आज की इस भागदौड़ वाली जिंदगी में बच्चों के समय बिताने का मौका बहुत कम ही लोगों को मिल पाता है। ऐसे में बच्चों को जो शिक्षा स्कूल में मिलती है, उसे तो ग्रहण करते हैं, लेकिन हैं वह घरेलू शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

अभी भी जो परिवार संयुक्त रुप से रहते हैं, उन परिवारों के बच्चों को तो फिर भी घर के अन्य सदस्य तमाम तरह की नैतिक शिक्षा देते रहते हैं। लेकिन, लेकिन, जिन परिवारों में पति – पत्नी दोनों वर्किंग रहते हैं, उनके यहां बच्चों को नैतिक शिक्षा और घरेलू शिक्षा का आभाव देखने को मिलता है।

नैतिक शिक्षा तो फिर भी समाजिक विज्ञान की कक्षाओं में मिल जाता है, लेकिन घरेलू शिक्षा का अभाव परस्पर देखने को मिलता ही रहता है। घरेलू शिक्षा में फाइनेंशियल एजुकेशन सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा होती है।

अगर बच्चों को कम उम्र से ही फाइनेंशियल एजुकेशन दी जाती है, तो बच्चे बड़े होने के बाद भी उसी सीख को याद रखते हैं और जितना उनकी इनकम होती है, उसी में वह अपना खर्च चलाने के बारे में विचार करते हैं। आइये आज कुछ ऐसे फाइनेंशियल एजुकेशन के बारें में जानते हैं, जिसे बच्चों को दिया जाना चाहिए।

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बचत की आदत डालना होता है सबसे महत्वपूर्ण

फाइनेंस के मामलों में बचत सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसा कहा जाता है कि जिसने बचत करना सीख लिया, उसने जीवन जीना सीख लिया। ऐसे में बच्चों को अगर कम उम्र से ही बचत करने का एजुकेशन दिया जाता है, तो उनके भविष्य के लिए बहुत बेहतरीन होगा।

बचत करना अचानक नहीं आता है, मतलब बचत करना कोई चैप्टर नहीं होता है, जिसे एक बार पढ़कर याद किया जा सकता है। बचत की शिक्षा देने के लिए अभिभावकों को खुद से पहल करना होगा। पहल का मतलब है की बच्चों के सामने खुद बचत करने का उदहारण पेश करना होता है।

बच्चों में बचत की शिक्षा देने के लिए और बचत की आदत डालने के लिए अभिभावक छोटी – छोटी चीजें में पैसों की बचत करना चाहिए, इससे बच्चे देखेंगे की कैसे उनके अभिभावक पैसों की बचत कर रहे हैं। ऐसे में जब बच्चों को बचत करने की आदत डालने के लिए कहेंगे तो बच्चे उस पर अमल करेंगे।

बजट बनाने की शिक्षा होती है बेहद जरूरी

अगर किसी की आमदनी अठ्ठनी है और खर्चा रुपैया है तो कैसे चलेगा? इस तरह का व्यक्ति एक समय बाद भारी कर्ज में डूब जाता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति की आमदनी अठ्ठनी है और उस व्यक्ति का खर्च भी अट्ठनी के भीतर ही है तो उस व्यक्ति खर्च उसके बजट में होता है।

अपनी बजट के भीतर खर्च करने वाले व्यक्तियों को कभी कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे में बच्चों को अगर कम उम्र से ही बजट बनाने और बजट के भीतर ही खर्च करने के बारें में शिक्षा दी जाये तो उनके भविष्य के लिए काफी बेहतर रहेगा।

बैंकिंग से परिचय कराना

बैंकिंग एक ऐसा शब्द है जिससे एक समय बाद सभी लोगों का पाला पड़ता है। बैंकिंग में कुछ ऐसे शब्द होते हैं, जिसके बारें में जानकारी जितनी कम उम्र में दी जाये, उतना ही बेहतर रहता है।

बच्चों को बैंकिंग से संबंधित शब्दों जैसे: बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक, बैंकिंग मोबाइल ऐप, अकाउंट स्टेटमेंट, लोन, होम लोन, बिजनेस लोन, EMI, ब्याज इत्यादि के बारे में जानकारी देना महत्वपूर्ण होता है।

बच्चों को बैंकिंग की शिक्षा देने से बच्चों को इसके बारे में जानकारी होगी और बच्चे भी बैंकिंग का उपयोग करने की तरफ आकर्षित होंगे।

कर्ज या बिजनेस लोन की जानकारी देना होता है जरूरी

लगभग सभी लोगों के जीवन में एक ऐसा समय आता है, जब उन्हें लोन या बिजनेस लोन लेने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में बच्चों को अगर कम उम्र से ही लोन या बिजनेस लोन के बारें में और उसके फायदे – नुकसान के बारे में जानकारी दी जाती है, तो बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर रहेगा।

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