एक बहुत पुरानी कहावत है “अग्र सोची, सदा सुखी” यानी आगे सोचने वाले लोग सुखी रहते हैं। इस कहावत को लिखने के पीछे बड़ा कारण है। जो लोग भविष्य के बारे में नहीं सोचते हैं या प्लान नहीं करते हैं उन्हें बाद में जाकर बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

आज से करीब 30 साल साल पहले लोगों का विवाह बहुत कम उम्र में ही हो जाता था। विवाह की औसत उम्र 16 साल से 20 साल थी। उस समय इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाता था कि जिसकी शादी हो रही है वह करता क्या है।

यानी कुछ काम – धंधा, नौकरी इत्यादि करता भी है या कुछ नहीं करता है। इस बात को पूरी तरह इग्नोर कर दिया जाता था। जिसके वजह से कम उम्र में ही लोगों के बच्चे पैदा हो जाते थे। जब बच्चे पैदा हो जाते थे तो असली मुश्किलें शुरु हो जाती थी।

मुश्किलें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से घेर लेती थी। महिला का शरीर कमजोर होने के कारण कई तरह की बीमारी घेर लेती थी। वहीं पुरुष धन जुटाने के लिए मानसिक तौर से परेशान रहने लगता था। इन सब परेशानियों से बचा जा सकता है।

दाम्पत्य जीवनं में परेशानियों से बचने के लिए सबसे जरूरी होता है प्लानिंग करना। अगर कोई भी कार्य प्लानिंग करके किया जाता है तो उसका परिणाम सुखद होता है। ठीक इसी तरह बच्चे बच्चे के भविष्य को लेकर भी प्लानिंग बहुत आवश्यक है।

अगर बच्चे के भविष्य की प्लानिंग नहीं होगी तो बच्चे पर इसका बुरा असर पड़ेगा। बच्चे का भविष्य उज्जवल होने के बजाय अंधकार से भर जायेगा। आइये इस आर्टिकल में समझते हैं कि बच्चे का भविष्य सुनहरा बनाने के लिए क्या प्लानिंग होनी चाहिए।

मिल कर तय करें कि बच्चा कब चाहिए

शिशु होना बड़ी बात नहीं है। शिशु का पालन – पोषण उचित तरीके से करना बड़ी बात है। आज की डेट पति – पत्नी दोनों कामकाजी होते हैं। ऐसे में बच्चा का पालन – पोषण कौन करेगा। इसको लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है।

ऐसे में सबसे उचित सलाह यहीं है कि बच्चे को भगवान का दिया हुआ फल नहीं समझना चाहिए। बल्कि प्लानिंग करके बच्चा पैदा करना चाहिए।

जब पति – पत्नी दोनों को लगे कि वह बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं तभी बच्चे की प्लानिंग करना चाहिए। जब शिशु पैदा हो जाये तो उसके पालन – पोषण के लिए 1 साल तक पति – पत्नी में से किसी एक को घर पर मौजूद होना चाहिए।

प्री स्कुल में एडमिशन कराना

प्री स्कुल में पढ़ाई नहीं होती है। स्कुल के लिए तैयार किया जाता है। यानी बच्चे को उस माहौल में ढाला जाता है जो माहौल उसे स्कुल में मिलने वाला होता है।

प्री स्कुल में बच्चा दूसरे बालकों से मिलता है, घुलता – मिलता है। बालकों से परिचय होता है। खेलता है। हँसता है। इस तरह वह एक ऐसे माहौल में ढलता है जो उसे अभी तक घर पर नहीं मिला होता है।

इससे बालक का सर्वागीण विकास होने में मदद मिलती है। साथ ही साथ बालक स्कुल के माहौल के लिए भी तैयार होता है। बालक का प्री स्कुल में एडमिशन उसके भविष्य के सुनहरे भविष्य का पहली सीढ़ी होती है।

See also  राहत पैकेज पार्ट 4: "आत्मनिर्भर भारत" अभियान में 8 बड़े इंडस्ट्रियल क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा

घर का माहौल ठीक रखना

बालक बड़ा होकर क्या बनेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि बालक की पढ़ाई कैसी हुई है। वहीं बालक बड़ा होकर कैसे व्यवहार करेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि बालक की परवरिश किस माहौल में हुई है।

इस लिहाज से देखा जाये तो घर का माहौल ठीक रखने की जिम्मेदारी बालक के माता – पिता की ही होती है। घर का माहौल ठीक रखने से तात्पर्य है – घर में झगड़ा न होना, बेवजह बहुत अधिक शोरगुल न होना और बड़े को सम्मान देना इत्यादि।

बालक जो चीजें घर में देखता है वहीं चीजे वह ग्रहण करता है और उसे अनुसार व्यवहार करने की कोशिश करता है। यानी बालक का आइडियल पर्सन उसके घर के लोग ही होते हैं। इस लिहाज से देखें तो बालक का भविष्य सुनहरा बनाने में घर का माहौल बहुत महत्वपूर्ण रोल प्ले करता है।

बालक के रूचि के अनुसार विषयों को पढ़ने की छूट देना

अक्सर ऐसा होता है कि जो उपलब्धि पिता हासिल नहीं कर पाए होते हैं उस उपलब्धी को पाने के लिए बेटे की तरफ नजर घुमाते हैं। यानी खुद के सपनों को बेटे के कंधे पर लाद देना। यह गलत है। ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए।

बालक जैसे – जैसे बड़ा होता है वैसे – वैसे उसकी रूचि और पसंद बनती और बदलती चली जाती है। वह उन्मुक्त होकर जीना चाहता है। वह अपनी पसंद की विषयों की पढ़ाई करना चाहता है। उसे वैसा करने देना चाहिए।

See also  खुशखबरी: एमएसएमई कारोबारियों की सरकार के तरफ से मिली सौगात

हमेशा इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि कोई भी विषय आज की डेट में छोटी नहीं होती है। आज की तारीख में सभी विषयों में बेहतरीन करियर है। बच्चे का भविष्य तभी सुनहरा होगा जब बालक अपनी पसंद की विषय पढ़ेगा और उसमें बेहतर करेगा।

बच्चे के भविष्य के लिए पैसों की बचत करें

पैसा कुछ भी नहीं है। पैसा सब कुछ है। यह दोनों ही बातें बिल्कुल सत्य है। पैसे से ही भविष्य सुनहरा बनाया जाता है। पैसे से ही भविष्य खराब हो जाता है।

बच्चा जब युवा हो जाता है और 12वीं कक्षा पास हो जाता है तो उसके बाद वह कॉलेज में जाता है। अगर कॉलेज अच्छा नहीं हुआ तो बच्चा वहां से कुछ सिख नहीं सकता है। इसलिए बालक के उज्जवल भविष्य के लिए बेहतर कॉलेज में एडमिशन दिलाना बेहद जरूरी होता है।

बच्चे के भविष्य के लिए बचत करना बेहद जरूरी होता है। बालक जिस कॉलेज में जाना चाहता है अगर वहां कि फीस अधिक हुई तो बचत किये हुए पैसों से फीस की रकम चुकाया जा सकता है।

बालक बड़ा होकर नौकरी न करने का विचार करता है तो उसके लिए बचत किये हुए पैसों से बिजनेस भी शुरु किया जा सकता है। जरूरी नहीं है कि बिजनेस शुरु करने के लिए बहुत अधिक रकम ही इन्वेस्ट किया किया जाये।

कम पैसों में भी बिजनेस शुरु किया जा सकता है। बाद में जब बिजनेस चलते लगे और ग्राहकों के बीच बिजनेस की मांग बढ़ जाये तो बिजेनस लोन लेकर बिजनेस का विस्तार भी किया जा सकता है। इस तरह आप अपने बच्चे का भविष्य सुनहरा बना सकते हैं।

Related Posts

MSME Full FormMSME RegistrationCGTMSE
MSME LoanVAT RegistrationUdyog Aadhaar
GST RegistrationStand Up India SchemeCGTMSE Fee
Shop LoanWhat is CGSTDownload GST Certificate
PM SVAnidhi SchemeCancelled ChequeUPI Full Form
Business Loan EligibilityGST Full FormE-Way Bill Unblocking
CIN NumberGST LoginUAN Number