जिस प्रकार बारहवीं क्लास में मिले अंकों के आधार से यह तय होता है की विद्यार्थी को कैसे कॉलेज में एडमिशन मिलेगा। ठीक इसी प्रकार ग्राहक के सिबिल स्कोर से यह तय होता है कि ग्राहक को लोन (किसी भी प्रकार का, जैसे: बिजनेस लोन, पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन इत्यादि) मिलेगा या नहीं मिलेगा।

हमारे जीवन में नंबर का बहुत महत्व है। बचपन में अच्छे अंक प्राप्त करने का दबाव होता है। कॉलेज में बेहतरीन स्कोर करने का दबाव होता है। कॉलेज के बाद अच्छी सैलरी वाली नौकरी करने का दबाव होता है। लोन लेने के लिए बेहतरीन क्रेडिट स्कोर चाहिए होता है। एक तरह से हम कह सकते हैं की हम नंबर सिस्टम से हम घिरे हुए हैं।

यह अलग बात है की बेहतर नंबर होने के बाद चीजें बहुत असान हो जाती हैं। विद्यालय में बेहतर नंबर आने से मनमुताबिक स्ट्रीम पढ़ने का मौका मिलता है। बारहवीं में बेहतर नंबर लाने के बाद बेहतरीन कॉलेज में दाखिला मिल जाता है। अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलने के बाद जीवन काफी आसान हो सकता है।

अगर सिबिल स्कोर बेहतर होता है तो के स्कोर से हाई एजुकेशन का द्वारा खुलता है। ठीक इसी प्रकार अच्छा क्रेडिट स्कोर से लोन (किसी भी प्रकार का, जैसे: बिजनेस लोन, पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन इत्यादि) मिलने में आसानी होती। आइये सबसे पहले यह समझते हैं कि सिबिल क्या है और सिबिल स्कोर कैसे किसे कहते हैं।

सिबिल क्या होता है- व्हाट इस अ सिबिल?

क्रेडिट स्कोर को सिबिल स्कोर के नाम से भी जाना जाता है। सिबिल एक कंपनी है, इसका पूरा नाम  ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड (पहले यह क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड था) हैं। यह कंपनी लोगों के बैंकिंग साख की जांच करती है।

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ट्रांसयूनियन सिबिल भारत की अग्रणी क्रेडिट यानी साख इन्फॉर्मेशन कंपनी है और यह दुनिया भर के ग्राहकों की जानकारियों का विशालतम संग्रह रखने वाली कंपनियों में एक है। वर्तमान में इस कंपनी के पास पास सभी अग्रणी बैंकों, वित्तीय संस्थानों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और हाउसिंग फायनांस कंपनियों सहित 2,400 से अधिक सदस्य हैं और हम 550 मिलियन से अधिक व्यक्तियों और व्यवसायों के क्रेडिट रेकॉर्ड्स हैं।

सिबिल कंपनी का उद्देश्य ऐसी जानकारी से जुडे समाधान निर्मित करना जिसकी बदौलत व्यवसाय बढने में सक्षम हों और ग्राहकों को तेज, सस्ती क्रेडिट और अन्य सेवाओं तक पहुँच प्रदान हो। सिबिल कंपनी लोन प्रैवाइडरों के लिए रिस्क मैनेज और करना और लागत घटाकर लाभ क्षमता बढाने में मदद करती है।

 क्रेडिट स्कोर के बारें में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

  • सिबिल क्रेडिट स्कोर का और सेविंग अकाउंट का कोई लेना – देना नही होता है। दोनों अलग – अलग दो चीजें हैं।
  • क्रेडिट स्कोर से कभी कोई भी व्यक्ति आपके बैंक अकाउंट में जमा या निकाले गये पैसों के बारें में जानकारी नही प्राप्त कर सकता है।
  • सिबिल क्रेडिट स्कोर तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में किसी को कोई जानकारी नही होती है। यह प्रक्रिया आन्तरिक तरीके से पूरी की जाती है।
  • खुद से सिबिल क्रेडिट स्कोर चेक करना कभी भी नेगेटिव नही होता है। इससे आपके लोन एप्लीकेशन पर कोई फर्क नही पड़ता है।
  • यदि कोई व्यक्ति किन्हीं कारणों से कभी डिफॉल्टर रहा हो तो भी सिबिल उसको सार्वजनिक तरीके से डिफॉल्टर प्रदर्शित नही करता है।
  • सिबिल क्रेडिट के बारे में यह जानकारी पूरी तरह गलत है कि यह सिर्फ नेगेटिव की जाँच करता है।
  • सिबिल क्रेडिट स्कोर के आधार पर कभी किसी का बैंक खाता बंद नही हो सकता है।

क्रेडिट स्कोर कितने तरह का होता है ?

सिबिल क्रेडिट स्कोर 3 अंकों की एक संख्या होती है। सिबिल स्कोर की संख्या 300 से स्टार्ट होकर 900 तक का पहुंचती है। इसी के बीच यह तय होता है की किस ग्राहक का सिबिल स्कोर बेहतर है और किस ग्राहक का सिबिल स्कोर खराब की कैटेगरी में आता है। आइये सिबिल स्कोर की कैटेगरी को समझते हैं:

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800 से 900 के बीच का सिबिल स्कोर: 800 से 900 के बीच के सिबिल स्कोर को सर्वोत्तम की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है की जिन ग्राहकों का सिबिल स्कोर 800 से ऊपर है, वह लोन की EMI चुकाने में चूक नहीं करते हैं। ऐसे लोगों को बहुत जल्द और मार्केट रेट से कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है।

700 से 800 के बीच क्रेडिट स्कोर: यह बेहतरीन क्रेडिट स्कोर की कैटेगरी में आता है। जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर 700 से 800 के बीच होता है, उनके लिए यह माना जाता है कि ऐसे लोग लोन की वापसी बिना किसी कोताही किये वापस करते हैं। इन्हें भी लोन बहुत आसानी से मिल जाता है।

600 से 700 के बीच क्रेडिट स्कोर: इस प्रकार का सिबिल स्कोर बेहतर माना जाता है। इनफैक्ट 650 तक के क्रेडिट स्कोर को बेहतरीन क्रेडिट स्कोर की कैटेगरी में रखा जाता है। हालांकि इनका क्रेडिट स्कोर पर लोन की ब्याज दर में कोई राहत नहीं मिलती है, लोन की ब्याज दर वही होती है, जो मार्केट में चल रही होती है।

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500 से 600 के बीच क्रेडिट स्कोर: यह औसत कैटेगरी में आने वाला क्रेडिट स्कोर है। इतना क्रेडिट स्कोर होने पर लोन मिलना या नहीं मिलना, पूरी तरह से लोन प्रदाता बैंक या कंपनी के निर्णय के ऊपर आधारित होता हो। अगर, लोन मिलता भी है तो लोन की ब्याज दर बहुत अधिक होती है।

500 से कम सिबिल स्कोर: 500 से कम क्रेडिट स्कोर होने पर खराब क्रेडिट स्कोर की कैटेगरी में रखा जाता है। 500 से कम क्रेडिट स्कोर होने पर लोन मिलने की संभवना बहुत कम होती है।

अच्छा क्रेडिट स्कोर होने के फायदे

अच्छा सिबिल स्कोर होने पर बहुत से फायदे होते हैं, जैसे:

  • बिजनेस लोन / अन्य प्रकार का लोन बहुत आसानी से मिल जाता है।
  • बेहतरीन क्रेडिट स्कोर होने पर लोन की ब्याज दर मार्केट रेट की अपेक्षा बहुत कम होता है।
  • अच्छा सिबिल स्कोर पर बहुत आसानी से क्रेडिट कार्ड मिल जाता है।
  • बेहतरीन क्रेडिट होने पर ग्राहक बैंक या एनबीएफसी कंपनी की नजरों में बेहतरीन साख वाला ग्राहक बना रहता है, इससे यह फायदा होता है की व्यक्ति को जब भी बड़े अमाउंट का लोन चाहिए होता है, तो बहुत आसानी से प्राप्त हो जाता है।

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