कई लोग आयकर विभाग यानी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नाम सुनते ही डर जाते हैं। बिना कोई गलती किये डर जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अक्सर अख़बारों में छपता रहता है कि यहां पर इनकम टैक्स विभाग के अधिकारीयों ने छापा मारा, इतने लोगों को गिरफ्तार किया।

इतनी संपत्ति जप्त किया। इतने लोगों को जेल भेजा इत्यादि। इन सभी खबरों से सीधे तौर पर जनता प्रभावित होती है। जबकि ऐसा कुछ नही है कि इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी किसी को बिना किसी कारण गिरफ्तार कर लें या छापा डाल दें।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत सरकार द्वारा हमें तमाम सुविधाएं दी जाती हैं। इन सुविधाओं में ट्रेन, मेट्रो, हवाई जहाज, सरकारी विद्यालय, सरकारी कालेज, सरकारी यूनिवर्सिटी, सरकारी कार्यालय इत्यादि हैं। इन सभी सुविधाओं का संचालन करने के लिए सरकार अपने नागरिकों से टैक्स वसूलती है।

टैक्स उन्हीं नागरिकों से वसूल किया जाता है जो नागरिक टैक्स चुकाने के लिए पात्र होते हैं। टैक्स चुकाने की पात्रता तय करने के लिए सरकार द्वारा टैक्स स्लैब बनाया गया है। जो नागरिक टैक्स स्लैब के अंदर आते हैं उनकों टैक्स भरना होता है।

जो नागरिक टैक्स स्लैब के बाहर होते हैं उनकों टैक्स नही चुकाना होता है। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि यह कैसे निर्धारित होता है कौन टैक्स स्लैब में आयेगा और कौन टैक्स स्लैब के बाहर रहेगा। तो इस सवाल का उत्तर है: इसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) यानी इनकम टैक्स विवरणी दाखिल करना होता है।

समान्य तौर पर यह भी सवाल होगा कि इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर फाइल कौन करता है? आईटीआर फाइल कैसे होती है? आईटीआर फाइल करने का लाभ यानी फायदा क्या है? आइये इस आर्टिकल में आपको आईटीआर के विषय में सभी जानकारी देते हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर क्या है?

जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि जनता को जनसुविधा प्रदान करने के लिए सरकार जनता से टैक्स वसूलती है। इस आयकर या इनकम टैक्स (Income Tax) कहते हैं। सरकार को आयकर (Income Tax) से जो इनकम होती है सरकार द्वारा उस रकम का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों और जनता को सुविधा और सेवाएं देने के लिए करती है।

इनकम टैक्स रिटर्न वह होता है जिसमे कोई व्यक्ति अपने आमदनी का विवरण सरकार को फॉर्म में भरकर एक साल में एक बार जमा करता है। जिस फॉर्म में लोग अपनी आमदनी का विवरण भरकर आयकर विभाग में जमा करते हैं उस फॉर्म को आईटीआर फॉर्म कहा जाता है। आईटीआर फॉर्म कई तरह का होता है।

इस तरह हम कह सकते हैं कि आईटीआर किसी की आमदनी का लिखित हिसाब – किताब है। लिखित में व्यक्ति अपने आमदनी के बारे में केंद्र सरकार को विस्तार से यह जानकारी देते हैं कि उस फाईनेसियल ईयर यानी वित्त वर्ष में व्यक्ति ने अपनी नौकरी, कारोबार या पेशे से कितनी रकम कमाई।

इसके साथ ही इसमें व्यक्ति सरकार द्वारा निर्धारित टैक्स बचत के विकल्प में इन्वेस्ट यानी निवेश करने, जरूरी चीजों पर खर्च करने (री इम्बर्स्मेंट या बिल जमा करने पर टैक्स छूट के बारे में) और एडवांस टैक्स (अग्रिम कर) चुकाने की जानकारी भी देते हैं।

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आईटीआर और इनकम टैक्स क्या एक ही है?

अधिकतर लोग इस गलतफहमी में रहते हैं कि आईटीआर फाइल किया तो टैक्स भरना पड़ेगा। लेकिन आपको जानकारी के लिए बता दूं कि आईटीआर और इनकम टैक्स बिल्कुल अलग – अलग दो चीजें हैं। यानी आईटीआर और इनकम टैक्स एक नही है बल्कि दोनों अलग – अलग दो चीजें है।

अगर कोई व्यक्ति अपनी आय प्रमाणित रखना चाहता है मतलब व्यक्ति को कहीं यह दिखाना हो कि उसकी वार्षिक आय इतनी है उसे जरुर आईटीआर फाइल करना चाहिए। क्योंकि, आईटीआर दस्तावेज को प्रमाणित आय साक्ष्य के तौर पर मान्यता प्राप्त है।

हम यह भी कह सकते हैं कि देश के कानून के हिसाब से आयकर रिटर्न (ITR) हर व्यवसाय या व्यक्ति को भरना चाहिए। इससे पब्लिक का ही फायदा है। व्यक्ति चाहे तो ITR फाइल करके आयकर विभाग से कह सकता है कि वह टैक्स स्लैब के अंतर्गत नहीं आता है।

ज़ीरो आईटीआर भी फाइल की जाती है

अगर किसी व्यक्ति की वार्षिक आय 2.5 लाख से कम है लेकिन वह अपनी आय का प्रमाणित साक्ष्य चाहता है तो उसके लिए ज़ीरो आईटीआर का भी प्रावधान किया गया है। जिन लोगों की सालाना आय 2.5 लाख से कम होती है उनको ज़ीरो आईटीआर भरना होता है।

आईटीआर कैसे फाइल होती है?

इनकम टैक्स रिटर्न भरने का तीन तरीका है। पहला तरीका है खुद से इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जाकर आईटीआर सबमिट करना होता है। दूसरा तरीका है, इनकम टैक्स की वेबसाइट से आईटीआर फॉर्म डाउनलोड करके उसे भरकर उसके साथ जरूरी कागजात अटैच करके आयकर विभाग में जमा करना होता है। तीसरा तरीका होता है किसी चार्टेड अकाउंटेंट की सहायता से इनकम टैक्स रिटर्न करना करना होता है।

इस तरह करते हैं आईटीआर स्टेटस की जांच

सबसे पहले इनकम टैक्स की वेबसाइट ओपन करना होता है। वेबसाइट की डैशबोर्ड पर आपको ‘व्यू रिटर्न्स/फॉर्म्स’ का विकल्प मिलेगा। इसके बाद व्यू रिटर्न्स/फॉर्म्स’ पर क्लिक करें। इसके बाद इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) और असेसमेंट इयर का विकल्प चुनें और सबमिट करना होता है। सबमिट करते ही आपको दिख जायेगा कि आपके द्वारा गई आईटीआर सिर्फ वेरिफाई हुई है या प्रोसेस भी हो चुकी है।

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एकनॉलेजमेंट नंबर से कैसे आईटीआर स्टेटस चेक होता है

आईटीआर फाइल करने के बाद आपको एक एकनॉलेजमेंट मिलता है। इन एकनॉलेजमेंट नंबर से आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर आईटीआर स्टेटस चेक सकते है। इसमें तरीके में ई-फाइलिंग वेबसाइट के होम पेज पर जाएं और सबसे बाईं ओर सर्विसेज टैब में जाएं।

यहां आपको चेक इनकम टैक्स्टेस रिटर्टनस का विकल्प दिखेगा। अब आपको यहां आईटीआर स्टेटस विकल्प पर क्लिक करना होता है और मांगी गई जानकारी भरने के बाद एक कैप्चा आएगा, इसे भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक कर देना होता है। सबमिट करते ही आपके सामने आपका आईटीआर स्टेटस सामने आ जायेगा।

एकनॉलेजमेंट नंबर से इस तरह आईटीआर स्टेटस चेक होता है

आईटीआर फाइल करने के बाद आपको एक एकनॉलेजमेंट मिलता है। इन एकनॉलेजमेंट नंबर से आप इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर जाकर आईटीआर स्टेटस चेक सकते है। इसमें तरीके में ई-फाइलिंग वेबसाइट के होम पेज पर जाएं और सबसे बाईं ओर सर्विसेज टैब में जाएं।

यहां आपको चेक इनकम टैक्स्टेस रिटर्टनस का विकल्प दिखेगा। अब आपको यहां आईटीआर स्टेटस विकल्प पर क्लिक करना होता है और मांगी गई जानकारी भरने के बाद एक कैप्चा आएगा, इसे भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक कर देना होता है। सबमिट करते ही आपके सामने आपका आईटीआर स्टेटस सामने आ जायेगा।

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