बैंक गारंटी किसी बड़ी रकम के बदले में गिरवी रखने वाला टर्म है। बड़े लोन के भुगतान के लिए किसी के बैंक अकाउंट को बैंक गिरवी के तौर पर रखता है। लोन एक फाइनेंशियल प्रोडक्ट है। लोन से वित्तीय लेन-देन जुड़ा होने के कारण अधिक सतर्कता बरती जाती है।

जब कोई व्यक्ति किसी बैंक या किसी लोन देने वाली कंपनी से लोन पाने के लिए आवेदन करता है तो लोन देने वाली संस्था सबसे पहले इस बात की जाँच करती है कि व्यक्ति की फाइनेंशियल कंडीशन क्या है।

वित्तीय कंडीशन से यहां इस बात से तात्पर्य है कि जो व्यक्ति लोन चाहता है क्या वह लोन चुकाने की फाइनेंशियल कंडीशन में है या नहीं है।

व्यक्ति अगर बिजनेस लोन के लिए आवेदन किया होता है तो ग्राहक के बिजनेस के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। यह देखा जाता है कि बिजनेस किस चीज का है और बिजनेस में इनकम कितनी हो रही है। साथ लोकेशन के बारे में जानकारी ली जाती है।

बिजनेस की जगह के बारे मे जानकारी प्राप्त की जाती है कि अक्सर बैंक और लोन देने वाली कंपनी बिजनेस की जगह या घर की जगह में किसी का मालिकाना हक खुद कारोबारी के नाम पर या कारोबारी के ब्लड रिलेटिव के नाम पर होना मांगते हैं।

वहीं पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को खुद की नियमित इनकम का प्रूफ दिखाना होता है। नियमित इनकम का प्रूफ के तौर पर नौकरी या रेगुलर बिजनेस का ट्रांजेक्शन दिखाना होता है।

लोन अगर संपत्ति के पेपर गिरवी रखकर मिलता है तो उसे सिक्योर्ड बिजनेस लोन कहा जाता है। वहीं बहुत से ऐसे भी लोग होते हैं जिनकों लोन की जरूरत तो होती है लेकिन उनके पास न तो कोई नौकरी होती है और न ही बिजनेस में नियमित आमदनी।

तो ऐसे लोगों को लोन कैसे मिलेगा? ऐसा तो नहीं हो सकता है कि इन लोगों को लोन की सुविधा ही न मिले। तो यहां पर जन्म होता है ‘बैंक गारंटी’ का। बैंकिंग सेक्टर में बैंक गारंटी एक ऐसा टर्म है जो जिसका प्रयोग कई तरह से किया जाता है। बैंक गारंटी के बारें में जानिए विस्तार से।

बैंक गांरटी क्या है?

बैंक गारंटी एक वित्तीय गारंटी है। मूलतः यह एक अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट होता है। इस कॉन्ट्रैक्ट में यह लिखा होता है कि एक पार्टी इस बात पर सहमत है कि उसके खुद के बैंक अकाउंट के जिम्मेदारी पर वह अमुख व्यक्ति (दूसरी पार्टी) को लोन देने के लिए सहमत है।

बैंक गांरटी की कुछ शर्ते होती हैं जिन्हें दोनों पार्टी को मानना होता है। शर्तों में यह लिखा होता है कि अमुख व्यक्ति बैंक से दिए गये लोन को वापस नहीं करने की स्थिति में वह व्यक्ति खुद से देनदारियों को पूरा करेगा।