आर्थिक मंदी यानी मार्केट से पूंजी का गायब हो जाना। वर्तमान में पूरे देश में आर्थिक मंदी की आहट सुनाई पड़ रही है। विश्व के तमाम दिग्गज अर्थशास्त्रियों ने पूरे विश्व में आर्थिक मंदी को लेकर भविष्यवाणी कर दिया है। भारत में मंदी का प्रभाव स्पष्ट रुप से कई सेक्टर के दिखाई दे रहा है। अभी कुछ समय पहले आटोमोबाइल सेक्टर कई दिग्गज कंपनियों जैसे- मारुति, महिंद्रा, टाटा इत्यादि के यहां से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छटनी हुई है

ऑटो सेक्टर में आर्थिक मंदी

पिछले दिनों लगातार खबरें आई, जिनकी हेडिंग कुछ इस तरह थी- महिंद्रा ऑटोमोबाइल से हुई कर्मचारियों की छंटनी, मारुति कंपनी से हुई हजारों कर्मचारियों की छंटनी, टाटा मोटर्स से निकाले हजारों कर्मचारी इत्यादि- इत्यादि। देश में ऑटो सेक्टर में पिछले साल की तुलना में 30 से 35 फीसदी बिक्री कम होने की खबर है। प्रमुख ऑटो कंपनी मारुति सुज़ुकी समेत ह्यूंडई, महिंद्रा, हॉन्डा कार और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स जैसी प्रमुख वाहन कंपनियों की बिक्री में जुलाई में दहाई अंक की गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे सैकड़ों डीलरशिप भी बंद हो गई। इसके चलते हजारों लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए।

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टेक्सटाइल सेक्टर में आर्थिक मंदी

देश भर में एक-तिहाई टेक्सटाइल मिलें बंद हो चुकी हैं। ऐसा नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स कॉरपोरेशन (NITMA) का दावा है। ऑटो सेक्टर में हुई छटनी के समाचार को लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे तब तक टेक्सटाइल सेक्टर के एसोसिएशन ने बाकायदा अख़बार में विज्ञापन निकाला की टेक्सटाइल सेक्टर में आर्थिक मंदी भयंकर रुप से आ चुकी है जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे यानी अब कंपनियों के पास कर्मचारियों को निकालने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

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पारलेजी से हो रही 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी

अभी यह विज्ञापन चल ही रहा था कि तब तक  मशहूर बिल्कुल कंपनी ‘पारलेजी’ द्वारा 10 हजार कर्मचारियों को निकालने की भयंकर सूचना सामने आ रही है। पारलेजी कंपनी के तरफ से यह कहा जा रहा है की प्रोडक्ट नहीं बिकने के कारण कारोबार में कई महीनों से लगातार घाटा हो रहा है। कारोबार में घाटा होने से बचने के लिए और अपने अस्तिव को बचाने के लिए कंपनी ने करीब 10 हजार कर्मचारियों की छटनी करने का निर्णय किया है।

घर बनकर तैयार हैं लेकिन खरीददार नहीं हैं

रियल एस्टेट की मंदी इस कदर व्याप्त हो चुकी है की बिल्डर घर बना चुके है लेकिन घर कोई खरीददार नहीं हैं। यह चौंकाने वाला परिणाम है। रिसर्च परिणाम के अनुसार- मार्च महीने 2019 तक भारत के प्रमुख 30 शहरों में 12 लाख 8 लाख घर तैयार हैं। जो की 2018 की अपेक्षा 7 फीसदी अधिक है। मार्च 2018 में 12 लाख बिना बिके मकान थे। वही 2019 में 12 लाख 8 लाख। यानी 8 अधिक मकान अभी तक बिक नहीं पाए है। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े तक़रीबन 250 छोटे- बड़े उद्योग हैं। जो मकान तो बना चुके हैं लेकिन बिकने का इंतजार कर रहे हैं।

कारोबार के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। सोचिए ऐसी दशा में देश में क्या हो रहा है? अर्थव्यवस्था में तेजी से नरमी फ़ैल रही है। जो निवेशक है वह मार्केट में पैसा लगा चुके है अब उनको लाभ नहीं हो रहा है, उनकी संपत्ति घट रही है और लोगों की नौकरियां समाप्त हो रही है। देश में बेरोजगारी का माहौल व्याप्त होता जा रहा है। अब सवाल उठता है कि आर्थिक मंदी क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

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आर्थिक मंदी का लघु उद्योग पर प्रभाव

जब भी आर्थिक मंदी का दौर आता है तब पूंजी (पैसे) आन और जाना दोनों बंद हो जाते हैं। ऐसी कंडिशन में सबसे अधिक प्रभाव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग पर प्रभाव पड़ता है। चुकी लघु उद्योग का धंधा पूरी तरह उस पूंजी पर निर्भर करता है जो धन लघु उद्योग द्वारा निर्मित किए गए प्रोडक्ट की बिक्री से मिलता है। अब जब लोगो के पास नौकरियां नहीं होंगी तो उनके पास खर्च करने के पैसा नहीं रहेगा तो फिर वह प्रोडक्ट खरीदेंगे कैसे? जब प्रोडक्ट नहीं बिकेगा तो स्वाभाविक सी बात है प्रोडक्ट स्टक हो जायेगा और जिसका सीधा असर लघु उद्योग पर पड़ेगा।

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आर्थिक मंदी क्या है?

आर्थिक मंदी को अगर शब्द में बताना चाहें तो इसे कम कह सकते है कि जब पैसों का प्रवाह यानी पैसे आना और खर्च होना बंद हो जाता है तो उसे आर्थिक मंदी कहते हैं। आर्थिक मंदी को परिभाषा के अनुसार देखे तो- जब इंटरनेशनल लेवल पर चीजों का और सर्विसेस के प्रोडक्शन में गिरावट हो रही हो और सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी तीन महीने डाउन ग्रोथ में हो तो इस स्थिति को आर्थिक मंदी कहा जाता है। हालांकि यह मंदी को समझने के लिए बेसिक जानकारी है। मंदी का व्यापक स्वरूप बहुत व्यापक होता है। इसे हम अलगे ब्लॉग में विस्तार से बतायेंगे।

लघु उद्योग आर्थिक मंदी से कैसे बच सकते हैं?

आर्थिक मंदी से बचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। पूंजी यानी पैसों का संतुलन। जब किसी भी कारोबार में इतना कैपिटल होता है की जिससे वह आगे 1 साल तक बिना किसी कठिनाई चल सके। अपने कर्मचारियों को सैलरी और प्रोडक्ट बनाने के लिए माल की कीमत दे सके तो आर्थिक मंदी से बचा जा सकता है। दूसरी बात रणनीति के तौर बेहतर प्रोडक्ट के दामों में गिरावट भी एक उपाय हो सकता है।  लेकिन प्रोडक्ट के दामों में गिरावट होने से ब्रांड की विश्वसनीयता पर सवाल उठने का खतरा रहता है। ऐसे में निश्चित पूंजी (धन) इक्कठा करने के बाद बेहतर हालात होने का इंतजार करना चाहिए। यह रणनीतिक तौर पर बेहतर साबित होता है।

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ZipLoan से मिलेगा वर्किंग इक्विपमेंट लोन

वर्किंग इक्विपमेंट का मतलब होता है- बिजनेस चलाने के लिए आवश्यक धन। कारोबारी किसी भी अप्रिय हालात से बचने के लिए बिजनेस लोन का सहारा ले सकते है। अब सवाल हो सकता है की बिजनेस लोन कहां से जल्दी से मिलेगा? तो इसका उत्तर है ZipLone से मिलेगा सिर्फ 3 दिन में बिजनेस लोन।

ZipLoan’ फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख NBFC यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है। ‘कंपनी द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम कारोबारियों को लोन दिया जाता है। कारोबार बढ़ाने के लिए बेहद कम शर्तों पर 1 से 5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन में प्रदान किया जाता है।

ZipLoan से बिजनेस लोन पाने की शर्ते बहुत कम हैं 

  • बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख से अधिक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने के कई फायदे हैं 

  • बिजनेस लोन की रकम अप्लाई करने के सिर्फ 3 दिन के भीतर मिल जाती है। (यह सुविधा जरुरी कागजी दस्तावेजों को उपलब्ध रहने पर मिलती है)
  • लोन घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है।
  • बिजनेस लोन की रकम 6 महीने बाद प्री पेमेंट फ्री है।
  • लोन की रकम 12 से लेकर 24 महीने के बीच वापस कर सकते है।

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