बाबा रामदेव का नाम आज कौन नहीं जानता। बाबा रामदेव की पहचान आज योग गुरु होने के साथ ही सफल व्यवसायी की भी है। पतंजलि संस्थान के संरक्षक भी हैं। बहुत कम लोग यह जानते होंगे की आज का चमकता सितारा कभी गर्दिश में भी रहा है। गर्दिश भी ऐसी की कभी दो वक्त के खाने को भी मोहताज होना पड़ा हो। कहते हैं न की वक्त किसी गुलाम नहीं होता, कब किसकी बाजी पलट जाए और कब कौन अमीर से गरीब बन जाए और कोई गरीब से अमीर बन जाए कहा नहीं जा सकता है।

योग गुरु रामदेव की गर्दिश से फलक पर छाने तक की कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। पहले योग गुरु बनना फिर Patanjali जैसा ब्रांड बनाना और Patanjali ब्रांड का देश में तीसरा सबसे बड़ा ब्रांड बनने की कहानी कारोबारियों के लिए काफी प्रेरणादायक है। आइए जानते हैं कैसे योग गुरु रामदेव ने स्थापित किया पतंजलि ब्रांड और कैसे Patanjali ब्रांड बना भारत का तीसरा सबसे बड़ा ब्रांड।

योग गुरु रामदेव का संक्षिप्त परिचय- पतंजलि के जनक

बाबा रामदेव का पूरा नाम रामकृष्ण यादव है। अब रामकृष्ण यादव को अधिकांश लोग स्वामी रामदेव के नाम से ही जानते है। रामदेव जी योगासन व प्राणायाम योग में महारत रखते है। जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं। भारत से भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये अभियान इन्होंने प्रारम्भ किया।

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देश के लोगों को देश में बने प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के लिए स्वदेशी आंदोलन शुरु करने का श्रेय भी योगगुरु रामदेव जी को जाता है। स्वदेशी अपनाने के शुरु किए गए जनांदोलन को धार देने के लिए ही Patanjali ब्रांड की शुरुवात किये और आज यह ब्रांड देश का तीसरा सबसे बड़ा ब्रांड है। Patanjali योगपीठ के संस्थापक योगगुरु बाबा रामदेव को आज भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में जाना – पहचाना जाता है

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पतंजलि क्या है?

Patanjali का पूरा नाम “पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी” है। इसकी जिसकी स्थापना बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण दोनों ने संयुक्त रुप से किया है। आचार्य बालकृष्ण इस कंपनी के सीईओ है। Patanjali का कारोबार दिनों – दिन बढ़ता जा रहा है।

Patanjali के पूरे देश में 4000 से भी ज्यादा रिटेल आउटलेट है। जिसमे Patanjali की सारी सामग्री उपलब्ध है। इसके अलावा कंपनी को अधिक लोगो तक आसानी से पहुँचाने के लिए Patanjali का सामान अब दूसरे बड़े स्टोरों के अलावा छोटी – छोटी दुकानों पर भी आसानी से उपलब्ध हो रहा है।

पतंजलि ब्रांड कैसे बना?

क्या आपको पता है पतंजलि आयुर्वेद ब्रांड आज देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रहा है। Patanjali आयुर्वेद की स्थापना महज एक दशक पहले हुई है। महज एक दशक पुरानी Patanjali कंपनी ने अपने देश में 80 सालों से मौजूद हिंदुस्तान युनिलीवर (एचयूएल) को कड़ी टक्कर दे दिया है। कुछ मायने में तो Patanjali कंपनी हिंदुस्तान युनिलीवर से आगे भी खड़ी है।

Patanjali आयुर्वेद कंपनी के कारोबार की बात करें पिछले वित्त वर्ष में 10,561 करोड़ रुपये का कारोबार रहा। यह एचयूएल की बिक्री का एक तिहाई है। Patanjali की सफलता के पीछे कई कारण हैं। स्वदेशी माल की ब्रांडिंग के साथ Patanjali लोगों के बीच अपनी छवि ‘घरेलू कंपनी’ के रूप में बनाने में सफल रही है।

कैसे बना पतंजलि भारत का तीसरा सबसे बड़ा ब्रांड?

देशी। स्वदेशी। ये एक ऐसे शब्द हैं जिनसे हर भारतीय जुड़ जाता है। शायद Patanjali कंपनी की सफलता में भी इन शब्दों का खास योगदान है। Patanjali कंपनी को भारत में सफलता जिन कारणों से मिली उनमें शामिल हैं:

पतंजलि ब्रांड की सफलता: स्वदेशी शब्द की मार्केटिंग करना

स्वदेशी एक ऐसा शब्द है जिसमे एक भाव जुड़ता है। यह भाव होता है अपनत्व का। किसी प्रोडक्ट को स्वदेशी या देशी कहकर बेचने में अधिक मेहनत नहीं करना पड़ता। लोगों को स्वदेशी शब्द पर इतना भरोसा होता है की वह कहते हैं- “देशी है तो बढ़िया ही होगा” Patanjali ने इस चीज को बेहतर तरीके से समझा  और शब्दों का मार्केटिंग में उपयोग किया। हर प्रोडक्ट के पीछे बोला गया की यह देशी है या स्वदेशी है। Patanjali कंपनी की सफलता में स्वदेशी और देशी शब्द की मार्केटिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाया।

पतंजलि की सफलता का राज: प्रोडक्ट की गुणवत्ता

ऐसा नहीं है की सिर्फ देशी या स्वदेशी बोलकर ही Patanjali कंपनी ने मार्केट में अपनी जगह बना लिया। देशी और स्वदेशी शब्द के भरोसे एक बार प्रोडक्ट बिक जाता है लेकिन एक समय बाद उस प्रोडक्ट को यूज नहीं करता, लेकिन Patanjali प्रोडक्ट के साथ ऐसा नहीं है। Patanjali कंपनी के प्रोडक्ट में पर्याप्त गुणवत्ता होती है। इस चीज को कंपनी ने बरक़रार रखा जिसके वजह से लोगों का Patanjali प्रोडक्ट पर विश्वास बना।

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