बिजनेस में कहावत कही जाती है की ग्राहक भगवान होता है। पर भगवान कुछ मांगे और उसे न दी जाये तो क्या भगवान नाराज नहीं हो सकते हैं?

आजकल बैंको में भी कुछ ऐसा ही होता है। लोन एक ऐसा बैंकिंग प्रोडक्ट है जिसकी मांग हमेशा बनी रहती है। ग्राहक चाहते हैं की उन्हें पर्सनल लोन या बिजनेस लोन मिले जिससे वह अपना काम कर सकें।

लेकिन, कई बार ऐसा भी होता है की ग्राहकों को बैंक लोन देने से मना कर देते हैं। अगर कभी आपको भी बैंक ने लोन देने से मना किया है और आपको लोन न देने का कारण नहीं बाताया है तो आप इस आर्टिकल में समझेंगे की बैंक किन – किन कारणों से लोन देने से मना करते हैं।

पर्सनल लोन: मंथली सैलरी कम होना

पर्सनल लोन मंथली इनकम के आधार पर मिलता है। अक्सर ऐसा होता है की बैंक लोन देने के लिए एक न्यूनतम सैलरी निर्धारित कर देते हैं।

लेकिन, लोग पैसों की जरूरत के वक्त बैंकों के नियम को और पात्रता को भूल जाते हैं और लोन के लिए अप्लाई कर देते हैं। ऐसे में बैंक उनका लोन आवेदन रद्द कर देते हैं।

कम सैलरी वाले लोगों का लोन न देने के पीछे का तर्क यह होता है की लोन वापस न होने का रिस्क रहता है। यानी व्यक्ति की जितनी सैलरी है उसमे वह अपना सिर्फ घर चला सकता है। लोन की EMI नहीं जमा कर सकता है।

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अगर किसी कम सामर्थ्य के व्यक्ति को लोन दे दिया जाए, और लोन तय समय पर वापस न हो पाए तो यह सब बैंक के नुकसान में जुड़ जाता है। इस नुकसान को लिएबिलिटीज़ कहा जाता है।

लिएबिलिटीज़ का सीधा प्रभाव बैंक की अपनी रैंकिंग एवं भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए स्कोरकार्ड पर पड़ता हैं। किसी भी बैंक के कर्मचारी ऐसा नहीं चाहते हैं की उनके ब्रांच की रैंकिंग खराब हो।

बिजनेस लोन: सिबिल क्रेडिट स्कोर का खराब होना

हम सभी जानते हैं की बिजनेस लोन अक्सर बिना कुछ गिरवी रखे मिलता है। जिसे हम अनसिक्योर्ड लोन कहते हैं। इस तरह का लोन बिना सेक्योरिटी के दिया जाता है। बिजनेस लोन मूलतः कारोबारी के सिबिल क्रेडिट स्कोर पर दिया जाता है।

क्लिक कर जानिए सिबिल क्रेडिट स्कोर क्या होता है?

क्लिक कर जानिए: लोन पाने के लिए कितना सिबिल क्रेडिट स्कोर चाहिए होता है?

ऐसे में जिन कारोबारियों की सिबिल क्रेडिट स्कोर कम होता है उनका बिजनेस लोन आवेदन ख़ारिज होने की संभवना बहुत अधिक होती है।

जिस व्यक्ति का जितना कम सिबिल क्रेडिट स्कोर होता है उसको यह समझा जाता है की वह व्यक्ति लोन चुकाने में हेरफेर करता है। हेरफेर यानी की वह देरी से लोन की रकम चुकाता है। ऐसे में उस व्यक्ति को लोन मिलने में कठिनाई का सामना करना होता है।

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पुराना लोन न चुकाने पर लोन आवेदन ख़ारिज होना

अधिकतर लोन आवेदन तब रिजेक्ट होते हैं जब व्यक्ति का पहले से कोई लोन चल रहा होता है उर व्यक्ति की लोन रिपेमेंट कैपेसिटी नहीं होती है। जिस वजह से कभी कभी आपका आवेदन एक बैंक की शर्तो पर खरा न उतरने के कारण मना कर सकता हैं।

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यहां आपको सलाह है की जब कोई एक बैंक लोन देने से मना कर दे तो किसी दूसरे बैंक या लोन कंपनी में लोन के लिए अप्लाई करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए। तुरंत अप्लाई करना चाहिए।

पुराने लोन के बारे में गलत जानकारी देने पर

कई बार पुराने लोन की राशि ज्यादा होने या समय पर भुगतान न करने की वजह से भी आपको नया लोन नहीं मिल पाता।

बैंक अक्सर डी टी ऑय प्रक्रिया के अनुसार काम करते है जिसके अनुसार जिन कंपनियों ने पिछले साल विभिन्न बैंकों से विभिन्न प्रकार के लोन लिए हैं एवं चुकाए भी हैं।

उन्हें बैंक “क्रेडिट हंगरी” श्रेणी में रखता है और ऐसी छोटी कंपनियों को बिज़नेस लोन देने से भी इंकार कर सकता हैं। हालाँकि लोन देने का और न देने का फैसला पूरी तरह बैंक के मताधिकार पर निर्भर करता है।

इनकम टैक्स न जमा करने की स्थिति में

बैंक अक्सर लोन आवेदन के साथ कुछ लिखित प्रमाण भी मांगता है। इन लिखित प्रमाणों में से एक आपकी पिछले दो सालो की आयकर रिटर्न (आईटीआर) की रसीद भी होती है।

इस आयकर की रसीद से बैंक अपने लेनदार के बारे में अधिक जान पाता हैं। अत: लोन आवेदन अस्वीकृत होने की संभावना भी घट जाती है। आयकर रसीद न होने की स्थिति में बैंक आपका आवेदन अस्वीकृत भी कर सकता हैं।

इस तरह के लोन जल्दी मिलते हैं

कार या होम लोन: कार लेने के लिए या घर खरीदने के लिए लोन बहुत आसानी से मिलता है। चूँकि यह लोन कार या घर के पेपर गिरवी रखकर मिलता है। इसीलिए इस तरह का लोन जल्दी स्वीकृत होता है। बशर्ते कागजात कम्प्लीट होना चाहिए।

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बिजनेस लोन: वर्तमान केन्द्र सरकार का भी मानना है की देश में अधिक से अधिक स्वरोजगार हो जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो सके। इसलिए सरकार द्वारा बिजनेस लोन की प्रक्रिया काफी आसान बना दी गई है।

बिजनेस लोन के लिए नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना, स्टैंड अप लोन योजना इत्यादि जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसमे कारोबारियों को बिजनेस लोन कम शर्तों पर आसानी से मिल जाता है।

ZipLoan से मिलता है सिर्फ 3 दिन* में बिजनेस लोन

एनबीएफसी क्षेत्र की प्रमुख आरबीआई रजिस्टर्ड कंपनी ZipLoan द्वारा कारोबारियों को 5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन* में बिना कुछ गिरवी रखे प्रदान किया जाता है।

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने पर सबसे अच्छी बात यह है की 9 EMI ठीक तरह से भुगतान करने पर 7.5 लाख तक का लोन टॉप – अप के रुप में भी मिल सकता है।

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बिजनेस लोन 6 महीने बाद प्री पेमेंट चार्जेस फ्री है। बिजनेस लोन प्राप्त करने की शर्तें निम्न हैं:

  • बिजनेस लोन दो से अधिक पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर 5 लाख से अधिक हो।
  • सालाना आईटीआर डेढ़ लाख से अधिक की फाइल होती हो।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर हो। (यह माता – पिता, भाई – बहन, पति – पत्नी, पुत्र – पुत्री के नाम पर हो तब भी मान्य किया जाता है।)

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