जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान ख़ारिज हो गए हैं। 7 अगस्त 2019 की शाम आर्टिकल 370 समाप्त करने के प्रस्ताव को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी। आर्टिकल 370 को समाप्त करने संबंधी संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 7 अगस्मंत 2019 जूरी दे दी। अब जम्मू-कश्मीर के पास विशेष राज्य का दर्जा नहीं रहेगा। वहां लगी हुई सभी तरह की बंदिशों को खत्म कर दिया गया है। इस शुभ कार्य का फल यह होगा की अब जम्मू-कश्मीर में व्यापार के मौकों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होगी।

आर्टिकल 370 क्या था?

आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करता था। आर्टिकल 370 के द्वारा कश्मीर के लोगों को कश्मीर में कुछ विशेष अधिकार प्राप्त थे। इसी आर्टिकल द्वारा जम्मू-कश्मीर का अपना खुद का अलग संविधान था। जम्मू-कश्मीर का शासन भारतीय संविधान से न चलकर जम्मू-कश्मीर के संविधान से चलता था। इस आर्टिकल को 17 नवंबर 1952 को लागू किया गया था।

कई प्रावधान थे अतार्तिक

आर्टिकल 370 के द्वारा कश्मीर में कुछ ऐसे कानून लागू थे जो अतर्तिक थे, जैसे- जम्मू-कश्मीर का अपना खुद का झंडा होना, जम्मू-कश्मीर के लोगों को दोहरी नागरिकता मिलना, जम्मू-कश्मीर में दूसरे प्रदेश के लोगों का जमीन खरीदने पर पाबंदी लगना, कश्मीरी लड़की अगर किसी दूसरे प्रदेश के लड़के से शादी कर ले तो उसकी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता का खत्म हो जाना, अगर कोई पाकिस्तान का लड़का जम्मू-कश्मीर में शादी कर ले तो उसे जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाना इत्यादि जैसे प्रावधान थे तो बहुत अटपटे तो थे। अब एक देश एक संविधान, एक नागरिकता लागू हो जाने से समानता आएगी।

जम्मू-कश्मीर में व्यापार का संभावना

कश्मीर एक ऐसा प्रदेश है जहां की आर्थिक व्यवस्था अधिकतर खेती और पर्यटन पर आधारित है। चूंकि अभी तक जम्मू-कश्मीर में व्यापार की व्यवस्था केवल जम्मू और कश्मीर के बाशिंदों के लिए थी तो इसका क्षेत्र काफी सीमित था। आर्टिकल 370 हटने का सबसे अधिक प्रभाव बिजनेस सेक्टर पर पड़ेगा।  इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है दूसरे प्रदेश के कारोबारियों का जम्मू-कश्मीर में कारोबार की अनुमति प्राप्त होना। कारोबार की दृष्टि से देखे तो टूरिज्म, रियल एस्टेट, हैंडीक्रॉफ्ट और फूड प्रोसेसिंग इत्यादि सेक्टर के बिजनेस बढ़ने की भरपूर संभावना है।

जम्मू-कश्मीर में टूरिज्म उद्योग

कश्मीर में 2019 के जुलाई महीने 1 लाख 52 हजार के करीब और जून में 1 लाख 64 हजार के करीब पर्यटकों की संख्या थी। यह संख्या बढ़ती ही रहती है। जम्मू-कश्मीर में पूरे देश के पर्यटक जाते हैं। ऐसे में परिवहन और ठहरने के लिए होटल, लाज का कारोबार फल-फूल सकता है। अगर रियल एस्टेट इंडस्ट्री जम्मू-कश्मीर में इन्वेस्ट करती है तो फिर कारोबार तो बढ़ेगा ही इसके साथ ही रोजगार में भी अभूतपूर्व  बढ़ोतरी होगी। बढ़े हुए रोजगार पर सभी प्रदेश के लोगों का समान हक़ होगा।

फूड प्रोसेसिंग उद्योग

आर्टिकल 370 खत्म होने से खाद्य पदार्थों के भी कारोबार का विस्तार होगा। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का भी इस बाबत पर कहना है की सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में एक मेगा फूड पार्क की स्थापना की जाएगी। फूड पार्क बनने के बाद किसानों, प्रसंस्करण कर्ताओं के साथ रिटेल कारोबारियों को एकसाथ लाते हुए एग्रीकल्चर प्रोडक्ट को मार्केट से जोड़ा जायेगा। इससे किसानों को सीधे आर्थिक लाभ प्राप्त होगा और कारोबार बढ़ने के साथ ही रोजगार भी बढ़ने की पूरी संभावना है।

जम्मू-कश्मीर में बैट इंडस्ट्री

क्या आपको पता है की कश्मीर ही भारत का एक मात्र राज्य है जहां में विलो बैट बनते हैं? विलो बैट यानी वह बैट जिससे दुनिया भर के बेहतरीन बल्लेबाज खेलना पसंद करते हैं। विलो बैट इंग्लैण्ड के साथ ही भारत के जम्मू-कश्मीर में भी बनते हैं। जम्मू-कश्मीर विलो पेड़ के बाग़ अच्छी संख्या में हैं। अब विलो बैट की कारीगरी सीखने का मौका देश भर के लोगों का प्राप्त होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब कश्मीर के विलो बैट दुनिया भर में अपनी पहुंच बनाएंगे, क्योंकि इंडस्ट्री में निवेश बढ़ेगा। साथ ही, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम (PMEGP) के तहत ऐसे बिजनेस को 90 फीसदी तक लोन दिया जाता है। 15 से 25 फीसदी तक सब्सिडी भी दी जाती है।

इंडस्ट्री चैंबर खोलेंगे ऑफिस 

इंडस्ट्री चैंबर यानी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने वाली संस्थाएं जैसे ऐसोचैम, फिक्की और सीआईआई भी अपने ऑफिस जम्मू-कश्मीर में खोलने की तैयारी कर रही हैं। इंडस्ट्री चैंबर्स जम्मू-कश्मीर में अपना ऑफिस खोलकर वहां पर निवेश (इन्वेस्ट) की संभावनाओं की तलाश करेंगे। सब कुछ ठीक रहा तो बेहतर रणनीति के तहत इन्वेस्ट करेंगे। इस बाबत पर इंडस्ट्री चैंबर ऐसोचैम के अध्यक्ष बी के गोयनका कहना है की “सरकार ने अब एक देश, एक संविधान की अवधारणा को साकार कर दिया है। ऐसे में इंडस्ट्री चैंबर भी जम्मू-कश्मीर के विकास में अपना सहयोग करेंगे। हम वहां पर सबसे पहले कार्यालय स्थापित करेंगे। इंडस्ट्री चैंबर टूरिज्म, रियल एस्टेट, हैंडीक्रॉफ्ट और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को तलाशेंगे”।

रोड के मुकाबले रेल द्वारा वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट क्यों होता है बेहतर?

इस तरह देखा जाए तो जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों के हटने के बाद वहां पर अब आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। पहले जहां जम्मू-कश्मीर में कारोबार काफी हद तक बंधा हुआ था, उसका अब विस्तार होने और आर्थिक सुधार होने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।

ZipLoan से लीजिए बिजनेस बढ़ाने के लिए लोन

जम्मू-कश्मीर के अतिरिक्त 15 शहरों में फिनटेक सेक्टर की प्रमुख NBFC कंपनी “ZipLoan” द्वारा कारोबारियों को बिजनेस बढ़ाने के लिए 1 सर 5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन में प्रदान किया जाता है। ZipLoan द्वारा जिन शहरों में बिजनेस लोन प्रदान किया जाता है उनमें शामिल हैं:- मुंबई, दिल्ली,  एनसीआर, लखनऊ, भोपाल, देवास, फरीदाबाद, रुड़की, देहरादून, इंदौर, हरिद्वार, ऋषिकेश, जयपुर, सहारनपुर, नोएडा।

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बहुत कम शर्तों पर मिलता है बिजनेस लोन

  • बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख तक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

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  • बिजनेस लोन की रकम अप्लाई करने के सिर्फ 3 दिन के भीतर मिल जाती है। (यह सुविधा जरुरी कागजी दस्तावेजों को उपलब्ध रहने पर मिलती है)
  • लोन के घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है।
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  • लोन की रकम 6 महीने से लेकर 36 महीने के बीच वापस कर सकते है।

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