब भी कोई व्यक्ति फाइल करता है तो उसे एक प्रमाण पत्र मिलता है। जब भी आईटीआर दाखिल होता है तब उसके साथ फॉर्म 16 भरा जाता है, फॉर्म 16 वहां से मिलता है जहां व्यक्ति नौकरी कर रहा है।

इस तरह एक सरकारी तौर प्रमाणिक कागजात हो जाता है जिससे यह साबित होता है कि व्यक्ति की इतनी रुपये सालना फिक्स आमदनी है। आमदनी का रजिस्टर्ड प्रमाण मिलने से क्रेडिट कार्ड, लोन या खुद की क्रेडिट साबित करने में मदद होती है।

आमदनी का रजिस्टर्ड प्रूफ मिलने के बाद बैंक से या किसी एनबीएफसी कंपनी से बिजनेस लोन लेकर व्यक्ति अगर कोई बिजनेस करना चाहे तो उसे बहुत आसानी से बिजनेस लोन मिल जाता है।

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लोन मिलने सहायक होता है आईटीआर

चूँकि आईटीआर सरकार के आयकर विभाग में जमा होता है तो वहां से एक प्रमाण पत्र भी मिलता है तो इस प्रमाण पत्र को सभी सरकारी बैंक और एनबीएफसी कम्पनियां मान्यता देती हैं और लोन देने में अधिक परेशान नही किया जाता है।

दरसल ऐसा होता है कि जब भी कोई व्यक्ति किसी बैंक से लोन के लिए आवेदन करते हैं तो उनसे आमदनी का प्रमाण के तौर ITR मांगा जाता है। अगर व्यक्ति के पास ITR नही होता है तब कोई अन्य सबूत देने को कहते हैं।

अगर आप नियमित रूप से आईटीआर फाइल करते हैं तो आपको बैंक से आसानी से लोन मिल जाता है। आईटीआर की मदद से आप किसी वित्तीय संस्थान से लोन के अलावा दूसरी सेवाएं भी आसानी से हासिल कर सकते हैं।

वीजा मिलने में सहायक

कोई भी देश यह नही चाहता है कि उसके देश में कोई ऐसा व्यक्ति आये जो आर्थिक रुप से कमजोर हो यानी सभी देश चाहते हैं कि उनके देश आने वाले व्यक्ति की आर्थिक हैसियत ठीक होनी चाहिए जिससे वह उनके देश में आकर खर्च कर सके।

जब भी कोई व्यक्ति पढ़ाई के लिए, काम के लिए या बसने के लिए किसी दूसरे देश में वीजा के लिए अप्लाई करता है तो उससे 3 – 5 साल का ITR मांगा जाता है। इस तरह कोई व्यक्ति अगर रेगुलर तौर पर आईटीआर फाइल करता है तो उसे जल्दी वीजा मिल सकता है।

बिजनेस बढ़ाने में मददगार

आईटीआर बिजनेस बढ़ाने में सहायक होता है। अगर कोई व्यक्ति कारोबारी है और कोई प्रोडक्ट बनाता है और वह कारोबारी अपना प्रोडक्ट सरकारी कंपनियों या सरकारी विभाग को बेचना चाहता है तो उनके लिए आईटीआर फाइल करना जरूरी है।

कोई भी सरकारी कंपनी या विभाग जब किसी प्राइवेट कारोबारी से कोई चीज खरीदता है तो कारोबारी से कम से कम 3 साल की आईटीआर की मांग की जाती है। इस तरह देखा जाए तो जो कारोबारी आईटीआर फाइल करते हैं उनका बिजनेस बढ़ सकता है।

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अगर टैक्स अधिक कट गया है तो उसका रिफंड मिल सकता है

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का सबसे शानदार फायदा यह है कि अगर कोई व्यक्ति सरकार को अधिक टैक्स चुका दिया है तो वह चाहें तो आईटीआर फाइल करके अपना टैक्स रिफंड वापस पा सकता है।

यहां यह बताना जरूरी है कि अगर किसी व्यक्ति का अधिक टैक्स कटता है तो उसको आईटीआर फाइल करना आवश्यक है नही तो इनकम टैक्स के अधिकारी जाँच करना शुरु कर देते हैं। अगर जाँच में यह पाया जाता है कि व्यक्ति की आमदनी टैक्स के सलैब में आती है और उसने ITR फाइल नही किया है तो उस व्यक्ति को इनकम टैक्स नोटिस मिल सकता है।

ठीक समय पर ITR फाइल करने पर जुर्बना से बचेंगे

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल की करने की हर साल 31 जुलाई अंतिम तिथि होती है। हालाँकि यह तिथि समय – समय पर आगे बढ़ती रहती है। हालाँकि किसी भी को आईटीआर फाइल करने के लिए अंतिम तिथि का इंतजार नही करना चाहिए। अधिक देर से आईटीआर फाइल करने से रिफंड धनराशि पर कोई ब्याज नही मिलता है।