केन्द्र सरकार की सभी योजना के साथ सभी राज्य सरकारों की सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार नंबर अनिवार्य हो गया है। आधार का इस्तेमाल व्यक्ति अपनी पहचान साबित करने के लिए भी करता है।

जब आधार कार्ड की शुरुआत हुई थी तब कैंप लगाकार लोगों के आधार कार्ड बनवाए गये। समय के साथ आधार बनवाने की प्रक्रिया कुछ सुस्त हुई। अब आधार बनवाने के लिए जहां आधार बनता है उस सेंटर पर जाना पड़ता है।

वर्तमान में आधार कार्ड सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सहज जन सुविधा केन्द्र और सरकारी बैंको में बनाए जाते हैं। जहां पहले आधार कार्ड बनवाने के लिए लोगों को जागरूक करना पड़ता था। वहीं अब लोग अपनी जरूरत समझकर आधार कार्ड बनवाने के लिए उत्सुक रहते हैं।

आधार की शुरुवात कब हुई? – Aadhar ki Shuruwat Kab Hui?

आधार कार्ड भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा।) द्वारा जारी होने वाला प्रमाण पत्र है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को यू.आई.डी.ए.आई (UIDAI) भी कहा जाता है।

2016 में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) आधार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र के तहत भारत सरकार द्वारा 12 जुलाई 2016 को स्थापित एक वैधानिक प्राधिकारी थी।

हालाँकि भारत सरकार द्वारा भारत के राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से योजना आयोग के तहत 28 जनवरी 2009 को ही आधार की शुरुआत हो गई थी। अधिसूचना में बताया गया था कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को यूनिक आइडेंटिटी डिटेल्स (यूआईडी), आधार योजना को लागू करने के लिए और नीतियों को निर्धारित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह हम देखते हैं कि आधार 2009 में ही शुरु हो गया था।

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आधार कार्ड की मान्यता क्या है?

एक लाइन में कहें तो आधार कार्ड समबंधित व्यक्ति का पहचान पत्र है। लेकिन यह परिचय पर्याप्त नही होगा। आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला सरकारी फोटोयुक्त पहचान पत्र है।

इसमें 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या दर्ज होती है। जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा) जारी करता है। यह संख्या “आधार नंबर” कहलाती है। जब भी कहीं किसी व्यक्ति को अपना आधार नंबर देना होता है तो वह इसी 12 अंकों वाली संख्या को देता है।

यहां पर यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि आधार कार्ड किसी भी भारतीय नागरिक का पहचान पत्र है न की नागरिकता प्रमाण पत्र है। पहचान पत्र और नागरिकता प्रमाण पत्र में अंतर होता है। पहचान पत्र यह सबित करता है कि व्यक्ति का नाम क्या है और व्यक्ति रहता कहां है।

नागरिकता प्रमाण पत्र से यह साबित होता है कि व्यक्ति किस देश का निवासी है। यहां नागरिकता साबित करने में और खुद की पहचान साबित करने में अंतर होता है। हमें इस भ्रांति में कभी भी नहीं रहना चाहिए कि पहचान पत्र और नागरिकता प्रमाण पत्र दोनों एक ही होता है।

आधार कार्ड कैसे मिलता है?

जिस भी व्यक्ति का आधार के लिए रजिस्ट्रेशन होता है उसका आधार कार्ड उसके द्वारा दर्ज कराए गये पता पर पहुंच जाता है। आधार के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के 90 दिनों के भीतर आधार कार्ड व्यक्ति के घर के पता पर पहुंचता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय डाक के अलावा कोई व्यक्ति आधार कार्ड खुद से अपना आधार कार्ड भारतीय विशिष्ट पहचान अधिकरण (UIDAI) की वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकता है। आधार डाउनलोड करने करने से पूर्व यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यक्ति का आधार कार्ड बन गया है।

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क्लिक कर जानिए कि कैसे पता चलेगा की आधार कार्ड बन गया है:

भारतीय डाक द्वारा प्राप्त और यू.आई.डी.ए.आई की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया ई-आधार दोनों ही समान रूप से मान्य हैं। कोई भी व्यक्ति आधार के लिए नामांकन करवा सकता है बशर्ते वह भारत का निवासी हो और यू।आई।डी।ए।आई। द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता हो।

यहां पर यह भी बता दें कि आधार कार्ड के लिए किसी भी व्यक्ति का उम्र और लिंग (जेण्डर) कुछ भी हो, सभी मान्य किया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति केवल एक बार नामांकन करवा सकता है। नामांकन निःशुल्क है। हां आधार कार्ड में करेक्शन के लिए कुछ शुल्क लिया जाता है।

क्लिक कर जानिए कि आधार कार्ड में करेक्शन कैसे होता है? 

अप्लाई करने के बाद भी आधार न बने या कोई गड़बड़ी होने पर ऐसे करें शिकायत

अक्सर ऐसा होता है कि बहुत से लोग आधार के लिए अप्लाई करते हैं लेकिन उनका लंबे समय तक आधार कार्ड जेनरेट नही होता है। यह भी होता है कि आधार कार्ड के लिए पंजीकरण यानी रजिस्ट्रेशन कराने के बाद आधार सेंटर का ऑपरेटर एक्नॉलेजमेंट रसीद नहीं देता है या जेनरेट नहीं होती है।

ऐसा भी होता है के लिए पंजीकरण करने वाला ऑपरेटर ठीक तरीके से व्यवहार नहीं करता है। या आधार कार्ड के लिए पंजीकरण करने के एवज में पैसे मांगे जा रहे हो तो इस स्थिति में व्यक्ति चाहें तो शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के लिए यहां बताए गये प्रोसेस को फ़ॉलो करें:

स्टेप 1:आधार की वेबसाइट www.uidai.gov.in लॉग इन करें।

स्टेप 2: वेबसाइट पर 2 ‘कॉन्टैक्ट एंड सपोर्ट’ बटन क्लिक करके उसमें से ‘ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म’ विकल्प सलेक्ट करके ‘फाइल ए कम्प्लेंट’ बटन पर क्लिक करें।

स्टेप 3: अब एक नया वेबपेज खुलेगा। इसमें आधार इनरॉलमेंट नंबर और एक्नॉलेजमेंट स्लिप पर मौजूद तारीख और वक्त डालें।

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स्टेप 4: अब आपको अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पिन कोड शहर/गांव/कस्बा डालकर शिकायत का प्रकार और कैटेगरी सलेक्ट करना होगा।

स्टेप 5: अब आपके सामने शिकायत लिखने का एक बॉक्स खुल जायेगा। इस शिकायत बॉक्स में आप 150 शब्दों के भीतर अपनी शिकायत लिखना लिखिए।

स्टेप 6: शिकायत लिखने के बाद नीचे आ जाइये, यहां पर एक कैप्चा दिखेगा। कैप्चा कोड दर्ज करने के बाद ‘सबमिट’ बटन पर क्लिक कर देना होगा।

आपको बता दें कि सबमिट बटन पर क्लिक करते ही आपकी शिकायत दर्ज हो जाएगी। इसके बाद आपको एक कंप्लेंट आईडी मिल जाएगी। इसी कम्प्लेंट आई नंबर से आप अपनी शिकायत का स्टेटस जान सकते हैं। अगर आपको अपनी शिकायत का स्टेटस जानना है तो इस प्रोसेस को फ़ॉलो करें:

अपनी शिकायत का स्टेटस ऐसे चेक करें

  • आधार की वेबसाइट www.uidai.gov.in लॉग इन करें।
  • ‘कॉन्टैक्ट एंड सपोर्ट’ टैब के ‘ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म’ में ‘चेक कम्प्लेंट स्टेटस’ बटन पर क्लिक करें।
  • अब पहले से जनरेट की हुई कंप्लेंट ID और कैप्चा कोड डालें।
  • कैप्चा डालने के बाद ‘चेक स्टेटस’ बटन पर क्लिक करें।

चेक स्टेटस बटन पर क्लिक करते ही आपको आपनी शिकायत का स्टेटस दिखने लगेगा। इसके अलावा आप चाहें तो टोल फ्री नंबर पर कॉल करके और ईमेल के जरिये भी अपनी शिकायत का स्टेटस जान सकते हैं।

टोल फ्री नंबर के जरिये अपनी शिकायत का स्टेटस जानने के लिए आधार की हेल्प ईमेल आईडी help@uidai.gov.in पर ईमेल करना होता है। टोल फ्री नंबर पर फोन के के जरिये अपनी शिकायत का स्टेटस जानने के लिए टोल फ्री नंबर 1947 पर कॉल करना होता है। आपको ध्यान दिला दें कि अपनी शिकायत का स्टेटस जानने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम्प्लेंट आईडी बताना जरूरी है।

 

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